दिल्ली के एक कपल के लिए सरोगेसी के जरिए बच्चा पाने की कोशिश एक बुरा सपना साबित हुई। दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले एक दंपति ने कई सालों की असफल कोशिश के बाद सरोगेसी के माध्यम से बच्चा करने के लिए दिल्ली के एससीआई इंटरनेशनल अस्पताल से संपर्क किया। हालांकि, यह शायद उनके जीवन का सबसे गलत फैसला साबित हुआ। किस तरह अस्पताल ने बच्चा पाने के लिए बेताब इस कपल को गुमराह किया और उनसे पैसे ऐंठे यह हैरान करने वाला है।
साल 2015 में शादी करने के बाद से दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले एक कपल ने कई सालों तक माता-पिता बनने का सपना देखा। साल 2020 तक कई अस्पतालों से परामर्श करने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि पत्नी के लिए इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) के माध्यम से गर्भधारण करना मुश्किल है। उस समय 40 साल की उम्र के इस कपल ने साउथ दिल्ली के एससीआई इंटरनेशनल अस्पताल से संपर्क किया जो उन कुछ अस्पतालों में से एक था जहां सरोगेसी सेवाएं उपलब्ध थीं।
अस्पताल ने सरोगेट मदर का इंतजाम किया
अस्पताल ने एक सरोगेट मदर का इंतजाम किया। जल्द ही उन्हें पता चला कि वह जुड़वां बच्चों को जन्म देने वाली है। दंपति ने आरोप लगाया कि सरोगेसी की पूरी प्रक्रिया के दौरान उन्हें गुमराह किया गया। उन्हें सरोगेट मां से मिलने नहीं दिया गया और आखिर में बताया गया कि उनके एक जुड़वां बच्चे की मौत हो गई है। बाद में उन्हें एक जीवित शिशु दिखाया गया जिसके बारे में उन्हें संदेह हुआ कि वह बायोलॉजिकली उनका नहीं है।
कपल ने दिल्ली की अदालत में याचिका दायर की, जिसने दिसंबर 2024 में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। अदालत ने पाया कि आरोपों के आधार पर धोखाधड़ी, जालसाजी और सरोगेसी रैकेट की जांच आवश्यक है। हालांकि, अस्पताल के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर बाद में रोक लगा दी गई।
कपल को सरोगेट मां से मिलने की अनुमति नहीं दी गई
दंपति के अनुसार, उन्हें कथित तौर पर गर्भावस्था के शुरुआती महीनों के दौरान सरोगेट मां से मिलने की अनुमति कभी नहीं दी गई और उन्हें पूरी तरह से अस्पताल द्वारा दी गई जानकारियों पर निर्भर रहना पड़ा। कपल ने दावा किया कि उन्होंने सरोगेट मदर का अल्ट्रासाउंड कराने की मांग की थी लेकिन उन्हें अनुमति नहीं दी गई। इसके बजाय, अस्पताल ने खुद ही सभी अल्ट्रासाउंड किए और समय-समय पर रिपोर्ट साझा कीं।
25 फरवरी, 2021 को कपल ने कहा कि उन्हें पहली बार लैपटॉप पर सरोगेट मां की तस्वीर दिखाई गई। उन्होंने कहा कि वह लगभग 40 वर्ष की लग रही थी और सरोगेसी के लिए उपयुक्त नहीं लग रही थी। अस्पताल के अधिकारियों ने हालांकि इस बात पर जोर दिया कि वह 30 वर्ष की थी। दो चेकों के माध्यम से आंशिक भुगतान प्राप्त करने के बाद अस्पताल ने उन्हें सरोगेसी कॉन्टरैक्ट का ईमेल भेजा और उन्हें सूचित किया कि सरोगेट मां जुड़वां बच्चों को जन्म देने वाली है।
