Illegal PG Hub In Residential Area: दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर के कालेजों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए पसंदीदा ठिकाना रहा आरके पुरम का सत्य निकेतन अब तेजी से रिहायशी इलाके से ‘पीजी हब’ में तब्दील हो गया है। स्थानीय लोगों का दावा है कि इलाके में महज 30 फीसद मकान मालिक ही रह रहे हैं, जबकि अधिकांश ने मकानों को पीजी में तब्दील कर खुद गुरुग्राम या दिल्ली के दूसरे इलाकों में आशियाना बना लिया है।
रविवार को बेसमेंट समेत पांच मंजिला इमारत के भरभराकर ढहने की घटना ने इस पूरे पीजी कारोबार के साथ भवनों की सुरक्षा और मकान मालिकों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दूसरे राज्यों से आकर भी रहते हैं छात्र
दिल्ली सत्य निकेतन में मोतीलाल नेहरू कालेज, आत्माराम सनातन धर्म कालेज और श्री वेंकटेश्वर कालेज में पढ़ने वाले दूसरे राज्यों के बड़ी संख्या में छात्र रहते हैं। कालेजों के नजदीक होने के कारण यह इलाका छात्रों के बीच खासा लोकप्रिय है। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते कुछ वर्षों में यहां रिहायशी मकानों का स्वरूप तेजी से बदला है।
पीजी के लिए इस्तेमाल हो रहे मकान
कई मकान अब पूरी तरह पीजी के तौर पर इस्तेमाल किए जा रहे हैं। स्थानीय निवासियों के मुताबिक, सत्य निकेतन में अधिकांश मकान मालिक अब खुद नहीं रहते। उन्होंने अपने मकानों को पीजी के तौर पर किराए पर देकर दूसरे इलाकों में रहने का इंतजाम कर लिया है।
समस्याओं से मालिकों को नहीं पड़ता कोई फर्क
आरोप है कि कई मकान मालिक पीजी में रहने वाले छात्रों की समस्याओं और भवन की स्थिति देखने तक नहीं आते। किराया भी आनलाइन लिया जा रहा है और मकान मालिकों का इलाके से संपर्क लगभग खत्म हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इसका असर इलाके की बुनियादी सुविधाओं पर भी पड़ रहा है।
बारिश के दौरान नालियां और सीवर खुले पड़े रहते हैं। जलभराव की समस्या भी बनी रहती है, लेकिन इसके समाधान के लिए गंभीरता से काम नहीं किया जा रहा। इसके बावजूद इलाके में पांच-छह मंजिल तक की इमारतें खड़ी होती जा रही हैं।
20 साल से ज्यादा पुरानी इमारत में हादसा
रविवार को जिस इमारत के ढहने से बड़ा हादसा हुआ, उसके बारे में स्थानीय लोगों का कहना है कि वह 20 साल से अधिक पुरानी थी। आरोप है कि इतने लंबे समय में भवन के रखरखाव और जरूरी मरम्मत पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इलाके में ऐसी कई अन्य इमारतें भी हैं, जिन्हें समय रहते मरम्मत और संरचनात्मक जांच की जरूरत है।
सत्य निकेतन इलाके के पीजी में रहने वाले छात्र ज्यादातर हरियाणा, उत्तर प्रदेश और केरलम राज्यों से ताल्लुक रखते हैं। इनसे 12 से 16 हजार रुपए तक का बिस्तर का शुल्क लिया जाता है। लेकिन इनको सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं मिलता है।
पीजी को नियमों के तहत नियंत्रित करने का प्रयास
इस हादसे के बाद अब आवासीय मकान में व्यावसायिक रूप से पीजी चलाने की गतिविधियों की वैधता को लेकर पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। दिल्ली में पीजी और निजी छात्रावासों की बढ़ती संख्या और उनको सुरक्षा के लिहाज से नियंत्रित करने को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर काम किया जा रहा है।
खासकर छात्रावासों के भवनों के ढह जाने और दूसरी घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली सरकार,पुलिस के साथ स्थानीय प्रशासन एवं निकाय इनको वैधानिक नियमों और लाइसेंस प्रक्रिया के दायरे में लाने के लिए पुरजोर कोशिश में जुटी हैं, जिससे कि इस तरह के हादसे होने पर सीधे तौर पर जवाबदेही तय की जा सके।
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दिल्ली के सत्य निकेतन में एक पांच मंजिला बिल्डिंग गिर गई। रेस्क्यू का काम अभी भी चल रहा है। इसमें 6 छात्रों की मौत बताई जा रही है जबकि 11 लोगों को रेस्क्यू किया गया है। मामले की जांच शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि बिल्डिंग के बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर पर रिपेयर का काम चल रहा था, जो कथित तौर पर बिना इजाजत किया जा रहा था। बिल्डिंग में कोई सेफ्टी चेक भी नहीं था। साथ ही इमरजेंसी एग्जिट का कोई रास्ता भी नहीं था। इन सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है। पढ़िए पूरी खबर…
