दिल्ली में अमेरिकी दूतावास का एक प्रचार अभियान विवादों में घिर गया है। सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें ऑटो-रिक्शा चालक अपने वाहनों पर लगे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पोस्टर और बैनर फाड़ते दिखाई दे रहे हैं। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब हाल ही में ओमान के पास अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हुई थी।

अमेरिकी दूतावास ने “#Freedom250” अभियान के तहत दिल्ली के करीब 100 ऑटो-रिक्शा पर ट्रंप की तस्वीर वाले “Happy Birthday America!” मैसेज वाले पोस्टर लगवाए थे। इस अभियान की शुरुआत मई में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने की थी। इसका उद्देश्य अमेरिका की आजादी के 250 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में विभिन्न देशों में समारोह आयोजित करना था।

हालांकि, 8 से 11 जून के बीच ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान तेल टैंकर एमटी स्टेबेल्लो पर हुए हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान पटनाला सुरेश, आदित्य शर्मा और शिवानंद चौरसिया के रूप में हुई है। इनकी मौत के बाद इस अभियान के खिलाफ नाराजगी बढ़ गई।

ऑटो चालक ने की पोस्टर हटाने की अपील

वायरल वीडियो में ऑटो चालक ट्रंप के पोस्टर फाड़ते नजर आ रहे हैं, जबकि आसपास मौजूद लोग उनका समर्थन करते दिखाई देते हैं। कुछ वीडियो में चालक ट्रंप के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अन्य ऑटो चालकों से भी ऐसे पोस्टर हटाने की अपील कर रहे हैं।

एक चालक वीडियो में कहता सुनाई देता है, “वो वहां हमारे भारतीयों को मार रहे हैं।” वीडियो के अंत में कई लोग “हिंदुस्तान जिंदाबाद” के नारे लगाते भी दिखाई देते हैं।

जब यह अभियान मई में शुरू हुआ था, तब कई ऑटो चालकों को इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। ऑटो चालक गणेश कुमार ने समाचार एजेंसी एपी को बताया था कि उन्होंने शुरुआत में पोस्टर लगाने से इनकार कर दिया था, लेकिन आयोजकों द्वारा चाय का पैकेट देने के बाद मान गए।

वहीं एक अन्य चालक प्रदीप कुमार ने कहा कि उन्होंने पोस्टर इसलिए लगवा लिया क्योंकि उनके ऑटो की छत फटी हुई थी और उसे ढकने की जरूरत थी। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उन्हें पोस्टर पर लिखे संदेश की ज्यादा जानकारी नहीं थी।

भारत ने जताई कड़ी आपत्ति

भारतीय नाविकों की मौत के बाद भारत सरकार ने इस मामले को गंभीरता से उठाया है। भारत ने दो बार अमेरिकी राजनयिकों को तलब कर यह स्पष्ट किया कि नागरिक नाविकों की मौत को किसी भी तरह उचित नहीं ठहराया जा सकता।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी इस मुद्दे को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सामने उठाया है। यह घटना ऐसे समय हुई है जब भारत और अमेरिका अपने रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने की कोशिश कर रहे थे। इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों के कारण दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव भी देखने को मिला था।

विपक्षी दलों और मृत नाविकों के परिवारों ने केंद्र सरकार से इस मामले में अमेरिका के खिलाफ और सख्त रुख अपनाने की मांग की है।