दिल्ली के उपराज्यपाल ने फायर ब्रिगेड कर्मियों और जेल की नौकरियों में पूर्व अग्निवीरों के लिए 20% आरक्षण को मंजूरी दी है। एलजी तरनजीत सिंह संधू ने दिल्ली अग्निशमन सेवा में फायर ऑपरेटर के पद पर और जेल विभाग में वार्डर और मैट्रन के पदों पर सीधी भर्ती में पूर्व अग्निवीरों के लिए 20% क्षैतिज आरक्षण (Horizontal Reservation) को मंजूरी दे दी है।
गृह विभाग ने गुरुवार को जारी एक अधिसूचना में कहा, “यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 309 द्वारा प्रदत्त शक्तियों के तहत दिल्ली अग्निशमन सेवा में फायर ऑपरेटर के पद से संबंधित भर्ती नियमों के अनुसार लिया गया है। यह भारत सरकार की पूर्व अग्निवीरों के पुनर्वास की नीति का अनुसरण करता है जिसे केंद्रीय गृह सचिव के दिनांक 25 मार्च 2026 के पत्र के माध्यम से सूचित किया गया था।”
अग्निवीर उम्मीदवारों को आयु में तीन साल की छूट मिलेगी
आदेश के अनुसार, इन पदों के लिए आवेदन करने वाले पूर्व अग्निवीर उम्मीदवारों को भर्ती नियमों के तहत निर्धारित ऊपरी आयु सीमा के अतिरिक्त तीन साल की छूट मिलेगी। आदेश में कहा गया है, “अग्निवीर योजना के पहले बैच के उम्मीदवारों को निर्धारित ऊपरी आयु सीमा के अतिरिक्त पांच वर्ष की छूट दी जा सकती है।”
आदेश में यह भी कहा गया है कि पूर्व अग्निवीरों के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा (Physical Efficiency Test) में छूट संबंधित विभाग द्वारा तय की जाएगी। आदेश में कहा गया है, “उपयुक्त पूर्व अग्निवीरों की अनुपलब्धता की स्थिति में, भारत सरकार के क्षैतिज आरक्षण संबंधी लागू दिशानिर्देशों का पालन किया जाएगा।” इसमें यह भी जोड़ा गया है कि अन्य क्षैतिज आरक्षण श्रेणियों की तर्ज पर सभी पूर्व अग्निवीरों को 20 प्रतिशत आरक्षण उपलब्ध होगा।
अग्निवीरों के पहले बैच ने अभी तक अपनी सेवा अवधि पूरी नहीं की
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इस महीने की शुरुआत में संसद में कहा था कि अग्निपथ योजना के तहत पहले बैच के कुल अग्निवीरों में से 75% के सशस्त्र बलों में चार साल की सेवा पूरी करने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, “सरकार ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) और असम राइफल्स में कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी)/राइफलमैन के पदों पर 50% रिक्तियों का आरक्षण पूर्व अग्निवीरों के लिए किया है। फिलहाल, अग्निवीरों के पहले बैच ने अभी तक अपनी सेवा अवधि पूरी नहीं की है।”
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विदेशी अनुदान विनियमन (संशोधन) विधेयक (FCRA) को लेकर चल रहे गतिरोध के बीच सरकार इसे जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) के पास भेजने के बारे में सोच रही है। यह बिल सदन में विचाराधीन है। खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें
