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Delhi Elections 2020: सेहत की सुध- आयुष्मान के आमने-सामने

दिल्ली में आम आदमी मोहल्ला क्लीनिक खोलने वाली आम आदमी पार्टी सरकार ने केंद्र सरकार के महत्त्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना को दिल्ली में लागू नहीं किया है। आम आदमी पार्टी की दलील है कि इस योजना में जो शर्तें हैं वह इसकी बड़ी खामियों के रूप में है, जिससे इसका फायदा गरीबों को नहीं मिल सकता है।

हेल्थ केयर को लेकर आम आदमी पार्टी और भाजपा का एक दूसरी की हेल्थ स्कीम पर हमला

दिल्ली विधानसभा चुनाव में जहां भाजपा आयुष्मान भारत बीमा योजना को भुनाने की जुगत में है वहीं आम आदमी पार्टी मोहल्ला क्लीनिक को मरीजों के लिए एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर लेकर जनता के बीच पहुंच रही है। जबकि कांग्रेस दिल्ली के बुनियादी स्वास्थ्य ढांचे को लेकर अपनी पीठ थपथपा रही है। भाजपा नेताओंं ने दिल्ली में इस दावे का पोस्टर लगाया है, ‘भाजपा जिताओ पांच लाख का स्वास्थ्य बीमा पाओ’। मरीजों की राय में बेहतर व किफायती स्वास्थ्य सेवा आसानी से मिलना आज भी एक बड़ी चुनौती है।

दिल्ली में आम आदमी मोहल्ला क्लीनिक खोलने वाली आम आदमी पार्टी सरकार ने केंद्र सरकार के महत्त्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना को दिल्ली में लागू नहीं किया है। आम आदमी पार्टी की दलील है कि इस योजना में जो शर्तें हैं वह इसकी बड़ी खामियों के रूप में है, जिससे इसका फायदा गरीबों को नहीं मिल सकता है। जबकि हमने दिल्ली में इलाज मुफ्त करके गरीब मरीजों को फायदा पहुंचाया है। सुबह पार्क में लोगों के बीच पहुंच आम आदमी पार्टी के नेता कह रहे कि बीमा नहीं मरीजों को इलाज की जरूरत है।

उधर, भाजपा का कहना है कि दिल्ली सरकार ने इस योजना को दिल्ली में लागू न करके लाखों गरीबों को इसका फायदा मिलने से वंचित किया। लिहाजा केंद्र सरकार ने दिल्ली स्थित केंद्र सरकार के व निजी अस्पतालों में इस योजना को लागू किया है। भाजपा नेता अपने इलाकों में जनता के बीच पहुंच कर दावे कर रहे हैं कि अगर भाजपा जीतेगी तो पूरी दिल्ली में इसे लागू किया जाएगा। भाजपा नेताओं ने दिल्ली में इस दावे वाले पोस्टर भी लगाए। जबकि कांग्रेसी नेता दिल्ली में अब तक बने अस्पतालों व डिस्पेंसरियों को अपनी 15 साल रही सरकारी की उपलब्धि के तौर पर गिना रहे हैं।

इस बीच मरीजों की राय किस योजना को लेकर क्या है इस पर बातचीत से मालूम चला कि वे बिना भेदभाव व बिना सिफारिश के इलाज की सुविधा चाहते हैं। एम्स में इलाज के लिए आए मरीज कालूराम ने बताया कि उनका आयुष्मान भारत कार्ड बना है। वह एम्स में लागू भी है। लेकिन कार्ड बनाने के बाद भी जब तक भर्ती नहीं हो जाते तब तक जो भी जांच वगैरह होगी उसका पैसा उन्हें देना होगा। इसी के तहत एंजियोग्राफी के लिए उनको चार हजार रुपए जमा करने को कहा गया।

उत्तर प्रदेश से आए एक अन्य मरीज ने बताया कि वे काफी गरीब हैं उनका आयुष्मान भारत कार्ड तो बना है लेकिन एम्स के लाल बिल्डिंग वाले डॉक्टर कह रहे हैं कि एमआरआइ होगी। उसके लिए रुपए जमा करें। कार्ड दिखाने पर उन्होंने कहा कि यह कार्ड भर्ती होने व ऑपरेशन होने पर काम आएगा।
आयुष्मान कार्ड लेकर एम्स के समाज कल्याण विभाग में आए मरीज के तीमारदार रजऊ ने बताया कि उन्होंने यहां आकर समाज कल्याण विभाग में जांच मुफ्त करने की उनसे अपील की तो उन्होंने बताया कि एम्स के लाल इमारत वाले यानी कार्डियो व न्यूरो विभाग में एम्स के समाज कल्याण विभाग के नियम नहीं चलते।

उनके जैसे तमाम गरीब मरीज कड़ाके की इस ठंड व बीमारी की हालत में दिन ही नहीं रातें भी फुटपाथ पर गुजारने को विवश हैं। इलाज के इंतजार में फुटपाथ पर रातें बसर करते मरीज बताते हैं कि इलाज की लंबी प्रक्रिया, महंगा शहर, आने जाने की असमर्थता है इसलिए हम लोग इस कड़ाके की ठंड में रात में खुले में सोते हैं। फुटपाथ पर पड़े लोगों में पेट में कैंसर की बीमारी से जूझ रही लक्ष्मी देवी, मैनपुरी से आए मलखान सिंह,शिवपुरी से बच्चे की आंख में चोट का इलाज कराने आए भरत लोधी, कान का इलाज कराने आई बच्ची सायाल व गोरखपुर से दिल का इलाज कराने आया बच्चा आर्यन भी शामिल हैं। एम्स के सामने बने फुटपाथ, मेट्रो स्टेशन की सीढ़ियों, बस स्टैंड, अरविंद मार्ग पर बने पैदल पार पथ सभी जगह इन गरीब मरीजों का जमावड़ा है।

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