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लोकसभा चुनाव के बाद हर राज्य हारी है बीजेपी, दिल्ली में तब 65 सीटों पर था बहुमत

Delhi Election/Chunav Results 2020: लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा को दिल्ली में 70 में से 65 सीटों पर बहुमत मिला था। भाजपा को उम्मीद थी कि केंद्र द्वारा दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने का उसे लाभ होगा, जिससे 40-50 लाख लोग प्रभावित हो सकते हैं, और दिल्ली चुनाव जिताने में ये लोग काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि पार्टी को इससे उम्मीद के मुताबिक लाभ नहीं मिला।

amit shahपूर्व भाजपा अध्यक्ष और गृहमंत्री अमित शाह।

Delhi Election/Chunav Results 2020: करीब नौ महीने पहले राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सातों सीटों पर लोकसभा चुनाव जीतने वाली भाजपा को विधानसभा चुनाव में करारा झटका लगा और पार्टी 70 में से महज 8 सीटों पर जीत दर्ज कर सकी। लोकसभा चुनाव बाद महाराष्ट्र में शिवसेना संग गठबंधन में बहुमत का आंकड़ा पार करने वाली भाजपा (चुनाव में सीटें भी कम हुईं।) सरकार नहीं बना पाई। हरियाणा में भी पार्टी अपने दम पर सरकार बनाने लायक सीट नहीं ला पाई और जेजेपी से गठबंधन करना पड़ा। झारखंड में भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा, जहां कांग्रेस-झामुमो गठबंधन सरकार में है। लोकसभा चुनाव बाद भाजपा राज्य के चुनावों में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी है।

खास बात है कि लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा को दिल्ली में 70 में से 65 सीटों पर बहुमत मिला था। भाजपा को उम्मीद थी कि केंद्र द्वारा दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने का उसे लाभ होगा, जिससे 40-50 लाख लोग प्रभावित हो सकते हैं, और दिल्ली चुनाव जिताने में ये लोग काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि पार्टी को इससे उम्मीद के मुताबिक लाभ नहीं मिला।

भाजपा से जुड़े सूत्रों ने कहा कि दिल्ली का फैसला लोकसभा के नतीजों के बाद से मतदाताओं के संदेश के लिए एक और पुष्टि है। लोकसभा और विधानसभा चुनावों में उनकी पसंद अलग है। लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने ओडिशा में कुल 21 सीटों में से 8 सीटों पर जीत दर्ज की थी और 38.4 फीसदी वोट भी हासिल किए। विधानसभा चुनाव में पार्टी का वोट शेयर घटकर 32.5 फीसदी पर आ गया। चुनाव में भाजपा प्रदेश की 147 सीटों में से 23 सीट जीत सकी थी। झारखंड में भी भाजपा की ऐसी हालत रही। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने प्रदेश की 14 सीटों में से 11 पर जीत दर्ज की थी, वहीं विधानसभा में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। प्रदेश में लोकसभा चुनाव के छह महीने बाद विधानसभा चुनाव हुए।

बता दें कि दिल्ली में 22 साल का सूखा खत्म करने के लिए भाजपा ने विधानसभा चुनाव में पूरी ताकत लगा दी थी। राष्ट्रीय राजधानी में पार्टी ने एक महीने के भीतर 6,577 मीटिंग कीं। इसमें गृहमंत्री अमित शाह के 52 रोड शो और पब्लिक मीटिंग शामिल हैं। अपने करीब तीस भाषणों में उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में शाहीन बाग प्रदर्शनकारियों का जिक्र किया। उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि वो ईवीएम का बटन इतनी जोर से दबाएं कि करंट शाहीन बाग तक पहुंचे। चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा के अन्य नेताओं ने आपत्तिजनक बयान तक दिए। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने एक रैली को संबोधित करते हुए जनता से कहा, ‘देश के गद्दारों को…?’ इसपर जवाब आया- गोली मारो सा.. को। चुनाव प्रचार के दौरान यूपी के सीएम योगी आदित्य नाथ ने कहा कि आप प्रमुख केजरीवाल शाहीन बाग में बिरयानी परोस रहे थे। मगर राष्ट्रीय मुद्दों पर चुनाव लड़ रही भाजपा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करने में नाकाम रही।

दिल्ली चुनाव में भाजपा की हार अन्य राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव को भी प्रभावित कर सकती है। दिल्ली चुनाव परिणाम बिहार में सीट बंटवारे में सहयोगी जेडीयू को अधिक बल दे सकता है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में भी भाजपा को अपनी रणनीति पर फिर से विचार करना पड़ सकता है।

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