दिल्ली से अमेरिका पहुंचे सिद्धार्थ जवाहर ने कभी अमेरिकी सपने को हकीकत में बदलने की कोशिश की थी। पढ़ाई के लिए अमेरिका गए सिद्धार्थ ने आगे चलकर इन्वेस्टमेंट की दुनिया में अपनी पहचान बनाई। उनकी कंपनी में बड़े इन्वेस्टर जुड़े, कई मशहूर हस्तियों के साथ उनकी तस्वीरें भी सामने आईं और वह समाजसेवा के कामों से भी जुड़े रहे। लेकिन कुछ ही सालों में यही कहानी करोड़ों डॉलर के इन्वेस्टमेंट स्कैम और जेल की सजा तक पहुंच गई।
अमेरिका की एक डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने सिद्धार्थ जवाहर को इन्वेस्टर्स के साथ करोड़ों डॉलर की धोखाधड़ी के मामले में 11 साल जेल की सजा सुनाई है। अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, जवाहर ने निवेशकों से 3.5 करोड़ डॉलर से अधिक जुटाए, लेकिन इसका केवल करीब 28 फीसदी हिस्सा ही निवेश किया। मामले में 64 से अधिक पीड़ितों की पहचान हुई है। इनमें अमेरिकी सिंगर टेलर स्विफ्ट के पति और NFL स्टार ट्रैविस केल्से भी शामिल हैं।
दिल्ली से शुरू हुई अमेरिकी सपने की कहानी
सिद्धार्थ जवाहर का जन्म और शुरुआती जीवन दिल्ली में बीता। 2005 में 21 साल की उम्र में वह अमेरिका चले गए और ऑस्टिन स्थित टेक्सास यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने फाइनेंशियल सेक्टर में काम शुरू किया और बाद में वेंचर कैपिटल की दुनिया में कदम रखा।
अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के मुताबिक, जवाहर अगस्त 2005 से जनवरी 2010 के बीच कई बार कानूनी तरीके से अमेरिका गए थे। लेकिन बाद में उनकी रहने की अनुमति खत्म हो गई और इसके बावजूद वह अमेरिका में रुके रहे।
जवाहर ने अपने पुराने इंटरव्यू में अपने परिवार और सामाजिक सेवा से जुड़े अनुभवों का भी जिक्र किया था। उन्होंने बताया था कि उनके माता-पिता उन्हें और उनकी बहन को पोलियो टीकाकरण शिविरों में लेकर जाते थे। उनके मुताबिक, इन अनुभवों ने उन्हें समाज के लिए कुछ करने की प्रेरणा दी।
इन्वेस्टमेंट कंपनी से बढ़ी पहचान
2010 के आखिर में सिद्धार्थ जवाहर ने फ्रैंक क्रासोवेक और जोहर जिव के साथ मिलकर टेक्सास स्थित इन्वेस्टमेंट कंपनी ‘स्विफ्टआर्क कैपिटल LLC’ की शुरुआत की। 2013 में कंपनी को इन्वेस्टमेंट एडवाइजर के तौर पर रजिस्टर किया गया।
शुरुआत में कंपनी ने फूड, बेवरेज और रिटेल सेक्टर की कंपनियों में निवेश किया। लेकिन 2015 में जवाहर ने इन्वेस्टर्स का पैसा ‘फिलिप मॉरिस पाकिस्तान’ में लगाना शुरू किया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 2019 तक इन्वेस्टर्स के फंड का करीब 99 फीसदी हिस्सा इसी कंपनी के शेयर में लगा हुआ था।
जब इस शेयर की कीमत गिरने लगी तो स्थिति बिगड़ गई। टेक्सास के नियामकों के मुताबिक, सितंबर 2019 से जवाहर और स्विफ्टआर्क कैपिटल ने इस आसानी से न बिकने वाले निवेश की कीमत उसकी असली कीमत से ज्यादा बताई।
3.5 करोड़ डॉलर जुटाए, सिर्फ 28 फीसदी किया निवेश
अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, जुलाई 2016 से दिसंबर 2023 के बीच सिद्धार्थ जवाहर ने निवेशकों से 3.5 करोड़ डॉलर से अधिक जुटाए, लेकिन करीब 1 करोड़ डॉलर ही निवेश किया। अभियोजकों का आरोप है कि जवाहर नए इन्वेस्टर्स से मिले पैसे का इस्तेमाल पुराने इन्वेस्टर्स को भुगतान करने के लिए करते थे। इस तरह नए इन्वेस्टर्स से मिला पैसा पुराने इन्वेस्टर्स को देने में इस्तेमाल किया जाता रहा।
