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Delhi Elections 2019: ‘2020 के शांत केजरीवाल 2015 से ज्यादा खतरनाक, मोदी-शाह के लिए सबसे बड़ी चुनौती’ आप के पूर्व नेता रहे वरिष्ठ पत्रकार का दावा

Delhi Elections 2019: वरिष्ठ पत्रकार का कहना है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री और केजरीवाल 2015 के अरविंद केजरीवाल की तुलना में 2020 में शांत हैं लेकिन वह पहले से ज्यादा खतरनाक हैं।

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल। फोटो: PTI

Delhi Elections 2019: दिल्ली में 8 फरवरी को विधानसभा की 70 सीटों के लिए वोटिंग की जाएगी। पिछले चुनाव में सभी दलों को धूल चटाने वाली आप इस चुनाव में भी बड़ी जीत का दावा कर रही है। वरिष्ठ पत्रकार और आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व नेता आशुतोष का कहना है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल 2015 की तुलना में 2020 में शांत हैं लेकिन वह पहले से ज्यादा खतरनाक हैं। उन्होंने कहा है कि अरविंद केजरीवाल नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर नकेल कसने के लिए पहले से ज्यादा परिपक्व हो चुके हैं।

एनडीटीवी में छपे आशुतोष के एक लेख में कहा गया है कि केजरीवाल पांच साल पहले एक ब्रांड के रूप में उभरे थे लेकिन अब ऐसा नहीं है। उन्हें एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर देखा गया जो राजनीति में राजनीति करने नहीं बल्कि इसमें बदलाव लाने के लिए शामिल हुए थे। हालांकि उनपर लोग अब भी भरोसा करते हैं लेकिन सिर्फ राजनेता के तौर पर।

अगर किसी को लगता है कि केजरीवाल के करिश्मे ने मतदाताओं के साथ अपने जुड़ाव को खो दिया है तो वह बड़ी भूल कर रहे हैं। दिल्ली में वह अभी भी नंबर वन हैं। हालांकि यह भी सच है कि बीते दो साल में आप ने जहां भी चुनाव लड़ा वह बुरी तरह विफल रही और उसे एक फीसदी वोट भी हासिल नहीं हुए। दिल्ली में बीजेपी के पास कोई चेहरा नहीं है। केजरीवाल अपर लोअर मिडिल क्लास और गरीबों के बीच काफी पॉपुलर हैं।

लेख में कहा गया है कि कांग्रेस दिल्ली में कहीं नजर नहीं आती। हालांकि लोकसभा चुनाव 2019 में कांग्रेस बीजेपी के बाद वोट शेयर के मामले में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी थी। केजरीवाल सरकार ने जनता को मुफ्त सेवाएं दी हैं। इनमें मुफ्त बिजली और आधे दाम पर पानी उपलब्ध करवाना है। वहीं हेल्थ और एजुकेशन सेक्टर में भी दिल्ली सरकार ने अच्छा काम किया है जिसकी तारीफ आलोचकों ने भी की है। केजरीवाल ने 2015 में जीत के बाद मोदी सरकार का जमकर घेराव किया और हर मुद्दे पर उन्हें घेरने की कोशिश की।

मोदी और उनकी टीम द्वारा तैयार किए गए जाल में केजरीवाल लगातार फंसते गए हालांकि पंजाब चुनाव में हार के बाद उन्होंने अपनी गलतियों में सुधार किया और अपनी रणनीति में बदलाव किया। यह केजरीवाल के लिए एक बहुत बड़ी सीख थी। उन्होंने अपनी गलतियों का एहसास किया और खुद को फिर से संगठित किया। 2020 के मौन केजरीवाल 2015 के आक्रमक टाइगर से ज्यादा खतरनाक हैं। मोदी और शाह की जोड़ी को देखना होगा। दिल्ली में चुनाव में हार और जीत का फैसला देशभर में एक संकेत जरूर देगा।

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