दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए हादसे ने सिस्टम में बैठे लोगों को यह सोचने पर मजबूर किया है कि अगर समय रहते रिहायशी इलाकों में चल रहे अवैध पीजी पर कार्रवाई की जाती या फिर इमारत के रखरखाव पर ध्यान दिया जाता तो यह हादसा रोका जा सकता था, लेकिन प्रशासन से लेकर बिल्डिंग के मालिक तक ने इस मामले में लापरवाही बरती जिसका खामियाजा उन 7 जिंदगियों के परिवारवालों को भुगतना पड़ा जिनके अपने इस हादसे में हमेशा के लिए चले गए।

सत्य निकेतन के हादसे के बाद दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में अवैध पीजी इमारतों या फिर रिहायशी इलाकों में अवैध बिल्डिंगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही हैं। हालांकि अब इस कार्रवाई से वो 7 जिंदगियां लौटकर नहीं आ जाएंगी। रिहायशी इलाकों में अवैध पीजी और गेस्ट हाउस की तादात सिर्फ दिल्ली में ही नहीं बल्कि दिल्ली से सटे गुरुग्राम में भी बहुत तेजी से बढ़ रही है।

इसी साल जून में 18 पीजी हुए थे सील

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुग्राम के रिहायशी इलाकों में अधिक क्षमता वाले PG और गेस्टहाउस तेजी से बढ़ रहे हैं। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) के एक सर्वे में शहर के रिहायशी सेक्टरों में चल रहे 453 पीजी और गेस्टहाउस की पहचान की गई थी, जिनमें से 18 को इसी साल जून में सील कर दिया गया था। इन 18 पर नियमों के उल्लंघन के तहत कार्रवाई की गई थी।

‘गुरुग्राम में भी हो सकती है सत्य निकेतन जैसी घटना’

DLF फेज 3 में रहने वाले समीर पुरी ने एक्सप्रेस को बताया है कि गुरुग्राम में जिस तेजी से कथित तौर पर गैर-कानूनी PG और गेस्ट हाउस चल रहे हैं उसे देखते हुए आने वाले समय में अगर कोई कार्रवाई नहीं की गई तो गुरुग्राम में भी सत्य निकेतन जैसा हादसा देखने को मिल सकता है। उन्होंने कहा, “यह निश्चित रूप से यहां भी कभी भी हो सकता है, खासकर छोटे प्लॉट (U ब्लॉक में) पर जहां लोगों ने एक्स्ट्रा फ्लोर बनाकर उनमें पीजी की संख्या बढ़ा दी है।”

इसी साल जून में कुछ पीजी हुए थे सील

समीर पुरी के मुताबिक, जून में कमर्शियल जगहों के खिलाफ एक अभियान के दौरान उनकी रोड पर दो PG सील कर दिए गए थे। यह दोनों पीजी अवैध रूप से चल रहे थे। समीर ने कहा कि गुरुग्राम में अभी तो शांति हैं, लेकिन बहुत कुछ करने की जरूरत है। सनसिटी टाउनशिप में रहने वाली कुसुम शर्मा का कहना है कि G ब्लॉक (EWS) में कई PG हैं जिन्होंने कमर्शियल कनेक्शन या लैंड-यूज कन्वर्जन के लिए अप्लाई नहीं किया है।

कुसुम शर्मा ने आगे बताया कि इन अनधिकृत पीजी के सर्वे तो किए जाते हैं, लेकिन एनफोर्समेंट उससे आगे नहीं जाता। उन्होंने कहा कि कुछ पीजी को नोटिस दिए गए हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जाती। कुसुम शर्मा ने कहा कि हमें सत्य निकेतन जैसी घटना का इंतजार नहीं करना चाहिए।

बता दें कि गुरुग्राम में गैर कानूनी पीजी और गेस्ट हाउस का यह मामला हरियाणा ह्यूमन राइट्स कमीशन (HHRC) के सामने है, जिसने जनवरी में शहर में चल रहे बिना रजिस्ट्रेशन वाले PG और गेस्टहाउस पर खुद से संज्ञान लिया था और अलग-अलग अधिकारियों से एक्शन-टेकन रिपोर्ट मांगी थी। HSVP द्वारा आयोग को 24 मार्च को सौंपी गई एक्शन-टेकन रिपोर्ट के अनुसार, 453 PG में से 121 जगहें एस्टेट ऑफिसर-I और 332 एस्टेट ऑफिसर-II के अंडर थीं।

18 से 20 जून और 3 से 4 जुलाई के बीच डिपार्टमेंट ऑफ टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (DTCP) हरियाणा की एनफोर्समेंट विंग ने DLF फेज III में 15 पीजी और तीन गेस्टहाउस/होटल सील कर दिए गए।

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह दिल्ली के सत्य निकेतन में बिल्डिंग गिरने की घटना के मद्देनजर पूरे देश में इमारतों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों की जांच करने पर विचार कर रहा है। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर.महादेवन की बेंच ने मामले पर यह भी कहा कि वह सत्य निकेतन इमारत गिरने के मामले को दिल्ली हाईकोर्ट से अपने पास ट्रांसफर करने पर विचार करेगी। यहां पढ़ें पूरी खबर…