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हाईकोर्ट जज का अनोखा आदेश- 40,000 पेड़ लगाओ और मानसून तक उसकी करो हिफाजत

दिल्ली हाईकोर्ट के जज ने 2जी घोटाले के आरोपियों सहित कई पार्टियों को 40 हजार पेड़ लगाने और उसकी हिफाजत करने का निर्देश दिया है।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (Image Source: pixabay)

दिल्ली हाईकोर्ट के जज ने 2जी घोटोले के आरोपी को अनोखा आदेश दिया है। जज ने आरोपी से 40 हजार पेड़ लगाने और मानसून तक उसकी हिफाजत करने को कहा है। दिल्ली हाईकोर्ट के जज नजमी वजीरी ने अनोखे आदेश के जरीए पर्वतीय क्षेत्रों में घटते वनक्षेत्र पर चिंता जताई है। उन्होंने 2जी घोटाले के आरोपी शाहीद बलवा सहित कई पार्टियों को 40 हजार पेड़ लगाने और मानसून तक उनकी सुरक्षा करने का आदेश दिया है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने दो व्यक्तियों और तीन कंपनियों को टू जी मामले में उन्हें आरोपमुक्त किए जाने के खिलाफ ईडी की याचिका पर जवाब देने के लिए वक्त मांगे जाने पर प्रत्येक को तीन-तीन हजार पौधे लगाने का बुधवार (6 फरवरी) को आदेश दिया। न्यायमूर्ति नजमी वजीरी ने स्वान टेलीकॉम प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर शाहिद बलवा, कुसेगांव फ्रूट्स एडं वेजीटेबल्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक राजीव अग्रवाल तथा कंपनियों- डायनमिक रिएलिटी, डीबी रिएलिटी लिमिटेड तथा निहार कन्स्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड को जवाब देने के लिए एक अंतिम अवसर प्रदान किया।

अदालत ने इन्हें दक्षिण दिल्ली क्षेत्र में पौधे लगाने के लिए संबंधित वन विभाग के अधिकारी से 15 फरवरी को मुलाकात करने का निर्देश दिया। गौरतलब है कि निचली अदालत ने धनशोधन मामले में पूर्व टेलीकॉम मंत्री ए राजा तथा द्रमुक सांसद कनिमोझी सहित दो व्यक्तियों तथा तीन कंपनियों को आरोपमुक्त कर दिया था। इस मामले की अगली सुनवाई 26 मार्च को होगी।

वहीं, इससे पहले बुधवार (6 फरवरी) को दिल्ली उच्च न्यायालय ने विदेश में रह रहे भारतीयों को निशुल्क कानूनी सहायता मुहैया कराने के संबंध में दायर जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा कि अन्य देशों के इस संबंध में अपने-अपने कानून होंगे और यहां की अदालत उनमें दखलअंदाजी नहीं कर सकती। एक एनजीओ ने याचिका दायर कर अदालत से अन्य मुल्कों में रहने वाले भारतीयों को निशुल्क कानूनी मदद उपलब्ध कराने के लिए केंद्र को नीति बनाने का निर्देश देने का अनुरोध किया था।

मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति वी के राव की पीठ ने कहा, ‘‘ इसे कैसे स्वीकार किया जा सकता है? उनके (अन्य देशों के) अपने कानून होंगे। हम जो भी कहेंगे वो वहां की अदालतों पर बाध्यकारी नहीं होगा।’’ पीठ ने एनजीओ से याचिका को वापस लेने को कहा। केंद्र की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सोलिसिटर जनरल (एएसजी) मनिंदर आचार्य ने अदालत को बताया कि एक नीति है जिसके तहत विदेश में रह रहे या काम कर रहे भारतीय नागरिकों को सरकार कुछ सहायता मुहैया कराती है। (भाषा इनपुट के साथ)

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