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सऊदी में हिंदू को किया दफनः दिल्ली HC ने MEA से कहा- अवशेष वापस लाने के लिए वैकल्पिक कानूनी रास्ते करे तलाश

अदालत ने विदेश मंत्रालय को कहा कि पीड़ित परिवार मृत व्यक्ति के अवशेष के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं कर सकता है। इसके लिए विदेश मंत्रालय को दूसरे उपाय तलाशने चाहिए।

Delhi HC, Corona, Covid-19, Delhi government, Modi government, Health care systemप्रतीकात्मक तस्वीर (फोटोः एजेंसी)

बीते दिनों सऊदी अरब में भारत के रहने वाले एक हिंदू व्यक्ति को ट्रांसलेशन की गलती की वजह से मुस्लिम समझ कर दफना दिया गया था। जिसके बाद पीड़ित परिवार ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा है कि परिवार मृत व्यक्ति का अवशेष लाने के लिए ज्यादा इंतजार नहीं कर सकता है। इसलिए विदेश मंत्रालय अवशेष लाने के लिए वैकल्पिक क़ानूनी रास्ते की तलाश करे।

हिमाचल के ऊना के रहनेवाले संजीव कुमार पिछले 23 वर्षों से सऊदी अरब में ट्रक ड्राइवर के तौर पर काम करते थे। बीते 24 जनवरी को हार्ट अटैक की वजह से उनका निधन सऊदी अरब में ही हो गया था। निधन के बाद उनके शव को सऊदी अरब के जिजान के बीश जनरल हॉस्पिटल में रखा गया था। संजीव कुमार का परिवार अंतिम संस्कार के लिए उनके शव को लाने की कोशिश कर रहा था। लेकिन इसी बीच सऊदी अरब के अस्पताल में उनके डेथ सर्टिफिकेट में हिंदू की जगह मुस्लिम लिख दिया गया। जिसकी वजह से सऊदी अरब प्रशासन ने उसके शव को दफना दिया।

मृत संजीव कुमार को दफ़नाने की सूचना जैसे ही परिवार के लोगों को मिली तो वे लोग सन्न रह गए। जिसके बाद परिवार के लोगों ने संजीव कुमार के शव को लाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। पिछले दिनों  इस मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस प्रतिभा एम सिंह की बेंच ने विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से इसकी रिपोर्ट मांगी थी। जिसके बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को इस मामले में सुनवाई करते हुए विदेश मंत्रालय को मृत व्यक्ति के अवशेष लाने के लिए वैकल्पिक उपाय ढूंढने को कहा।

जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने कहा कि सऊदी अरब के अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए रखने के साथ ही सऊदी अरब में भारतीय दूतावास को दूसरे तरीके भी खोजने चाहिए। जिससे मृत व्यक्ति के अवशेष को वापस लाने में मदद मिले। साथ ही अदालत ने विदेश मंत्रालय को कहा कि पीड़ित परिवार मृत व्यक्ति के अवशेष के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं कर सकता है। इसके लिए विदेश मंत्रालय को दूसरे उपाय तलाशने चाहिए। विदेश मंत्रालय को सऊदी अरब में अपने समकक्ष विभाग पर थोड़ा दवाब डालना चाहिए।

इससे पहले अदालत ने सऊदी दूतावास के उप मिशन प्रमुख से भी अनुरोध किया था कि वह कोई प्रक्रिया और समय सीमा बताए जिसके तहत मृत व्यक्ति के अवशेष को निकलवाकर भारत भेजने की प्रक्रिया पूरी की जा सके। अदालत ने इस मामले में सुनवाई के लिए अगली तारीख आठ अप्रैल तय की है।

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