दंपति ने आरोप लगाया कि उसी साल जुलाई में वे आखिरकार सरोगेट मां से मिले लेकिन उसका पेट बिल्कुल सपाट था जबकि हमें बताया गया था कि वह लगभग पांच महीने की गर्भवती है और जुड़वां बच्चों की मां बनने वाली है।” दंपति ने कहा कि उन्होंने डॉक्टरों पर भरोसा करना जारी रखा क्योंकि सभी मेडिकल रिपोर्ट सामान्य दिखाई देती थीं। रिपोर्टें हमेशा एकदम सही होती थीं। लैब भी उन्हीं की थी। उन्होंने ऐसा माहौल बनाया था कि आप उनकी हर बात पर भरोसा कर लेते थे।
अस्पताल ने बताया कि जुड़वा बच्चों में से एक मृत पैदा हुआ
20 अगस्त, 2021 को दंपति ने दावा किया कि अस्पताल ने उन्हें अचानक सूचित किया कि सरोगेट मां को पेट में दर्द हो रहा है। दो दिन बाद उन्हें बताया गया था कि सरोगेट मां ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था जिनमें लड़की मृत पैदा हुई थी जबकि लड़का जीवित था। उन्होंने तुरंत अस्पताल से संपर्क किया जिसने कथित तौर पर उन्हें बताया कि बच्ची के शव को ठिकाने लगा दिया गया था और लड़का सी-पैप मशीन पर था और उसकी निगरानी की जा रही थी।
गुस्से में आकर परिवार ने अस्पताल से कहा कि वे सरोगेट मां से मिलना चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल ने उनसे कहा कि वह चली गई है और बच्चे के जन्म के बाद उनसे मिलने की उसकी कोई बाध्यता नहीं है। इसके बाद दंपति ने अदालत का रुख किया और आरोप लगाया कि अस्पताल के अधिकारियों ने उनके साथ धोखाधड़ी करने की साजिश रची थी। उनकी ओर से अधिवक्ता अमित कैन ने पैरवी की। दंपति ने दावा किया कि जीवित शिशु सरोगेट मां का बच्चा नहीं था और अस्पताल अधिकारियों ने बच्चे को उन पर थोपने का प्रयास किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरोगेट मां की पहचान का कोई दस्तावेजी प्रमाण प्रदान नहीं किया गया।
अदालत ने FIR दर्ज करने का आदेश दिया
16 दिसंबर 2024 को अदालत ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। साकेत न्यायालय की मजिस्ट्रेट देवंशी जनमेजा ने अपने आदेश में कहा, “रिकॉर्ड की सावधानीपूर्वक जांच से यह प्रतीत होता है कि सभी तथ्य और परिस्थितियां मिलकर धोखाधड़ी और जालसाजी जैसे कई अपराधों की ओर इशारा करती हैं और यह जांच करना आवश्यक है कि क्या सरोगेसी की कोई बड़ी साजिश रची जा रही है।”
अस्पताल के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न करने का आदेश
18 दिसंबर, 2024 को अस्पताल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद एससीआई अस्पताल ने आदेश के खिलाफ रोक लगाने की मांग करते हुए सत्र न्यायालय में याचिका दायर की। 22 जनवरी, 2025 को साकेत कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विशाल सिंह ने आदेश दिया कि अगले आदेश तक अस्पताल के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। एफआईआर दर्ज होने के बावजूद, किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई के विरुद्ध अंतरिम आदेश आज तक लागू है। मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी।
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गुरुग्राम के एक कपल के लिए आईवीएफ ट्रीटमेंट एक बुरा सपना साबित हुआ जब उनकी दोनों बेटियों के DNA उनसे मैच नहीं हुए। IVF ट्रीटमेंट से पैदा हुईं उनकी बच्चियां अपने माता-पिता में से किसी से भी मिलती-जुलती नहीं थीं जिसके बाद उन्होंने डीएनए टेस्ट कराने का फैसला किया। टेस्ट रिजल्ट ने उन्हें बुरी तरह हिला दिया। खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें
