मालवीय नगर अग्निकांड में जीवित बचीं और बांग्लादेशी नागरिक शामिया चौधरी ने सनसनीखेज खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने शवों को बांग्लादेश ले जाने फ्री टिकट मुहैया कराने के लिए कहा था, लेकिन बाद में दूतावास में उनसे 1.8 लाख रुपये का भुगतान करने को कहा गया।

एएनआई से बात करते हुए शामिया चौधरी ने कहा कि परिवार को सूचित किया गया था कि शव को ले जाने का खर्च सरकार वहन करेगी। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि यह आश्वासन पूरा नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने शव को बांग्लादेश निःशुल्क पहुंचाने का वादा किया था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बजाय, उन्होंने दूतावास में हमसे 1,80,000 रुपये वसूले। मैं जानना चाहती हूं कि यह सेवा निःशुल्क क्यों नहीं दी गई। मुझे नहीं पता कि हमें पैसे वापस मिलेंगे या नहीं, लेकिन मैं यह जानना चाहती हूं कि उन्होंने हमसे भुगतान की मांग क्यों की।”

बता दें, दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश होटल में हुए उस अग्निकांड में 23 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी।

मैक्‍स अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद शामिया चौधरी ने एनडीटीवी से बात करते हुए दर्दभरी दास्तां को सुनाया। जिसे सुनकर हर किसी के रोंगटे खड़े हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि आपदा के समय जब सरकार मुफ्त मदद के दावे कर रही थी, तब उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर अपनों के शव वतन ले जाने के बदले उनसे लाखों रुपये वसूल लिए गए।

शामिया चौधरी ने एनडीटीवी से कहा कि मैं बांग्लादेश की रहने वाली हूं। 2 जून को हम पांच लोग दिल्ली आए थे। एयरपोर्ट से आकर शाम सात बजे होटल में रूम बुक किया था। तीसरी मंजिल पर 302 और 304 नंबर के रूम में नाइट स्टे किया था। सुबह करीब 7-8 बजे मामा ने बताया कि जहां कुकिंग हो रही है, वहां छोटी सी आग लगी हुई है। वह यह देखकर हम सबको बुलाने ऊपर आए थे। हम सभी सुरक्षित नीचे जाते, उससे पहले ही आग तेजी फैल गई। पहली से लेकर तीनों मंजिले आग से घिर गईं। अब हम चाहकर भी नीचे नहीं जा सकते थे। हम सब घबरा गए थे और भारी तनाव में आ गए कि कहां जाएं, क्या करें? वहां कोई जंगला या खिड़की कुछ भी नहीं था। उस होटल में कोई आपातकालीन दरवाजा भी नहीं था कि हम सुरक्षित वहां से निकल सकें।

शामिया चौधरी ने आगे बताया कि उसके बाद पूरे होटल की लाइट चली गई। चारों तरफ बस धुआं और आग दिखाई दे रही थी। मैंने अपने मोबाइल की फ्लैश लाइट ऑन कर रखी थी। मैं जान बचाने के लिए एक नाइजीरियन कपल के पीछे-पीछे उनके रूम में चली गई। उन्होंने डरकर रूम बंद कर लिया। थोड़ी देर में एक जोरदार धमाका हुआ फिर बहुत कोशिश के बाद मैंने एक ग्लास तोड़ा और आग से बची। देखा तो सब चिल्ला रहे थे। हम तक बचाव दल भी नहीं पहुंच पा रहा था, क्योंकि गली बहुत संकरी थी।

उन्होंने कहा कि अब तक मेरी हिम्मत जवाब देने लगी थी और ऑक्सीजन की कमी महसूस होने लगी थी। लग रहा था कि अब हम नहीं बचेंगे। हम बेहोश हो गए। मैक्स अस्पताल की वजह से मेरी जान बची है। अस्पताल में तीन दिन मैं लाइफ सपोर्ट पर रही। मुझे यहां एक सप्ताह बाद होश आया तो पता चला कि हम पांच में से दो लोग, मेरी मामी और मामी के भाई की मौत हो चुकी है। उन दोनों के शव बांग्लादेश पहुंचा दिए गए हैं।

दूतावास ने प्रत‍ि शव 1 लाख 80 हजार रुपए ल‍िए

शामिया चौधरी ने आगे बताया कि सरकार ने वादा किया था कि हादसे में जान गंवाने वाले विदेशी लोगों के परिजनों को 10 लाख रुपए की आर्थिक मदद की जाएगी और शव भिजवाने के लिए मुफ्त में टिकट मुहैया करवाएंगे, लेकिन हमें कुछ नहीं मिला है। हमें दूतावास को प्रति शव 1 लाख 80 हजार रुपए देने पड़े हैं। वह पैसों के बिना शव को बांग्लादेश पहुंचाने के लिए तैयार नहीं हो रहे थे।

दिल्ली अग्निकांड: कागजों में थी लोगों की सुरक्षा और मौत हकीकत में

कोई हादसा एक मामूली कोताही का नतीजा हो सकता है, लेकिन अगर वह गलती बनी रहती है या उससे सबक लेकर भविष्य में सावधानी बरतने और बचाव के जरूरी इंतजाम नहीं किए जाते हैं, तो उन्हें आपराधिक लापरवाही से कम नहीं माना जा सकता। दिल्ली में मालवीय नगर के एक होटल में दो दिन पहले आग लगने से इक्कीस लोगों की जान चली गई। इसके अलावा, बिहार के मुजफ्फरपुर के एक अस्पताल के सघन चिकित्सा कक्ष सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में कई जगहों पर रिहाइशी इमारतों में आग लगने की घटनाएं सामने आईं। पढ़ें पूरी खबर।