ताज़ा खबर
 

कोयला घोटाला: कोर्ट ने पूर्व कांग्रेस सांसद नवीन जिंदल को भेजा समन, 4 सितंबर को पेश होने का आदेश

1.86 लाख करोड़ रुपये का यह घोटाला उस वक्त सामने आया था जब नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने मार्च 2012 में अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट में सरकार पर आरोप लगाया था कि उसने 2004 से 2009 तक की अवधि में कोयला ब्लॉक का आवंटन गलत तरीके से किया।

पूर्व कांग्रेस सांसद और बिजनेसमैन नवीन जिंदल।

पूर्व कांग्रेस सांसद और बिजनेसमैन नवीन जिंदल को बतौर आरोपी दिल्ली की एक अदालत ने कोयला घोटाला मामले में समन भेजा है। जिंदल (47) पर कोल ब्लॉक आवंटन मामले में कथित अनियमितताओं के चलते औपचारिक रूप से सीबीआई ने आरोप लगाया था। कोर्ट ने 3 अन्य लोगों और जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड (JSPL) कंपनी को भी समन जारी किया है। कोर्ट ने इन सबसे 4 सितंबर को पेश होने को कहा है। यह मामला झारखंड के अमरकोंडा मुर्गादंगल कोल ब्लॉक आवंटन को जिंदल स्टील एंड गगन स्पॉन्ज को आवंटित किए जाने को लेकर है। सीबीआई ने आरोप लगाया है कि जिंदल की कंपनी जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड ने कोयला राज्य मंत्री दसारी नारायण राव से साठगांठ और 2 करोड़ रुपये निवेश कर कोल ब्लॉक आवंटित करने वाली स्क्रीनिंग कमिटी को प्रभावित किया था। सीबीआई ने कहा कि इसके बदले उन्हें झारखंड ब्लॉक के माइनिंग अधिकार हासिल हो गए।

22 मई को कोयला आवंटन घोटाले में सीबीआई की स्पेशल अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व कोल सेक्रेटरी एचसी गुप्ता और अन्य पूर्व अधिकारियों को अदालत ने 2 साल कैद की सजा सुनाई थी। हालांकि इसके बाद उन्हें और दो अन्य पूर्व अफसरों को कोर्ट ने जमानत दे दी थी। एचसी गुप्ता, केएस क्रोफा और केसी समारिया को 1 लाख रुपये के पर्सनल बॉन्ड और इतने ही रुपये की जमानत भरने को कहा था।

इससे पहले 19 मार्च को दिल्ली की स्पेशल कोर्ट ने कोलगेट मामले में पूर्व कोल सेक्रेटरी एचसी गुप्ता, जॉइंट सेक्रेटरी केएस क्रोफा और केएसएसपीएल और उसके एमडी पीके आहलूवालिया को कई धाराओं के तहत आपराधिक साजिश का दोषी ठहराया गया है। दिल्ली की अदालत ने उन्हें मध्यप्रदेश के रुद्रपुर में केएसएसपीएल कोल ब्लॉक आवंटन में धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार करने का भी दोषी पाया था। इस मामले में मुकदमे का सामना कर रहे चार्टेड अकाउंटेंट अमित को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया था। कोयला घोटाला मनमोहन सिंह की अगुआई वाली यूपीए सरकार के दौरान हुआ था।

क्या था कोयला घोटाला: 1.86 लाख करोड़ रुपये का यह घोटाला उस वक्त सामने आया था जब नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने मार्च 2012 में अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट में सरकार पर आरोप लगाया था कि उसने 2004 से 2009 तक की अवधि में कोयला ब्लॉक का आवंटन गलत तरीके से किया। सीएजी की अंतिम रिपोर्ट के मुताबिक इससे सरकारी खजाने को 1 लाख करोड़ से ज्यादा का नुकसान पहुंचा थआ और कंपनियों ने बेहिसाब मुनाफा कमाया था। सीएजी के मुताबिक सरकार ने कई फर्म्स को बिना किसी नीलामी के कोयला ब्लॉक आवंटित किए थे। इनमें एनटीपीसी, टाटा स्टील, भूषण स्टील, जेएसपीएल, एमएमटीसी और सीईएससी जैसी सरकारी और प्राइवेट- दोनों कंपनियों के नाम शामिल थे। भारत के लोकतंत्र में पहली बार एेसा हुआ था कि किसी मामले में देश के प्रधानमंत्री पर अंगुली उठाई गई हो।

इन लोगों का नाम था शामिल: जिन लोगों के नाम कोल ब्लॉक आवंटन की गड़बड़ी में सामने आए थे, उनमें केंद्रीय पर्यटन मंत्री सुबोध कांत सहाय, बीजेपी के राज्य सभा सांसद अजय संचेती, कांग्रेस नेता विजय दर्डा और राजेंद्र दर्डा, आरजेडी नेता और पूर्व कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्री प्रेमचंद गुप्ता और कांग्रेस सांसद और जिंदल स्टील एंड पॉवर के चेयरमैन नवीन जिंदल शामिल थे। मामले की जांच का जिम्मा मिला था सीबीआई को और एजेंसी ने अपनी एफआईआर में कम से कम 1 दर्जन कंपनियों का नाम लिया था, जिन पर अपनी नेटवर्थ बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने, पिछले कोयला ब्लॉक आवंटन को छिपाने और कोयला ब्लॉक की होर्डिंग करने जैसे आरोप लगाए गए।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App