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Delhi Elections 2020: दिल्ली की 12 आरक्षित सीटों पर सभी दलों की नजर, इन सीटों को जीतने वाली पार्टी हुई है सत्ता पर काबिज

Delhi Elections 2020: इन 12 सीटों पर भाजपा की स्थिति कमजोर रही है। भाजपा ने इसीलिए कांग्रेस के राजकुमार चौहान को पार्टी में शामिल कराया था मगर वो दोबारा कांग्रेस में लौट गए।

बीजेपी और आप (फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस)

Delhi Elections 2020: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में नई सरकार के चयन के लिए आगामी आठ फरवरी को एक चरण में मतदान होने हैं और नतीजे 11 फरवरी को आएंगे। वर्तमान में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (APP) सत्ता में हैं। राजधानी में कांग्रेस, भाजपा और आप के बीच कड़ा मुकाबला है, तीनों ही पार्टियां सत्ता में आने का दावा कर रही हैं। हालांकि दिल्ली की 70 सीटों में से 12 ऐसी आरक्षित सीटें हैं जो किसी भी पार्टी के सत्ता में आने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं। मौजूदा समय में प्रदेश की सत्ता पर काबिज आप का इन सीटों पर कब्जा है।

साल 2013 में इन सीटों पर कांग्रेस का कब्जा था। तब दिवंगत कांग्रेस नेता शीला दीक्षित के हाथों में दिल्ली की कमान थी। अब तीनों राजनीतिक दल इन आरक्षित सीटों को जीतने में जुटे हैं। विभिन्न रिपोर्ट्स के मुताबिक इन सीटों के क्षेत्र में ज्यादातर झुग्गी झोपड़ियां और कच्ची कॉलोनियां हैं। ऐसे में जिन राजनीतिक दलों का इन क्षेत्रों का असर दिखता है, उसका प्रभाव दूसरी सीटों पर नजर आता है। पिछले चुनावों को देखा जाए तो इन 12 सीटों में से अधिकतर सीट एक ही राजनीतिक दल के पास रही हैं। वो ही पार्टी दिल्ली की सत्ता के केंद्र में रही। हिंदी दैनिक अखबार हिंदुस्तान के मुताबिक इन 12 सीटों पर भाजपा सबसे कमजोर मानी जाती रही है।

ये सीटें हैं मादीपुर, गोकलपुर, सीमापुरी, पटेल नगर, करोल बाग, कोंडली, त्रिलोकपुरी, आंबेडकर नगर, देवली, बवाना, सुल्तानपुर माजरा और मंगोलपुरी। आंकड़ों की बात करें तो साल 1998 से लेक 2013 तक कांग्रेस इन 12 में से अधिकतर सीटों पर काबिज रही। और तीनों बार कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार दिल्ली की सत्ता पर काबिज रही। साल 2013 के विधानसभा चुनाव में अधिकतर सीटें आप के खाते में आईं और 2015 के विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व आप ने सभी सीटें जीत लीं। खास बात है कि दोनों ही बार आप दिल्ली की सत्ता में रही।

राजनीतिक एक्सपर्ट्स के मुताबिक इन 12 सीटों पर भाजपा की स्थिति कमजोर रही है। भाजपा ने इसीलिए कांग्रेस के राजकुमार चौहान को पार्टी में शामिल कराया था मगर वो दोबारा कांग्रेस में लौट गए। उल्लेखनीय है कि इन आरक्षित सीटों पर बुनियादी सुविधाएं सबसे बड़ा मुद्दा हैं। इनमें कच्ची कॉलोनियां और जेजे कॉलोनियां आती हैं।

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