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BJP नेताओं के हेट स्पीच पर हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान भिड़े LG और CM के वकील, तुषार मेहता बोले- रैली संबोधित करने नहीं आए

Hate Speech: उपराज्यपाल की तरफ से पेश हुए एसजी तुषार मेहता का कहना था कि वे दिल्ली पुलिस के लिए पेश हुए हैं, इस पर सरकार के वकील ने आपत्ति जताई थी

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Published on: February 28, 2020 1:26 PM
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (बाएं) और दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा। (फोटो- एजेंसी)

दिल्ली हाईकोर्ट में भाजपा नेताओं कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर और परवेश वर्मा के खिलाफ लगे हेट स्पीच के आरोपों की सुनवाई के दौरान उपराज्यपाल अनिल बैजल के वकील और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के वकील में कहासुनी हो गई। दरअसल, मंगलवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान जब जजों ने जब पूछा कि कोर्ट में दिल्ली पुलिस की तरफ से कौन पेश होगा, तो सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि दिल्ली के एलजी ने उन्हें दो मामलों- भाजपा नेताओं के हेट स्पीच और दिल्ली दंगे से जुड़े एक केस में पुलिस का वकील बनाकर भेजा है। इसी दौरान केजरीवाल सरकार के वकील राहुल मेहरा ने बेंच को बताया कि एलजी दिल्ली सरकार की सलाह के बिना ऐसा कुछ नहीं कर सकते।

सॉलिसिटर जनरल ने वकील की नियुक्ति के मसले को छोटा मुद्दा बताते हुए कहा- “यहां किसी तरह का विवाद शुरू करने की जरूरत नहीं। मैं यहां कोई रैली करने नहीं कर रहा। मैं यहां दोनों जजों से बात कर रहा हूं।”

हालांकि, इस पर राहुल मेहरा भड़क गए। उन्होंने कोर्ट के सामने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के 3 जजमेंट पेश किए। अगस्त 2016 के हाईकोर्ट के ऑर्डर का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि उपराज्यपाल सरकार और मंत्री परिषद की सलाह लिए बिना अपनी तरफ से कोई स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त नहीं कर सकता। मेहरा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने बाद में इस आदेश पर मुहर लगाई थी।

मेहरा के इस दावे के बाद एसजी मेहता ने कोर्ट में केंद्र सरकार को पार्टी बनाने के लिए आवेदन दिया। कोर्ट ने इसी गुरुवार को उनकी याचिका स्वीकार कर ली।

हेट स्पीच देने वाले नेताओं पर एफआईआर में भी दोनों वकीलों में तकरारः दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने ‘द प्रिंट’ को बताया कि उन्हें इस पर कोई आपत्ति नहीं थी कि दिल्ली पुलिस भाजपा नेताओं के खिलाफ एफआईआर दायर कर ले। यह एफआईआर उनके खिलाफ सबूत न मिलने की स्थिति में रद्द भी हो सकती थी। हालांकि, एसजी तुषार मेहता ने भाजपा नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने का विरोध किया। दोनों वकीलों की बात सुनने के बाद कोर्ट ने सुनवाई 13 अप्रैल को तय की है।
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