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भाजपा के लिए 24 घंटे में दूसरा झटका! अकाली दल के बाद भाजपा के एक और सहयोगी दल ने दिल्ली चुनाव से बनाई दूरी, यह है वजह

जेजेपी से पहले अकाली दल ने भी विधानसभा चुनाव से दूरी बनाने का ऐलान किया है। पार्टी ने सोमवार (20 जनवरी, 2020) को कहा कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पर सहयोगी भाजपा द्वारा उसका रुख बदलने के लिए कहे जाने की वजह से वह अगले महीने होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव में नहीं उतरेगी।

हरियाणा के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला। (ANI)

दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा को पिछले 24 घंटे में दूसरा झटका लगा है। राष्ट्रीय राजधानी में भाजपा की अहम सहयोगी शिरोमणि अकाली दल के बाद मंगलवार (21 जनवरी, 2020) को हरियाणा के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की पार्टी जेजेपी ने भी चुनाव से दूरी बना ली। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) प्रमुख ने कहा कि पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनाव में हिस्सा नहीं लेगी। चुनाव ना लड़ने की एक वजह यह भी है कि जिन सीटों पर जेजेपी ने अपनी दावेदारी जताई थी उन सभी सीटों पर भाजपा अपने उम्मीदवार घोषित कर चुकी है।

जेजेपी से पहले अकाली दल ने भी विधानसभा चुनाव से दूरी बनाने का ऐलान किया है। पार्टी ने सोमवार (20 जनवरी, 2020) को कहा कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पर सहयोगी भाजपा द्वारा उसका रुख बदलने के लिए कहे जाने की वजह से वह अगले महीने होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव में नहीं उतरेगी। पार्टी ने चुनाव के लिए नामांकन की आखिरी तारीख से एक दिन ये फैसला लिया। बता दें कि दिल्ली में कालकाजी, तिलक नगर, हरि नगर और राजौरी गार्डन जैसी कई सिख बहुल सीटें हैं जहां अकाली दल का प्रभाव है।

अकाली दल नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि भाजपा के साथ चुनाव से संबंधित तीन बैठकों में उनकी पार्टी ने सीएए पर उसके रुख पर विचार करने को कहा। सिरसा ने कहा, ‘भाजपा के साथ हमारी बैठक में हमसे सीएए रुख पर फिर से विचार करने को कहा गया लेकिन हमने ऐसा करने से मना कर दिया। शिरोमणि अकाली दल की पुरजोर राय है कि मुसलमानों को सीएए से अलग नहीं रखा जा सकता।’

अकाली नेता सिरसा ने राजौरी गार्डन विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर 2017 का उपचुनाव लड़ा था और वह जीते थे। उन्होंने कहा, ‘हम राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के भी पुरजोर खिलाफ हैं।’ इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि चुनाव नहीं लड़ने का रुख अकाली दल का है।

तिवारी ने कहा, ‘अकाली दल हमारे सबसे पुराने सहयोगी दलों में से है। उसने नागरिकता कानून पर संसद में हमें समर्थन दिया है। अगर वे चुनाव नहीं लड़ना चाहते तो यह उनका रुख है।’ सिरसा ने इस अटकल को खारिज कर दिया कि उनकी पार्टी ने यह फैसला इसलिए लिया है क्योंकि भाजपा ने उनके सीट बंटवारे के फॉर्मूले को स्वीकार नहीं किया। (भाषा इनपुट)

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