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संसद मार्ग पर खेत और किसान

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सीमा पर जवान और खेत में किसान दुखी है। केंद्र सरकार ने किसानों से किया गया वादा पूरा नहीं करके उनकी की पीठ में छुरा घोंपा है। केजरीवाल ने मोदी सरकार की ओर से लागू फसल बीमा योजना को धोखा बताते हुए कहा कि यह योजना बीमा कंपनियों को मुनाफा देकर किसानों की आय पर डाका डाल रही है।

शुक्रवार (30 नवंबर) को दिल्ली में किसान मुक्ति मार्च में शामिल हुए विपक्षी दल उनके समर्थन में एकजुट दिखे। (फोटो – पीटीआई)

देशभर से दिल्ली पहुंचे तकरीबन 40 हजार किसानों ने शुक्रवार को संसद मार्ग पर रैली निकाली। कर्ज राहत और उपज का उचित मूल्य देने समेत उनकी कई मांगें हैं। वहीं अन्नदाताओं के ‘किसान संसद’ मंच से विपक्ष ने भी केंद्र सरकार पर पुरजोर हमला बोला। किसानों की मांगों के समर्थन में तकरीबन सभी विपक्षी दल एकजुटता से खड़े रहे। कांंग्रेस, वामदल, सपा, आम आदमी पार्टी, राकांपा, तृणमूल कांग्रेस, नेशनल कांफ्रेंस व स्वराज इंडिया, सहित करीब एक दर्जन राजनीतिक दलों ने सरकार से कहा कि किसानों की मांगों को वह तुरंत माने। सभी दलों ने यह भी कहा कि संसद का विशेष सत्र बुलाकर लंबित विधेयकों को पारित कराया जाए ताकि किसानों के कृषि संकट का स्थायी समाधान निकल सके।

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के बैनर तले संसद मार्ग पर जुटे किसानों ने कृषि संकट के स्थायी समाधान के लिए पहली बार सरकार के सामने समस्या के समाधान का मसौदा पेश किया है। इस मसौदे में पूर्ण कर्ज माफी और फसलों की लागत की डेढ़ गुना कीमत के लिए संसद में लंबित दो महत्त्वपूर्ण विधेयकों को पास करने की मांग की गई है। पहला विधेयक किसानों की ऋण मुक्ति का है, जबकि दूसरा कृषि उपज के उचित और लाभकारी मूल्य से जुड़ा है। इससे पहले शुक्रवार सुबह लगभग 10:30 बजे तकरीबन 30 हजार किसानों ने भारी सुरक्षा इंतजामों के बीच रामलीला मैदान से संसद भवन तक पैदल मार्च शुरू किया।

पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए आंदोलनकारियों को संसद मार्ग थाने से आगे बढ़ने से रोक दिया। रैली में स्टूडेंट फॉर फार्मर्स, जर्नलिस्ट फॉर फार्मर्स, आर्टिस्ट फॉर फार्मर्स, लॉयर्स फॉर फार्मर्स और डॉक्टर्स फॉर फार्मर्स जैसे बैनर लिए बुद्धिजीवी लोग भी शामिल हुए। वहीं जंतर-मंतर पर हुई किसान संसद में जिन प्रमुख लोगों ने केंद्र सरकार पर हमला किया उनमें कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, भाकपा सांसद डी राजा, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, शरद यादव, शरद पवार, किसान नेता वीएम सिंह, अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्ला, अखिल भारतीय किसान महासभा के नेता अतुल कुमार अनजान, स्वराज्य अभियान के नेता योगेंद्र यादव, नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर, किसान मुद्दों पर लिखने वाले मशहूर पत्रकार पी सार्इंनाथ व डॉ सुनीलम समेत कई प्रमुख नेता व सांसद शामिल रहे।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने केंद्र पर किसानों के साथ धोखा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर सरकार अपने 15 पूंजीपति मित्रों का साढ़े तीन लाख करोड़ रुपए का कर्ज माफ कर सकती है तो किसानों का कर्ज माफ करने में उसे परेशानी क्यों है। उन्होंने कहा कि किसान सरकार से तोहफा नहीं, बल्कि अपना हक मांग रहा है। राहुल गांधी ने किसानों का कर्ज पूरी तरह से माफ करने और फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए कानून बनाने की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि किसानों की इस मांग समर्थन में विपक्ष के सभी दल एकजुट हैं। हमारी विचारधारा अलग हो सकती है, मगर किसान और युवाओं के भविष्य के लिए हम सब एक हैं।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सीमा पर जवान और खेत में किसान दुखी है। केंद्र सरकार ने किसानों से किया गया वादा पूरा नहीं करके उनकी की पीठ में छुरा घोंपा है। केजरीवाल ने मोदी सरकार की ओर से लागू फसल बीमा योजना को धोखा बताते हुए कहा कि यह योजना बीमा कंपनियों को मुनाफा देकर किसानों की आय पर डाका डाल रही है। ‘संसद मार्च’ को खेती किसानी की बड़ी लड़ाई बताते हुए अखिल भारतीय किसान महासभा के कार्यकारिणी सदस्य राजीव चौधरी ने कहा कि किसान अकेले नहीं हैं। बल्कि पूरा देश उनके साथ चल रहा है। देश में कृषि संकट और गहरा करने का आरोप लगाते हुए अखिल भारतीय किसान महासभा (एआइकेएम) के महासचिव राजाराम सिंह ने कहा कि पिछले साढ़े चार साल में किसानों के लिए ‘एक भी बड़ी पहल’ नहीं की गई।

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