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Delhi Election 2020: बीजेपी के दर्जनभर सांसद-मंत्रियों ने शाहीन बाग पर संभाल रखा है मोर्चा, आप ने भी बदल दिया कैम्पेन का नारा

आप के अभियान के नारों में भी बदलाव किया गया है। पिछले हफ्ते तक नारा लग रहा था, 'लगे रहो केजरीवाल'। अब यह बदलकर हो गया है, 'दिल्ली में तो केजरीवाल'।

Author Edited By रवि रंजन नई दिल्ली | January 30, 2020 8:14 AM
दिल्ली चुनाव को लेकर बुधवार को बीके दत्त कॉलोनी में चुनाव प्रचार करते अमित शाह

अभिनव राजपूत, मल्लिका जोशी

Delhi Election 2020: नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में दिल्ली के शाहीन बाग में चल रहा धरना-प्रदर्शन दिल्ली विधानसभा चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। भाजपा इस मुद्दे को भुनाने का हर संभव प्रयास कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को तीन चुनावी रैलियां की और तीनों जगह उन्होंने शाहीन बाग का जिक्र किया। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की आलोचना की और वोटरों से अपील किया कि आठ फरवरी को मतदान के वक्त वे कमल के बटन को दबाएं ताकि शाहीन बाग को झटका लगे।

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की जनसभा और प्रकाश जावेडकर के प्रेस कांफ्रेस में भी शाहीन बाग की गूंज सुनाई दी। बीजेपी के दर्जन भर सांसदों और मंत्रियों ने शाहीन बाग पर मोर्चा संभाल रखा है। वक्त की नजाकत को देखते हुए आम आदमी पार्टी ने भी अपने चुनावी कैंपेन का नारा बदल दिया है। पार्टी दो दिनों से लगातार शाहीन बाग के मुद्दे को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं। आप नेता बिजली, पानी, स्वास्थ्य जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठा रहे हैं। अंदरुनी सूत्रों का कहना है कि दोनों की रणनीतियां वार रुम में तैयार की गई है।

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार पार्टी चुनाव में अनाधिकृत कॉलोनियों में वैध करने और आप सरकार द्वारा आयुष्मान भारत योजना को नहीं लागू करने के मुद्दे को जोर-शोर से उठाना चाहती थी। लेकिन 21 जनवरी को दीन दयाल उपाध्याय मार्ग स्थित पार्टी मुख्यालय में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। तब से अभियान का नारा बदल गया। शाहीन बाग के मुद्दे को उठाया जाने लगा और भाजपा नेताओं द्वारा दावा किया जाने लगा कि आप के नेता प्रदर्शनकारियों की सहायता कर रहे हैं।

उदाहरण के तौर पर 22 जनवरी को राज्यसभा सांसद विजय गोयल ने अपने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि शाहीन बाग दिल्ली की सुरक्षा के लिए खतरा हो गया है। इसके अगले दिन संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी 500 रुपये के लिए ‘पूरे देश को बदनाम’ कर रहे हैं। साथ ही भाजपा नेताओं ने ‘आजादी’ के नारे को लेकर भी आलोचना की।

27 जनवरी को केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने एक प्रेस कांफ्रेस किया और कहा कि केजरीवाल और उनके डिप्टी मनीष सिसोदिया शाहीन बाग के लोगों के साथ खड़े थे, लेकिन विरोध से प्रभावित लोगों की आवाज नहीं सुन रहे हैं। मंगलवार को पश्चिमी दिल्ली के सांसद परवेश साहिब सिंह ने कहा कि अगर शाहीन बाग में सीएए और एनआरसी विरोध-प्रदर्शन को जारी रखने की अनुमति दी गई, तो दिल्ली को “कश्मीर जैसी स्थिति” का सामना करना पड़ेगा, जिसमें प्रदर्शनकारी “घरों में घुसेंगे और बेटियों व बहनों से रेप करेंगे”। बुधवार की चुनावी रैली में ईरानी ने कहा कि प्रदर्शन की वजह से दिल्ली में ट्रैफिक जाम की समस्या उतपन्न हो गई है।

आप नेता ने माना कि ‘शाहीन बाग की वजह से’ उनकी पार्टी ‘कम्फर्ट जोन’ से बाहर आ चुकी है और वे बातचीत को दूसरे ट्रैक पर रखना चाहते हैं। पार्टी ने लोकसभा और राज्यसभा में इस बिल का विरोध किया था लेकिन किसी भी वरिष्ठ नेता ने शाहीन बाग जाने की जहमत नहीं उठाई। सिर्फ ओखला के विधायक अमानतुल्लाह खान प्रदर्शनकारियों से मिलने पहुंचे। शाहीन बाग इलाका उनके विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है।

आप के एक वरिष्ठ नेता ने बताया, “हां, इससे हमें थोड़ी चिंता हुई है। शाहीन बाग चुनाव में एक मुद्दा बन रहा है, जिसे हम आराम से जीत रहे हैं। यदि ड्राइंग रूम और डिनर टेबल पर इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी, तो एक मौका है कि मतदाताओं का ध्रुवीकरण किया जाएगा।” आप ने भी पिछले दो दिनों में अपने अभियान में बदलाव किया है। सोशल मीडिया और व्हाट्सएप के माध्यम से लोगों तक पहुंचने की कोशिश करते हुए केजरीवाल के वीडियो उन्हें महिला सुरक्षा, युवाओं और शिक्षा के बारे में बता रहे हैं।

वीडियो के माध्यम से संदेश दिया जा रहा है कि आप के लिए प्रत्येक वोट केजरीवाल के लिए एक वोट होगा। यह ऐसा ही कुछ है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल मई में लोकसभा चुनाव में अपने सफल अभियान में भी कहा था। अभियान के नारों में भी बदलाव किया गया है। पिछले हफ्ते तक नारा लग रहा था, ‘लगे रहो केजरीवाल’। अब यह बदलकर हो गया है, ‘दिल्ली में तो केजरीवाल’।

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