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‘लगे रहो केजरीवाल’ को मिली अपार सफलता के बाद प्रशांत किशोर का धन्यवाद

भाजपा, महागठबंधन, ममता बनर्जी (तृणमूल कांग्रेस), कैप्टन अमरिंदर सिंह (कांग्रेस), जगनमोहन रेड्डी (आंध्र प्रदेश) के बाद अरविंद केजरीवाल की अगुआई वाली आम आदमी पार्टी के प्रचंड बहुमत में भी प्रशांत किशोर का नाम जुड़ गया है।

Author Updated: February 12, 2020 2:08 AM
प्रशांत किशोर ने ही चुनाव प्रचार के लिए सूत्र वाक्य ‘लगे रहो केजरीवाल’ की शुरुआत की थी। किशोर ने भाजपा, कांग्रेस और बिहार में महागठबंधन के लिए भी 2015 में चुनाव प्रबंधन किया था।

भारत की आत्मा की रक्षा के लिए खड़े होने के लिए दिल्ली का धन्यवाद!’ प्रशांत किशोर की रणनीति की दाद तो मतदान बाद सर्वे से ही मिलने लगी थी। शनिवार को चुनावी नतीजे में आम आदमी पार्टी को बढ़त मिलने के साथ उन्होंने यह ट्वीट किया। मालूम हो कि प्रशांत किशोर की कंपनी आई-पैक ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के लिए चुनाव संचालन का काम किया है। प्रशांत किशोर ने ही चुनाव प्रचार के लिए सूत्र वाक्य ‘लगे रहो केजरीवाल’ की शुरुआत की थी। किशोर ने भाजपा, कांग्रेस और बिहार में महागठबंधन के लिए भी 2015 में चुनाव प्रबंधन किया था।

भाजपा, महागठबंधन, ममता बनर्जी (तृणमूल कांग्रेस), कैप्टन अमरिंदर सिंह (कांग्रेस), जगनमोहन रेड्डी (आंध्र प्रदेश) के बाद अरविंद केजरीवाल की अगुआई वाली आम आदमी पार्टी के प्रचंड बहुमत में भी प्रशांत किशोर का नाम जुड़ गया है। सवाल उठता है कि जब आम आदमी पार्टी मजबूत थी तो उसे प्रशांत किशोर की क्या जरूरत थी? चुनावी विश्लेषक कहते हैं कि आज का समय छवि बोध का समय है। यह हायपर कनेक्टिविटी का भी समय है। एक बार जो बात जंगल की आग की तरह फैल गई, उसका रुख मोड़ना मुश्किल हो जाता है। चुनाव में हार का डर सबसे मजबूत पार्टी को भी लगता है। छवि बोध का बाजार भी चुनावी कंपनियों का ही खड़ा किया गया है और अब प्रशांत किशोर इसके मास्टर हैं।

2014 में प्रचंड बहुमत के बाद भाजपा गठबंधन को पहली बार बड़ी हार बिहार में मिली थी। लोकसभा चुनाव 2014 में भारतीय जनता पार्टी ने प्रशांत किशोर की कंपनी की सेवा ली थी और ‘चाय पर चर्चा’ उन्हीं की रणनीति का हिस्सा था। लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव में वे महागठबंधन की ओर रहे और जद (एकी) व राजद के नेताओं को धु्रवीकरण से बचने की सलाह दी। जबकि भाजपा के नेता पूरी तरह धु्रवीकरण में जुटे थे। महागठबंधन चुनाव प्रचार में खास पहचान के चेहरों से दूर ही रहा।

दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी प्रशांत किशोर ने आम आदमी पार्टी को सकारात्मक प्रचार से जोड़े रखा। यह किशोर की ही रणनीति थी कि अरविंद केजरीवाल ने शाहीन बाग पर चुप्पी साधे रखी और उस मुद्दे का रुख गृह मंत्रालय की ओर कर दिया कि पुलिस आपकी है, रास्ता खुलवा दीजिए। भाजपा नेता ने जब केजरीवाल को आतंकवादी कहा तो आम आदमी पार्टी की ओर से कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं हुई। किशोर की कंपनी से जुड़ने के बाद आम आदमी पार्टी ने नरेंद्र मोदी और भाजपा के अन्य नेताओं पर निजी हमले भी बंद कर दिए।

दिल्ली चुनाव प्रचार के बीच ही प्रशांत किशोर को उनकी पार्टी जद(एकी) ने पार्टी विरोधी बयानों के कारण पार्टी से निकाल दिया था। दिल्ली विधानसभा चुनाव में जद (एकी) ने भी राजग के गठबंधन में दो उम्मीदवार खड़े किए थे और किशोर का पार्टी से ताजा अलगाव हुआ है तो नतीजों पर सवाल नीतीश कुमार से भी पूछा गया। बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में जनता ही मालिक होती है। जद (एकी) नेता सह बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि हार की समीक्षा की जाएगी और हम इसके कारण जानेंगे।

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