जांच में यह भी सामने आया कि इन्वेस्टर्स के पैसे का इस्तेमाल प्राइवेट जेट की उड़ानों, महंगे होटलों, ऑस्टिन और न्यूयॉर्क में अपार्टमेंट, प्राइवेट क्लबों की मेंबरशिप, कपड़ों और महंगी मौज-मस्ती पर किया गया।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, जब फिलिप मॉरिस पाकिस्तान के शेयर का मूल्य गिरा, तब इन्वेस्टर्स को इसकी जानकारी नहीं दी गई। इसके बजाय उन्हें मुनाफे की गलत जानकारी दी गई। कुछ इन्वेस्टर्स को यह भी बताया गया कि उनका पैसा कुछ खास कंपनियों में लगाया गया है, जबकि अभियोजन पक्ष के अनुसार ऐसा निवेश किया ही नहीं गया था।
ट्रैविस केल्से समेत कई मशहूर लोग बने निवेशक
सिद्धार्थ जवाहर ने अमेरिका में रहते हुए सिर्फ कारोबारी पहचान ही नहीं बनाई, बल्कि कई मशहूर हस्तियों के साथ भी उनके संबंध नजर आए। उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, टीवी होस्ट माइकल स्ट्राहन और एक्टर केविन हार्ट के साथ तस्वीरें पोस्ट की गई थीं। सिद्धार्थ चार साल तक टेनिस स्टार एंडी रॉडिक की फाउंडेशन के बोर्ड में भी रहे। यह फाउंडेशन युवाओं के लिए कार्यक्रमों के लिए पैसे जुटाती है।
लेकिन बाद में सिद्धार्थ के साथ तस्वीरों में नजर आए कुछ लोग उनके इन्वेस्टमेंट स्कैम के शिकार भी बन गए। इनमें NFL खिलाड़ी ट्रैविस केल्से और NBA खिलाड़ी गैरी हैरिस, टिम हार्डवे जूनियर और मेसन प्लमली के नाम शामिल हैं।
जांच को प्रभावित करने की भी कोशिश का आरोप
मामले की जांच आगे बढ़ने के बाद अभियोजन पक्ष ने सिद्धार्थ पर जांच में बाधा डालने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया। अभियोजकों के मुताबिक, उन्होंने अपनी बहन से अपने आईफोन का डेटा दूर से डिलीट करने के लिए कहा था, ताकि उसमें मौजूद सबूत मिटाए जा सकें।
सरकार ने यह भी आरोप लगाया कि सिद्धार्थ ने अपने अमेरिका में रहने की स्थिति और पैसों से जुड़े मामलों के बारे में झूठ बोला। इसके अलावा, उन पर एक पीड़ित को FBI से बात करने से पहले अपने पक्ष में बयान देने के लिए मनाने की कोशिश का भी आरोप लगाया गया।
सजा सुनाए जाने से पहले सिद्धार्थ ने पॉजिटिव पब्लिसिटी के लिए ‘एक्सियम स्ट्रैटेजीज’ को 10,000 डॉलर का भुगतान किया था। अभियोजन पक्ष ने इस संबंध में एक कॉन्ट्रैक्ट और सिद्धार्थ तथा ‘एक्सियम’ के संस्थापक जेफ रो के बीच हुई फोन कॉल की रिकॉर्डिंग को भी मामले का हिस्सा बनाया।
सांसद ने मांगी थी 48 महीने की सजा
मामले में मिसौरी के कांग्रेस सदस्य सैम ग्रेव्स ने जज को पत्र लिखकर सिद्धार्थ को 48 महीने की सजा देने की मांग की थी। ग्रेव्स ने कहा था कि उन्होंने यह पत्र अपनी पर्सनल कैपेसिटी से लिखा था।
ग्रेव्स का एक्सियम स्ट्रैटेजीज के संस्थापक जेफ रो से पुराना संबंध रहा है। रो पहले ग्रेव्स के चीफ ऑफ स्टाफ रह चुके हैं। कैंपेन फाइनेंशियल रिकॉर्ड के अनुसार, ग्रेव्स के कैंपेन ने 2006 से ‘एक्सियम’ को करीब 17.7 लाख डॉलर का भुगतान किया था। हालांकि, उपलब्ध पब्लिक इनफॉरमेशन से यह साबित नहीं होता कि ग्रेव्स को सिद्धार्थ की धोखाधड़ी की जानकारी थी या वह इसमें शामिल थे।
अमेरिकी सपना जेल की सजा पर खत्म
जनवरी में सिद्धार्थ जवाहर ने वायर फ्रॉड के तीन मामलों में अपना अपराध स्वीकार किया था। अब अदालत ने उन्हें 11 साल की जेल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उन्हें 3.135 करोड़ डॉलर की भरपाई करने का आदेश भी दिया गया है।
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