दिल्ली जिमखाना क्लब को लुटियंस दिल्ली स्थित उसके 27.3 एकड़ परिसर से बेदखल करने के केंद्र सरकार के कदम के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में दो नए आवेदन दायर किए गए हैं। ये आवेदन जिमखाना सदस्य विजय खुराना और क्लब के कर्मचारी कल्याण संघ द्वारा पहले से लंबित मुकदमों में दायर किए गए हैं।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, ये आवेदन पहले से लंबित दो अलग-अलग मुकदमों में दाखिल की गई हैं। इसमें एक आवेदन क्लब के सदस्य विजय खुराना ने और दूसरा क्लब के स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन ने दायर की है। मामले की सुनवाई जस्टिस अवनीश झिंगन 6 जुलाई को करेंगे।
इस सप्ताह भूमि एवं विकास कार्यालय के एस्टेट अधिकारी ने केंद्र सरकार की बेदखली याचिका के बाद दिल्ली जिमखाना क्लब को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। दिल्ली हाई कोर्ट में पहले से लंबित दोनों मुकदमों में केंद्र सरकार के उस पुराने आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें क्लब को परिसर खाली करने का निर्देश दिया गया था।
मई में याचिकाओं की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने निर्देश के विरुद्ध कोई अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया था। यह तब हुआ जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को सूचित किया कि बेदखली की कोई भी कार्रवाई उचित नोटिस के बाद ही की जाएगी।
जिस भूमि पर क्लब का संचालन होता है। वह उसे साल 1928 में एक स्थायी पट्टे पर दी गई थी। पट्टा विलेख की धारा 4 में यह प्रावधान है कि यदि जनहित के लिए आवश्यकता हो तो लीजकर्ता यानी केंद्र सरकार उस परिसर पर पुनः कब्जा कर सकती है।
2022 में केंद्र ने पट्टे के नियमों के उल्लंघन और कुप्रबंधन के लिए क्लब के खिलाफ राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में कार्यवाही शुरू की थी। एनसीएलटी ने याचिका स्वीकार कर ली और क्लब के दैनिक कामकाज के संचालन के लिए केंद्र द्वारा मनोनीत 15 सदस्यों की नियुक्ति का आदेश दिया। बाद में एनसीएलएटी ने इस आदेश को बरकरार रखा।
दिल्ली जिमखाना क्लब को खाली करने का नोटिस
केंद्र सरकार ने दिल्ली के प्रतिष्ठित दिल्ली जिमखाना क्लब को बेदखली का नोटिस जारी किया है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार का कहना है कि 22 मई को लीज खत्म होने के बाद भी क्लब सफदरजंग रोड स्थित सरकारी संपत्ति पर बिना अधिकार के कब्जा किए हुए है। पढ़ें पूरी खबर।
