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सीएम अरविंद केजरीवाल का पीएम नरेंद्र मोदी पर बड़ा हमला, बोले- ‘अंबानी की जेब में मोदी सरकार’

इंस्टीट्यूशंस ऑफ एमिनेंस विवाद में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी कूद गए हैं। उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते कहा कि मोदी सरकार अंबानी की जेब में है। जियो इंस्टीट्यूट को इंस्टीट्यूशंस ऑफ एमिनेंस की सूची में शामिल करने को लेकर विवाद छिड़ गया है।

Author नई दिल्ली | July 11, 2018 7:51 PM
दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और पीएम नरेंद्र मोदी। (फाइल फोटो)

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर एक बार फिर से करारा जुबानी हमला बोला है। सीएम केजरीवाल ने देश के सबसे धनी व्यक्ति और रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रमुख मुकेश अंबानी के तार पीएम मोदी से जोड़ दिए हैं। उन्होंने इस बार रिलायंस फाउंडेशन के प्रस्तावित जियो इंस्टीट्यूट को लेकर मोदी सरकार की तीखी आलोचना की है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए सीएम केजरीवाल ने लिखा, ‘पहले कांग्रेस सरकार अंबानी की जेब में थी, अब मोदी सरकार अंबानी की जेब में है। कुछ भी बदला है क्या?’ दरअसल, मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कुछ दिनों पहले ‘इंस्टीट्यूसंस ऑफ एमिनेंस’ की सूची जारी की थी। इसमें रिलायंस फाउंडेशन के प्रस्तावित जियो इंस्टीट्यूट को भी जगह दी गई थी। यशवंत सिन्हा ने केंद्र के कदम की कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने ट्वीट किया था, ‘जियो इंस्टीट्यूट की अभी तक स्थापना भी नहीं की गई है। यह अस्तित्व में ही नहीं है। इसके बावजूद सरकार ने इसे एमिनेंस का टैग दे दिया। मुकेश अंबानी होने का यही महत्व है।’

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सीएम केजरीवाल ने वर्ष 2014 के आमचुनावों से पहले भी मुकेश अंबानी को लेकर तीखी टिप्पणी की थी। उन्होंने कांग्रेस और भाजपा को भाई-भाई करार दिया था। केजरीवाल ने कहा था कि मुकेश अंबानी की एक पॉकेट में नरेंद्र मोदी और दूसरे में राहुल गांधी हैं। पहली बार दिल्ली का मुख्यमंत्री बनने के बाद अरविंद केजरीवाल ने फरवरी 2014 में प्राकृतिक गैस में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली, कंपनी मामलों के पूर्व मंत्री मुरली देवड़ा और मुकेश अंबानी के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था।

इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस विवाद: केंद्र ने देश के छह उच्चतर शिक्षण संस्थानों को इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस की सूची में शामिल किया है। इसमें जियो इंस्टीट्यूट को निजी संस्थान के वर्ग में स्थान दिया गया, लेकिन इसको लेकर विवाद हो गया। विरोधियों का कहना है कि जो संस्थान अभी अस्तित्व में ही नहीं आया है, उसे एमिनेंस की सूची में कैसे शामिल किया जा सकता है। विवाद बढ़ने पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय को सफाई देनी पड़ी। मंत्रालय ने कहा कि जियो इंस्टीट्यूट को ग्रीनफील्ड श्रेणी के तहत चुना गया है। इस श्रेणी में नए संस्थानों को जगह दी जाती है। बता दें कि आईआईटी दिल्ली, आईआईटी बांबे और आईआईएससी बेंगलुरु को सार्वजनिक शिक्षण संस्थान की श्रेणी में इस सूची में शामिल किया गया है। निजी संस्थानों की श्रेणी में मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन, बिट्स पिलानी और जियो इंस्टीट्यूट को जगह दी गई है।

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