दिल्ली सरकार के 34 स्कूलों को ध्वस्त किया जाएगा। दिल्ली सरकार के 34 स्कूलों को संरचनात्मक और बुनियादी ढांचे के आकलन के बाद ध्वस्त करने के लिए चिन्हित किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि यह कवायद दिल्ली सरकार द्वारा अपने सरकारी स्कूल के बुनियादी ढांचे का डिजिटल और फिजिकल मूल्यांकन करने के प्रयास का हिस्सा है।
शिक्षा निदेशालय (DOE) अब प्रत्येक स्थल पर जरूरी विध्वंस और पुनर्निर्माण की सीमा तय करने से पहले सर्वे के निष्कर्षों का अंतिम मूल्यांकन कर रहा है। इस मूल्यांकन में न केवल संरचनात्मक सुरक्षा बल्कि स्कूलों के बुनियादी ढांचे और निर्माण संबंधी आवश्यकताओं पर भी विचार किया जा रहा है। इसमें यह भी शामिल है कि किन हिस्सों को ध्वस्त करने, मरम्मत करने या रेनोवेट करने की जरूरत है। अधिकारियों ने बताया कि ड्रोन आधारित सर्वे सहित जमीनी आकलन पूरा हो चुका है और डीओई की टीमें वर्तमान में जांच कर रही हैं।
34 स्कूलों में से 9 को गिराए जाने को मंजूरी
अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली में चिन्हित 34 स्कूलों में से 9 के विध्वंस प्रस्तावों को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। 16 अन्य मामलों में काम जारी है जबकि शेष प्रस्ताव मूल्यांकन और प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में हैं। उन्होंने आगे बताया कि शिक्षा विभाग ने 1090 स्कूलों की डिजिटल प्रोफाइलिंग पूरी कर ली है जिसमें भवनों और सुविधाओं की स्थिति का दस्तावेजीकरण करके बुनियादी ढांचे की कमियों की पहचान की गई है और कामों को प्राथमिकता दी गई है।
स्कूलों का ड्रोन सर्वे पूरा
प्रोफाइलिंग में जमीनी स्तर के निरीक्षण के साथ-साथ ड्रोन सर्वे, हाई-रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग और स्कूल परिसर का 360-डिग्री दस्तावेजीकरण शामिल था। अधिकारियों ने बताया कि ड्रोन सर्वे अब पूरा हो चुका है और कामों की अंतिम सूची तैयार करने से पहले शिक्षा विभाग की टीमें डेटा का मूल्यांकन कर रही हैं। मूल्यांकन में संरचनात्मक स्थिति और जर्जर भवनों से लेकर बिजली, जल आपूर्ति, स्वच्छता और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचे तक के मुद्दों को शामिल किया गया है। एक अधिकारी ने बताया कि इसका उपयोग यह निर्धारित करने के लिए किया जा रहा है कि व्यक्तिगत भवनों या ब्लॉकों को बनाए रखा जाना चाहिए, उनकी मरम्मत की जानी चाहिए, उनका रेनोवेशन किया जाना चाहिए या उन्हें ध्वस्त किया जाना चाहिए।
शिक्षा विभाग की खाली पड़ी जमीनों पर 27 स्कूलों के निर्माण का प्रस्ताव
एक अधिकारी ने कहा, “कुछ स्कूलों में जलभराव की समस्या पाई गई है या वे ऐसी जगहों पर स्थित हैं जो स्कूल परिसर के रूप में निरंतर उपयोग के लिए अनुपयुक्त हैं।” इससे पहले, संरचनात्मक ऑडिट में पुरानी और जर्जर इमारतों की पहचान की गई थी जिनमें से कुछ में दरारें और अन्य सुरक्षा संबंधी समस्याएं पाई गई थीं। दिल्ली शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वे साथ ही साथ स्कूल के बुनियादी ढांचे में सुधार पर भी काम कर रहे हैं। विभाग ने शिक्षा विभाग के अंतर्गत खाली पड़ी जमीनों पर लगभग 900 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 27 स्थायी स्कूल भवनों के निर्माण का प्रस्ताव रखा है। अधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित भवन ग्राउंड+4 यानी भूकंपरोधी संरचना के रूप में बनाए जाएंगे।
काम में तेजी के लिए 27 स्थलों को पांच भौगोलिक समूहों में विभाजित किया गया है। परियोजनाओं के लगभग 18 महीनों में पूरा होने की उम्मीद है। अधिकारियों ने बताया कि शिक्षा विभाग ने इन स्कूलों के संपूर्ण निर्माण के लिए एक परियोजना प्रबंधन सलाहकार-सह-इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण एजेंसी नियुक्त करने हेतु केंद्र सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से बोलियां आमंत्रित की हैं। उन्होंने आगे कहा कि पुनर्निर्माण कार्य का उद्देश्य कक्षाओं की क्षमता बढ़ाना और भीड़भाड़ कम करना भी है। जिन स्कूलों को गिराया जा रहा है, वहां के छात्रों को अन्य ब्लॉकों या आस-पास के स्कूलों में स्थानांतरित किया जाएगा।
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दिल्ली के उपराज्यपाल ने फायर ब्रिगेड कर्मियों और जेल की नौकरियों में पूर्व अग्निवीरों के लिए 20% आरक्षण को मंजूरी दी है। एलजी तरनजीत सिंह संधू ने दिल्ली अग्निशमन सेवा में फायर ऑपरेटर के पद पर और जेल विभाग में वार्डर और मैट्रन के पदों पर सीधी भर्ती में पूर्व अग्निवीरों के लिए 20% क्षैतिज आरक्षण को मंजूरी दे दी है। खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें
