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दिल्ली कैब रेप केस: उबर के क्षेत्रीय प्रमुख की गिरफ्तारी तय

अमलेश राजू टैक्सी एजंसी उबर और बलात्कार के आरोपी शिव कुमार पर शिकंजा कसता जा रहा है। दिल्ली में प्रतिबंध के बाद भी उबर की टैक्सियां कैसे चल रही हैं इसका सटीक जवाब नहीं देने के कारण और उबर के खिलाफ एफआइआर दर्ज होने के बाद उसके प्रधान की गिरफ्तारी तय हो गई है। सूत्रों […]

Author December 11, 2014 9:00 AM
हैरान करने वाली बात यह है कि इस कैब रेप आरोपी की पत्नी भी है और एक बच्चा भी। (फोटो: भाषा)

अमलेश राजू

टैक्सी एजंसी उबर और बलात्कार के आरोपी शिव कुमार पर शिकंजा कसता जा रहा है। दिल्ली में प्रतिबंध के बाद भी उबर की टैक्सियां कैसे चल रही हैं इसका सटीक जवाब नहीं देने के कारण और उबर के खिलाफ एफआइआर दर्ज होने के बाद उसके प्रधान की गिरफ्तारी तय हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने उबर कैब कंपनी के आरोपी चालक को मुहैया कराया गया आइफोन बरामद कर लिया है।

शुक्रवार की रात एक वित्तीय कंपनी की महिला कर्मी ने कंपनी के ऐप के जरिए कैब बुक की थी और कैब के अंदर ही आरोपी ने उसके साथ बलात्कार किया था। इस स्मार्टफोन को दिल्ली पुलिस के दल ने मथुरा से बरामद किया। फोन की तलाश में दिल्ली पुलिस का यह दल आरोपी शिव कुमार यादव के साथ मंगलवार को मथुरा गया था। आरोपी की सूचना के आधार पर फोन बरामद कर लिया गया। पुलिस पहले ही यादव के इस्तेमाल किए जाने वाले तीन में से दो फोन बरामद कर चुकी है।

उबर अपने कैब चालकों को उबर ऐप के साथ एक आइफोन देती है। ग्राहक कंपनी के ऐप के जरिए कैब बुक करा सकते हैं और फिर यह प्रणाली ग्राहक के सबसे नजदीक रहे कैब चालक को संदेश भेजती है। जैसे ही कैब चालक कार्य के लिए अपनी मंजूरी देता है, ऐप के जरिए ग्राहक तक चालक का नाम, फोटो और पंजीकरण संख्या जैसे कैब से संबंधित अन्य विवरण भेज दिए जाते हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह फोन हमारे लिए एक महत्वपूर्ण साक्ष्य है। यह साबित करता है कि यादव उबर के लिए काम करता था और यह हमें कैब सेवा के दोष को सिद्ध करने में मदद करेगा। इससे यह भी साबित होगा कि यादव ही वह कैब चला रहा था जिसे पीड़िता ने बुक किया था। उन्होंने बताया कि पीड़िता ने जहां से कैब ली थी, उसका जीपीएस संकेत हमें मार्ग की पुष्टि करने में मदद पहुंचाएगा।

इससे यह भी पता चलेगा कि अपराध स्थल पर कैब कब पहुंची और कब उसने पीड़िता को घर छोड़ा। आरोपी चालक ने कंपनी के सिस्टम पर ग्राहक को उसके नियत स्थान पर पहुंचाए जाने का संदेश भेजा था और फिर वह ऐप से बाहर आ गया। इसके बाद वह मथुरा फरार हो गया। बाद में आरोपी को मथुरा से गिरफ्तार कर लिया गया था और उसे तीन दिन तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।

उधर, उबर के एशिया प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख से बुधवार को दिल्ली पुलिस ने लगातार दूसरे दिन भी पूछताछ की। उबर के एशिया प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख एरिक एलेक्जेंडर मंगलवार को इस घटना के संबंध में जारी जांच में शामिल हुए थे और दिल्ली के उत्तरी जिले के सिविल लाइंस में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की थी। उन्हें सीआरपीसी की धारा 91 के तहत नोटिस जारी किया गया था कि वे कंपनी के कुछ दस्तावेज पुलिस को सौंपें। पुलिस अधिकारी ने बताया कि हमने उनसे दस्तावेज जमा करने के लिए कहा है। इनमें सभी कैब के बारे में और कंपनी के साथ काम कर रहे चालकों की जानकारी मांगी गई है। उनसे यह भी जानना चाहा है कि किस तरह वे उनकी पड़ताल करते हैं। इसके अलावा कंपनी के निदेशकों की भी जानकारी मांगी गई है। दिल्ली महिला आयोग के समन जारी किए जाने के बाद कंपनी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ एरिक मंगलवार को आयोग के सामने भी पेश हुए थे। दिल्ली पुलिस इस मामले में उबर के खिलाफ पहले ही प्राथमिकी दर्ज कर चुकी है और पिछले तीन दिन से कंपनी के वरिष्ठ पदाधिकारियों से पूछताछ कर रही है।

जांच सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में प्रतिबंध के बावजूद उबर की टैक्सियां दो दिनों से किस तरह चल रही है इसे लेकर भी पुलिस ने उबर पर सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। उबर की टैक्सियां बंद करने के बाद परिवहन विभाग ने लिस्ट जारी कर साफ कर दिया कि सिर्फ छह कंपनियों की टैक्सियों को दिल्ली की सड़कों पर चलने की इजाजत है। बताया जा रहा है कि दिल्ली में जिन कंपनियों को परिवहन विभाग से हरी झंडी मिली है उनमें और उबर की टैक्सियों पर ऐसा कुछ नहीं होता जिससे पहचान पाएं कि वह उबर की टैक्सी है। दूसरी कंपनियों की टैक्सी की तरह कंपनी का नाम नहीं लिखा होता है। यही कारण है कि प्रतिबंध के बाद भी उबर पिछले तीन दिनों से दिल्ली में अपनी टैक्सी चला रही है।

 

 

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