पहलवान सागर हत्याकांड में कोर्ट ने सुशील कुमार को दिया झटका, 4 दिन की पुलिस रिमांड बढाई

दिल्ली पुलिस के वकील आशीष काजल ने कोर्ट में कहा कि और सात दिनों के लिए सुशील कुमार की पुलिस रिमांड बढाई जानी चाहिए क्योंकि सुशील कुमार ही इस जघन्य अपराध का मास्टरमाइंड था और इसके कारण ही एक युवा खिलाड़ी की मौत हो गई।

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सुशील कुमार से लगातार पूछताछ कर रही है क्राइम ब्रांच (Photo-PTI)

पहलवान सागर धनकड़ की हत्‍या के मामले में दिल्ली की एक अदालत ने दो बार के ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार को झटका देते हुए चार दिन के लिए पुलिस रिमांड को बढ़ा दिया है। हालांकि दिल्ली पुलिस ने सात दिनों की और हिरासत की मांग करते हुए कहा था कि सुशील कुमार इस जघन्य अपराध का मास्टरमाइंड है।  97 किलो ग्रीको-रोमन वर्ग में 4 मई को हिस्सा लेने वाले पहलवान सागर धनखड़ को दो समूहों के बीच लड़ाई में पीट-पीट कर मार डाला गया था। बीते दिनों इस हत्याकांड के आरोपी सुशील कुमार को दिल्ली पुलिस ने मुंडका इलाके से गिरफ्तार कर लिया था। सुशील के साथ उसके सहयोगी अजय कुमार की भी गिरफ्तारी हुई हथी।

कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के वकील आशीष काजल ने आरोपी को सात दिन के लिए पुलिस हिरासत में रखने की मांग की थी। उन्होंने कोर्ट को बताया कि इस मामले में शनिवार तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। यह भी बताया कि सुशील कुमार के पास से पुलिस ने एक लाइसेंसी पिस्तौल भी बरामद की है। एडवोकेट आशीष काजल ने कोर्ट में कहा कि और सात दिनों के लिए सुशील कुमार की पुलिस रिमांड बढाई जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि सुशील कुमार इस जघन्य अपराध का मास्टरमाइंड था, इसके कारण ही एक युवा खिलाड़ी की मौत हो गई।

इसके अलावा अभियोजन पक्ष के वकील आशीष काजल ने यह भी कहा कि एक अपराधी के पास से उस घटना का वीडियो भी मिला है जिसमें साफ़ तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे सागर धनखड़ को मारा जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहे है जिसके कारण साक्ष्य इक्क्ठा करना मुश्किल हो रहा है। आशीष काजल ने अदालत को बताया कि आरोपियों का मोबाइल फोन अभी तक बरामद नहीं हुआ है। इस अपराध में अभी 18-20 लोगों की गिरफ़्तारी नहीं हुई है। जांच एजेंसी को सच्चाई सामने लाने का मौका दिया जाना चाहिए।

वहीं इस हत्याकांड में नामजद आरोपी सुशील कुमार की ओर से पेश हुए वकील प्रदीप राणा ने पुलिस के रिमांड आवेदन का विरोध किया और साथ ही यह सवाल पूछा कि घटना का वीडियो कैसे लीक हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस द्वारा छह दिनों का उपयोग कैसे किया गया? उन्होंने छह दिनों में क्या किया है? कोर्ट को प्रतिदिन केस डायरी पढ़नी चाहिए। मोबाइल जब पुलिस के हिरासत में था तो कैसे घटना का वीडियो मीडियाकर्मियों तक पहुंच गया। साथ ही उन्होंने कहा कि पुलिस को और अधिक ढील नहीं दी जानी चाहिए। वही पुलिस द्वारा जब्त पिस्तौल के बारे में प्रदीप राणा ने अदालत से कहा कि क्या पुलिस ये कह रही है कि इस पिस्तौल का इस्तेमाल किया गया है? इस मामले में उस पिस्तौल का इस्तेमाल नहीं किया गया था। पुलिस इस मामले को हवा देकर अपना कीमती समय बर्बाद कर रही है।

प्रदीप राणा ने अदालत में दिल्ली हाईकोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि सहयोग का मतलब यह नहीं है कि अभियुक्त पुलिस की बात मान ले। आशीष काजल ने प्रदीप राणा की बात का विरोध करते हुए कहा कि यह जांच का विषय है कि क्या इस पिस्तौल का इस्तेमाल किया गया था या नहीं। जांच अभी पूरी नहीं हुई है। वीडियो लीक मामले पर उन्होंने कहा कि वीडियो क्लिप जांच का विषय है, और हो सकता है कि वीडियो किसी और के द्वारा लीक की गई हो। हालांकि मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट मयंक गोयल ने शनिवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया ह।

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