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Delhi Assembly Elections 2020: डीटीसी की रात्रि सेवा बंद होने के कगार पर, ‘गारंटी कार्ड’ में परिवहन व्यवस्था को दुरुस्त करने का वादा

Delhi Assembly Elections 2020: डीटीसी के कर्मचारी बताते हैं कि डीटीसी लगातार घाटे में हैं। कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा है।

Author नई दिल्ली | Published on: January 21, 2020 6:27 AM
रात्री बसों में महिलाएं भी सुरक्षित महसूस करती थीं।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने विधानसभा चुनाव के लिए ‘गारंटी कार्ड’ जारी कर भले ही दिल्ली की परिवहन व्यवस्था को दुरुस्त करने का वादा किया है, लेकिन हकीकत यह है कि बीते वर्षों में राजधानी की परिवहन व्यवस्था चौपट हो गई है। दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की रात्रि सेवा पूरी तरह बंद होने के कगार पर है। मौजूदा समय में कुछ ही रूटों पर गिनती की बसें चल रही हैं। इनकी संख्या दस से भी कम है। दिल्ली में डीटीसी की रात्री सेवा करीब-करीब पूरी दिल्ली में चलती थी। डीटीसी ने देर रात सफर करने वाले मुसाफिरों के लिए चलाई जाने वाली बस सेवा बंद करने के साथ बेहद फायदेमंद मानी जाने वाली लिमिटेड (एलटीडी) बस सेवा बंद कर दी गई है। इसके साथ ही अंतरराज्जीय बस सेवा को भी बंद कर दिया गया है।

डीटीसी के कर्मचारी बताते हैं कि डीटीसी लगातार घाटे में हैं। कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा है। परिवहन मजदूर संघ के महामंत्री कैलाश चंद मलिक ने बताया कि फरवरी, 2015 के बाद कुछ महीने के लिए ही डीटीसी की रात्री सेवा छह जुलाई, 2015 को बंद कर दी गई। इसके कुछ महीने बाद ही लिमिटेड (एलटीडी) बस सेवा भी बंद कर दी गई। यही नहीं दिल्ली-एनसीआर के अलावा उत्तर भारत के बड़े शहरों के बीच चलने वाली अंतरराज्यीय बस सेवा का संचालन भी बंद कर दिया गया। मलिक का कहना है कि अंतरराज्यीय बस सेवा एक मात्र ऐसी सेवा थी, जिससे डीटीसी को फायदा होता था। ‘आप’ सरकार के डीटीसी के प्रति उदासीन रवैया का ही देन है कि डीटीसी की बसें लगतार कम होती जा रही है। मामले पर जानकारी के लिए आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज को फोन मिलाया गया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

वेबसाइट भी अपडेट नहीं

डीटीसी के जानकार बताते हैं कि दिल्ली में रात्री बस सेवा करीब 25 रूटों पर संचालित की जाती थीं। ये बसें 12 बजे रात से सुबह चार बजे तक चला करती थी। इन बसों का रूट लंबा होता था। इसका फायदा यह था कि यह दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद भी जाया करती थीं। इन बसों की पहचान यह थी कि रूट नंबर से पहले जीरो 012, 0114, 0604, 0740, 091, 092 नंबर लिखा होता था। डीटीसी की अधिकारिक वेबसाइट पर जिक्र है कि किन 25 रूटों पर बसों का संचालन होता था, लेकिन वेबसाइट 26 मार्च, 2018 के अपडेट नहीं की गई है।

‘दिलचस्पी न होने से बंद करने की नौबत’

दिल्ली सरकार की पूर्व मंत्री किरण वालिया का कहना है कि डीटीसी की बसें कम होने का नतीजा है कि आज दिल्ली में प्रदूषण एक बड़ी समस्या बन गई है। ‘आप’ सरकार ने बसों की संख्या बढ़ाने में दिलचस्पी दिखाई होती तो रात्री सेवा बंद करने की नौबत नहीं आती। रात्री बसों में महिलाएं भी सुरक्षित महसूस करती थीं। शीला दीक्षित के शासनकाल में बसों की संख्या करीब 5500 तक पहुंच गई थीं, लेकिन अब बसें घटती जा रही हैं।

निर्भय कुमार पांडेय

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