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जज विवाद: दिल्ली बार एसोसिएशन ने बताया काला दिन, 10 दिनों में मामला सुलझाने का अल्टीमेटम

समिति ने कहा कि भारत के लोगों का न्यायपालिका में अूटट विश्वास है और वे इसे पवित्र मानते हैं। समिति ने कहा कि इस विश्वास को तोड़ना तो दूर इसे छूने की कोशिश भी नहीं होना चाहिए ।
सुप्रीम कोर्ट (photo source – Indian express)

दिल्ली डिस्ट्रिक्ट कोर्ट बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति ने उच्चतम न्यायालय से जुड़ा संकट 10 दिनों के अंदर नहीं सुलझने की स्थिति में लोगों के बीच जाने की रविवार (14 जनवरी) को चेतावनी दी। साथ ही, एसोसिएशन ने शीर्ष न्यायालय के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों के दबाव बनाए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। संस्था ने इस मामले को न्यायपालिका के लिए काला दिन बताया और कहा इस मामले में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को पहले ही दखल देना चाहिए था। दिल्ली की छह जिला अदालतों के वकीलों की समन्वय समिति ने एक बैठक के बाद एक प्रस्ताव पारित किया। इसने कहा कि न्यायापालिका में इस तरह के विवादों का हल करने के लिए एक आतंरिक तंत्र विकसित किया जाना चाहिए और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक न्यायिक जवाबदेही विधेयक लाया जाना चाहिए।समिति ने कहा कि यह इस मुद्दे पर देश भर के बार एसोसिएशनों के साथ चर्चा करेगी और इसने 10 दिनों में संकट का हल नहीं होने की स्थिति में लोगों के बीच जाने की चेतावनी भी दी।

समिति की एक विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘‘हम यह चाहते हैं कि प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) को न्यायालय को सुव्यवस्थित रखना चाहिए और चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों की शिकायतें सीजेआई द्वारा फौरन दूर की जानी चाहिए।’’ समिति ने कहा कि भारत के लोगों का न्यायपालिका में अूटट  विश्वास है और वे इसे पवित्र मानते हैं। समिति ने कहा कि इस विश्वास को तोड़ना तो दूर इसे छूने की कोशिश भी नहीं होना चाहिए और न्यायपालिका बिरादरी से जुड़े सभी लोगों को अनुशासन का पालन करना चाहिए।

गौरतलब है कि शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों – न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एमबी लोकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ – ने यहां संवाददाता सम्मेलन कर एक अभूतपूर्व कदम के तहत सीजेआई दीपक मिश्रा के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर टिप्पणी की थी। उन्होंने मामलों (मुकदमों) को चुनिंदा तरीके से आवंटित किए जाने और कुछ खास न्यायिक आदेशों पर सवाल उठाए थे।

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