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2012 दिल्ली गैंगरेपः केंद्र, दिल्ली सरकार ने HC के आदेश को दी चुनौती, याचिका दायर

हाईकोर्ट के फैसले के कुछ घंटे बाद केंद्र और दिल्ली सरकार ने इसे चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल कर दी।

delhi high courtफोटो: ANI

केंद्र और दिल्ली सरकार ने दिल्ली गैंगरेप (2012) के चार दोषियों की फांसी पर रोक लगाने के निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज करने को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रूख किया। हाईकोर्ट के फैसले के कुछ घंटे बाद केंद्र और दिल्ली सरकार ने इसे चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल कर दी।

इससे पहले दोषियों को फांसी की सजा टालने के मामले में बुधवार (5 फरवरी, 2020) को दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कहा कि चारों दोषियों को एक साथ ही फांसी दी जा सकती है, ना कि अलग-अलग। न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत ने कहा कि चारों दोषी एक हफ्ते के भीतर अपने सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल कर लें। एक हफ्ते बाद उनका डेथ वारंट तामील करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। हाईकोर्ट ने अगले आदेशों तक दोषियों की फांसी पर रोक लगाने के निचली अदालत के आदेश को खारिज करने से इनकार कर दिया था। निचली अदालत ने दोषियों की फांसी पर रोक लगा दी थी।

बता दें कि केंद्र और दिल्ली सरकार ने निचली अदालत के 31 जनवरी के आदेश को चुनौती दी थी। इसमें निचली अदालत ने अगले आदेश तक मामले के सभी चारों दोषियों– मुकेश कुमार (32), पवन गुप्ता (25), विनय कुमार शर्मा (26) और अक्षय कुमार (31) को फांसी देने पर रोक लगा दी थी। सभी दोषी तिहाड़ जेल में बंद हैं।

हाईकोर्ट के मुताबिक मई 2017 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोषियों की अपीलों को खारिज किए जाने के बाद किसी ने भी उनके खिलाफ मौत का वारंट जारी करने के लिए कदम नहीं उठाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि इसमें कोई विवाद नहीं हो सकता है कि दोषियों ने देरी करने की रणनीतियों का इस्तेमाल कर प्रक्रिया को विफल किया है।

इसी बीच कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि निर्भया मामले के दोषियों को जल्द से जल्द फांसी होनी चाहिए। महाराष्ट्र में दो महिलाओं को जिंदा जलाने से जुड़ी घटनाओं और निर्भया मामले को कुछ सदस्यों द्वारा लोकसभा में शून्यकाल के दौरान उठाए जाने के बाद प्रसाद ने यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि निर्भया मामले के दोषी कानूनी उपायों का दुरुपयोग करके फांसी को टाल रहे हैं। लेकिन दोषियों को जल्द से जल्द से फांसी होनी चाहिए।

एआईएमआईएम के इम्तियाज जलील ने वर्धा एवं औरंगाबाद में महिलाओं को जलाने का विषय उठाया। इसके बाद निर्दलीय नवनीत कौर राणा और विपक्ष की कुछ अन्य महिला सदस्यों ने इसके साथ निर्भया के दोषियों को फांसी होने में देरी का मुद्दा उठाया। प्रसाद ने कहा कि महाराष्ट्र के वर्धा और औरंगाबाद की घटनाओं पर कहा कि इस मामले पर महाराष्ट्र सरकार को कदम उठाना चाहिए और केंद्र सरकार इस बारे में राज्य सरकार से कहेगी। (एजेंसी इनपुट)

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