सरकारी कैंपेन में अल्पसंख्यक मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी की लेखनी आई काम, लिख दिया कैची लाइन्स वाला गाना

कैंपेन के लिए नकवी के गाने को प्लेबैक सिंगर सुदेश भोंसले ने गाया है।

Mukhtar Abbas Naqvi, BJP, India News
'दि इंडियन एक्सप्रेस' के एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटोः गजेंद्र यादव)

केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी की लेखन कला का बढ़िया इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने महिला और बाल विकास मंत्रालय के पोषण अभियान के लिए एक नए जिंगल (गीत) के बोल लिखे हैं। दरअसल, मंत्रालय हर साल सितंबर में पूरे महीने के लिए एक विशेष अभियान चलाता है जिसे पोषण माह या महीना कहा जाता है।

कैंपेन के लिए नकवी के गाने को प्लेबैक सिंगर सुदेश भोंसले ने गाया है। गीत के बोल कुछ इस तरह शुरू होते हैं: “न्यूट्रीशियन (पोषण) पर करो अटेंशन (ध्यान), सही पोषण से देह को रोशन।” गीत में इसके अलावा और भी कई आकर्षक लाइनें हैं, जो कैंपेन से जुड़ा संदेश देती हैं।

63 साल के नकवी की गिनती मोदी सरकार के सक्रिय मंत्रियों में की जाती है। वह मूल रूप से प्रयागराज (पहले इलाहाबाद) से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कला और जन संचार की पढ़ाई की है, जबकि पत्नी सीमा नकवी हैं, जिनसे आठ जून 1983 को उनकी शादी हुई थी।

नकवी आपातकाल के दौरान जेल भी जा चुके हैं। 1975 में वह जब 17 बरस के थे, तब उन्हें सियासी गतिविधियों के कारण नैनी की सेंट्रल जेल का मुंह देखना पड़ा था। छात्र नेता के नाते वह जनता पार्टी की गतिविधियों में सक्रिय रहा करते थे। वह साल 1980 में जनता पार्टी (सेक्युलर) के उम्मीदवार के तौर पर यूपी से चुनाव लड़े, पर असफल रहे थे।

बाद में उन्होंने 1980 के लोकसभा चुनाव में अयोध्या निर्वाचन क्षेत्र से एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में भी चुनाव लड़ा। वह 1998 की लोकसभा से लोकसभा के लिए चुने गए और बाद में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में सूचना और प्रसारण मंत्रालय के राज्य मंत्री बनाए गए। आगे 2016 में उन्हें राज्यसभा के लिए चुना गया।

वह 26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी मंत्रालय में अल्पसंख्यक मामलों और संसदीय मामलों के राज्य मंत्री बने। फिर 12 जुलाई 2016 को नजमा हेपतुल्ला के इस्तीफे के बाद उन्हें अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार मिला। आगे 30 मई 2019 को उन्होंने नरेंद्र मोदी कैबिनेट में कबीना मंत्री के रूप में शपथ ली और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के साथ बने रहे।

नकवी मानते हैं कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) दो “अलग-अलग संस्थाएं” हैं। दोनों के अलग-अलग मुद्दों पर विभिन्न विचार हैं। उनके अनुसार आरएसएस एक राष्ट्रवादी संगठन है न कि “राष्ट्र-विरोधी संगठन”।

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