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Delhi Assembly Polls 2020: कांग्रेस की कोशिश, उसके पास हो सत्ता की चाभी

Delhi Assembly Polls 2020: जानकारों का कहना है कि 2015 के विधानसभा के चुनावों के बाद यदि उपचुनावों को अपवाद मान लें तो मुख्य रूप से दिल्ली के तीनों नगर निगमों व लोकसभा के ही चुनाव हुए।

Author Updated: January 15, 2020 6:06 AM
डेढ़ दशक तक लगातार अपनी हुकूमत चलाने वाले कांग्रेसी सूरमाओं को सत्ता में अपनी वापसी का सफर आसान नहीं दिख रहा।

Delhi Assembly Polls 2020: दिल्ली में चुनावी शंखनाद हो जाने के बाद जहां आम आदमी पार्टी (आप) और भाजपा की नजर सूबे की सत्ता पर काबिज होने पर है, वहीं यहां पर डेढ़ दशक तक लगातार अपनी हुकूमत चलाने वाले कांग्रेसी सूरमाओं को सत्ता में अपनी वापसी का सफर आसान नहीं दिख रहा। कठिन चुनावी मुकाबले में मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने में उनका दम फूल रहा है। हालांकि उन्हें यह उम्मीद जरूर है कि दिल्ली की अगली सरकार बगैर कांग्रेस के सहयोग के नहीं बन पाएगी और पार्टी किंगमेकर की भूमिका में जरूर होगी।

जानकारों का कहना है कि 2015 के विधानसभा के चुनावों के बाद यदि उपचुनावों को अपवाद मान लें तो मुख्य रूप से दिल्ली के तीनों नगर निगमों व लोकसभा के ही चुनाव हुए। भाजपा ने तीनों निगमों के चुनाव में सत्ता हासिल की, वहीं लोकसभा चुनाव में भी उसने अपने प्रतिद्वंद्वियों, आम आदमी पार्टी व कांग्रेस को बेहद पीछे छोड़ दिया। लेकिन दोनों चुनावों में एक बड़ा अंतर यह रहा कि जहां निगम चुनाव के बाद ‘आप’ दूसरे नंबर पर और कांग्रेस तीसरे नंबर पर आई, वहीं लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस दूसरे नंबर पर आ गई और ‘आप’ खिसक कर तीसरे नंबर पर पहुंच गई। हालांकि यह भी माना जा रहा है कि दिल्ली विधानसभा का चुनाव लोकसभा व नगर निगम के चुनाव से बिल्कुल अलग होगा और इसमें अरविंद केजरीवाल की अगुआई वाली सरकार के कामकाज पर जनादेश आना है।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चुनाव से पहले दिल्ली में एक के बाद एक कई लोकलुभावन फैसले कर जनमत को अपने पक्ष में करने की कोशिश की। 200 यूनिट तक मुफ्त तथा 400 यूनिट तक आधी कीमत पर बिजली देने का फैसला कर उन्होंने दिल्ली की जनता को प्रभावित करने की कोशिश की। दूसरी ओर पेयजल की मुफ्त आपूर्ति पहले से जारी है। इसके अलावा महिलाओं को बसों में मुफ्त सफर की सुविधा दी। जाहिर तौर पर इन फैसलों से मतदाताओं के प्रभावित होने के आसार हैं। दूसरी ओर भाजपा की अगुआई वाली केंद्र सरकार ने राजधानी की अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को उनकी संपत्तियों का मालिकाना हक देने का फैसला कर मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को अपने हक में खड़ा करने की कोशिश की है।

आम आदमी पार्टी व भाजपा की तरह कांग्रेस की जेब में सूबे की जनता को देने के लिए चुनावी वादों के सिवा कुछ भी नहीं है। वह सत्ता में आने पर 600 यूनिट तक बिजली सबसिडी देने की बात कर रही है। पार्टी कई अन्य चुनावी घोषणाएं भी लेकर आने वाली है। दूसरी ओर वह जनता को बार-बार यह भी याद दिला रही है कि चाहे शहर में अनधिकृत कालोनियों को नियमित करने का फैसला हो या पुनर्वास कालोनियों को बसाने का, सारे फैसले कांग्रेस की सरकार ने ही किए। झुग्गी वालों को उनकी झुग्गी के पास ही मकान देने की योजना भी उसने ही शुरू की। यहां तक कि बिजली सबसिडी की शुरुआत भी कांग्रेस की ही सरकार ने की। दिल्ली में कांग्रेस व आम आदमी पार्टी दोनों दलों का वोट बैंक एक ही है। मूल रूप से कांग्रेस के वोट बैंक पर कब्जा जमाकर ही केजरीवाल सत्ता में आए। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह वोट बैंक किधर जाएगा। बताया गया कि कांग्रेस ने हाल ही में एक सर्वे कराया और सूबे की 70 सीटों पर अपनी स्थिति का आकलन किया। पार्टी की ओर से सर्वे का सिलसिला अब भी जारी है।

अजय पांडेय

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