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दिल्ली में कैसे बने भगवा सरकार, BJP ने बनाई तीन सूत्री रणनीति- सिफारिशी चिट्ठियों पर रोक

इसके अतिरिक्त कच्ची कॉलोनियों में दिए जाने वाले मालिकाना हक के बारे में लोगों को बताने को भी कहा है ताकि केंद्र सरकार के इस फैसले का लाभ भी दिल्ली के चुनाव में भाजपा को मिल सके।

Author नई दिल्ली | Updated: November 16, 2019 9:54 PM
मनोज तिवारी और अमित शाह ।(फाइल फोटो)

पंकज रोहिला
दिल्ली में मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं होने की वजह से लगातार विपक्ष के हमले झेल रहे भाजपा शीर्ष नेतृत्व की नजर अब हर विधानसभा पर है। पार्टी सूत्रों ने बताया कि किसी भी टकराव से बचने के लिए भाजपा नेतृत्व ने चेहतों के नाम की सिफारिश नहीं करने के फरमान जारी किए हैं। माना जा रहा है कि पार्टी के अंदर टिकट को लेकर मचे घमासान को कम करने के लिए राष्टीयय नेतृत्व ने दिल्ली के लिए यह रणनीति तैयार की है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा की अगुवाई वाली बैठक में ये दिशा निर्देश दिए गए हैं।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक नेताओं को कहा गया है कि किसी भी नए नाम को एकाएक विधानसभा के लिए सामने नहीं लाया जाए। केंद्रीय चुनाव समिति और केद्रीय नेतृत्व ही टिकट का फैसला लेगा। पार्टी केवल उसी नेता को टिकट देगी जो अपने विधानसभा क्षेत्र को जीताने का दम रखता हो। इसलिए सांसद अपने चेहेतों की सिफारिश आगे नहीं बढ़ाएं। इस मामले में कोर ग्रुप में दिल्ली की नेताओं की तरफ से सवाल भी पूछा गया था। इस पर पार्टी नेताओं ने साफ किया है कि हर विधानसभा क्षेत्र में केवल जीत को ही टिकट का आधार रखा जाएगा।

सूत्रों ने बताया कि पार्टी नेतृत्व ने दिल्ली को जल्द से जल्द खाली पड़े पदों को भी भरने के आदेश दिए हैं। इस समय बड़ी संख्या में पार्टी के पद खाली पड़े हुए हैं। पार्टी का मानना है कि इन अहम जिम्मेदारियों को भरकर चुनाव की दिशा में और भी मजबूती से काम किया जा सकेगा। पार्टी ने दिल्ली के नेताओं को केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यो की जानकारी आम जनता तक पहुंचाने के लिए रणनीति बनाने को कहा है।

इसके अतिरिक्त कच्ची कॉलोनियों में दिए जाने वाले मालिकाना हक के बारे में लोगों को बताने को भी कहा है ताकि केंद्र सरकार के इस फैसले का लाभ भी दिल्ली के चुनाव में भाजपा को मिल सके। दिल्ली के चुनावों की तैयारियों को लेकर यह बैठक पार्टी के राष्टीय कार्यालय पर बुलाई गई थी। सूत्र बताते हैं कि किसी भी सीट पर टिकट का आश्वासन मिलने की स्थिति में कार्यकर्ताओं की नाराजगी बढ़ती है। इसलिए बड़े नेताओं को स्पष्टतोर पर कहा गया है कि ऐसा आश्वासन किसी भी कार्यकर्ता को न दें।

टिकट का फैसला केंद्रीय चुनाव समिति को करना है। हाल ही में हुई भाजपा कोर ग्रुप की इस बैठक में चुनाव प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर, हरदीप सिंह पुरी, दिल्ली से लोकसभा के अन्य सदस्य भी शामिल थे। हालांकि गौतम गंभीर अपनी व्यवस्तताओं की वजह से इस बैठक में शामिल नहीं हो पाए।

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