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शपथ ग्रहण के साथ शुरू होगी दिल्ली सरकार की चुनौती, बिजली और पानी पहली परीक्षा

बिजली-पानी की इन योजनाओं को इस बार फिर आम आदमी पार्टी ने अपने गारंटी कार्ड में भी शामिल किया है। सरकार के शपथ ग्रहण के साथ ही मौसम में गरमी का अहसास भी शुरू हो गया है, जिसमें बिजली और पानी की जरूरत को दिल्ली वालों के लिए पूरा करना ही सबसे मुश्किल काम होता है।

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल। (Photo: Twitter@AamAadmiParty)

दिल्ली की राजनीति का माहौल गर्म करने वाले बिजली-पानी के मुद्दे पर ही आम आदमी पार्टी सरकार की पहली परीक्षा होगी। चुनाव में आम आदमी पार्टी का सबसे बड़ा हथियार 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली की राहत और 20 हजार लीटर मुफ्त पानी की योजना रही है, जिस पर जमकर वोट बरसे हैं। बिजली-पानी की इन योजनाओं को इस बार फिर आम आदमी पार्टी ने अपने गारंटी कार्ड में भी शामिल किया है। सरकार के शपथ ग्रहण के साथ ही मौसम में गरमी का अहसास भी शुरू हो गया है, जिसमें बिजली और पानी की जरूरत को दिल्ली वालों के लिए पूरा करना ही सबसे मुश्किल काम होता है। ऐसे में इन दोनों योजना पर खरा उतारना ही दिल्ली सरकार की सबसे बड़ी चुनौती होगी।

दिल्ली वालों को हर साल गर्मियों में भीषण बिजली-पानी संकट का सामना करना पड़ता है। आज भी दिल्ली के बहुत सारे इलाकों में पानी की लाइनें नहीं है और टैंकर के माध्यम से जल बोर्ड पानी की आपूर्ति करता है। गर्मियों में दिल्ली को करीब 1000-1200 एमजीडी पानी की आवश्यकता होती है। इस बार अपने गारंटी कार्ड में आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के हर घर को नल से जल देने की घोषणा की है। योजना के तहत जनता को 24 घंटे शुद्ध पानी उपलब्ध कराना शामिल है।

इसके लिए पानी की उपलब्धता सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। सरकार ने हर घर को 20 हजार लीटर तक मुफ्त पानी उपलब्ध कराने की भी गारंटी दी है। इस योजना से एक मध्यम वर्गीय परिवार को करीब 1000 से 1250 रुपए प्रति माह की राहत हो रही है। वहीं, आम आदमी पार्टी का दूसरी बड़ी गारंटी बिजली है। गारंटी कार्ड के तहत आम आदमी पार्टी ने दिल्ली को 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने व 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली जारी रखने का वादा किया है। जनवरी में दिल्ली में 47 लाख लोगों ने इसका फायदा उठाया है।

बिजली मांग कम होने की वजह से सर्दी से ठीक पहले अधिकतम परिवारों को इस योजना का लाभ मिला है। इसके अलावा आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के इलाकों में बिजली के तारों के जाल को हटाकर उन्हें भूमिगत करने का भी लक्ष्य जोड़ा है। यह बड़ा ही चुनौती पूर्ण व खर्चीला है। बड़ी लाइनों को पहले भी भूमिगत करने के लिए योजना बनी थी। लेकिन खर्चीला होने की वजह से यह लागू नहीं हो पाई थी। इसे सीधे तौर पर आम जनता की सुरक्षा से भी जोड़कर देखा गया था। विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पानी को ही अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया था। आरोप था कि दिल्ली वालों को जल बोर्ड गंदा पानी पिला रहा है। इसका आधार केंद्र के ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (बीआइएस) की रिपोर्ट को बनाया गया था। इस संस्था ने देश के 21 शहरों में पानी के नमूने लिए थे। इन नमूनों की रैकिंग में दिल्ली 21वें पायदान पर मिला था।

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