दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए बिल्डिंग हादसे का दर्द उन 7 परिवारों से बेहतर कोई नहीं समझ सकता जिन्होंने अपनों को इस हादसे में खो दिया। इस घटना में 7 लोगों की मौत हुई जिसमें 5 स्टूडेंट शामिल हैं। मृतकों में छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के रहने वाले युवराज सोनी का नाम भी है। युवराज मोतीलाल नेहरू कॉलेज में B.Com सेकंड ईयर के स्टूडेंट थे।
युवराज की मौत की खबर सुनकर उनके परिवार में मातम पसरा हुआ है। युवराज का परिवार दुर्ग के शीतला नगर में रहता है और सोमवार को अपने बेटे का शव लेकर अपने गृहनगर पहुंचा। मीडिया से बात करते हुए युवराज के चाचा ने बताया कि वह अपने माता-पिता का इकलौता लड़का था। परिवार में माता-पिता और युवराज के अलावा एक उसकी छोटी बहन भी है।
छात्र के परिवार की सरकार के प्रति नाराजगी
युवराज के चाचा कुलेश्वर सोनी ने मीडिया से बात करते हुए सरकार पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा, “सरकार गहरी नींद में सो रही है, सर; कोई क्या कह सकता है? मैं इस सरकार को पूरी तरह से नाकाबिल मानता हूं। यह कोई काम नहीं कर पा रही है। बच्चों का भविष्य और यहां तक कि उनकी जान भी सुरक्षित नहीं है। एक के बाद एक घटनाएं होती रहती हैं, यह सिलसिला रुकना चाहिए। दिल्ली में यह पहली ऐसी घटना नहीं है।”
‘सीए बनने का सपना लेकर दिल्ली पहुंचा था युवराज’
अपने बेटे को खोने के बाद परिवार दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है। इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए युवराज के चचेरे भाई नितेश ने कहा है कि इस हादसे के कई घंटे बाद तक हमने उसके पिता कन्हैया सोनी को नहीं बताया था कि उनका बेटा अब नहीं रहा। नितेश ने बताया कि वह (युवराज) एक साल पहले ही चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने का सपना लेकर दिल्ली पहुंचा था।
रक्षाबंधन के बाद लौटा था दिल्ली
युवराज के फैमिली बैकग्राउंड की बात करें तो उनके पिता की एक लोकल फार्मेसी है। युवराज कुछ ही दिन पहले रक्षाबंधन के बाद दिल्ली लौटा था। स्थानीय पुलिस अधिकारी के मुताबिक, युवराज रक्षाबंधन के बाद जब दिल्ली लौटा तो तभी वह इस पीजी में शिफ्ट हुआ था। युवराज के पड़ोसी का कहना है कि उस लड़के को हम 10 साल से जानते थे और वह मेरी बेटी के साथ खेलता था।
हाईकोर्ट ने इन्हें भेजा नोटिस
बता दें कि दिल्ली हादसे में 12 लोगों का रेस्क्यू किया गया था जिसमें से 7 लोगों की मौत हो चुकी है बाकी घायलों का इलाज चल रहा है। इस हादसे को लेकर सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने जवाबदेही तय करने की ओर इशारा किया और MCD, NHRC, दिल्ली पुलिस समेत जिम्मेदार एजेंसियों को नोटिस जारी किया और 10 दिन के अंदर जवाब मांगा।
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सत्य निकेतन हादसे के मलबे में दिल्ली विश्वविद्यालय का एक 19 साल का छात्र आदित्य फंसा हुआ था। उसने अपने परिवार को फोन कर खुद को बचाने की गुहार लगाई। लोग उसकी हिम्मत को दाद दे रहे हैं। बिहार के रहने वाले बीकॉम फर्स्ट ईयर के छात्र आदित्य ने पांच मंजिला इमारत के ढहने के तुरंत बाद करीब दो बजे पटना में अपनी बहन को फोन किया। हालांकि उसे चार घंटे बाद मलबे से निकाल लिया गया, लेकिन उसके परिवार ने उसे बचाने में लगे वक्त को लेकर सवाल खड़े किए हैं। यहां पढ़ें पूरी खबर…
