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Delhi Assembly Election 2020: टिकट बंटवारे में सावधानी से कांग्रेस ने खेला दांव

Delhi Assembly Election 2020: दिल्ली के अल्पसंख्यक सीटों पर काफी समय तक कांग्रेस का कब्जा रहा है।

Author नई दिल्ली | Updated: January 22, 2020 3:43 AM
कांग्रेस ने बल्लीमारान सीट से पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता हारून यूसुफ को मैदान में उतारा है।

Delhi Assembly Election 2020: दिल्ली विधानसभा चुनाव को देखते कांग्रेस ने सीएए-एनपीआर-एनआरसी विरोध-प्रदर्शन शुरू होने के पहले ही दिन अपना रुख साफ कर दिया था। कांग्रेस के नेता प्रदर्शनकारियों को समर्थन देने के लिए धरनास्थल और हिरासत में लिए गए लोगों से मिलने के लिए थाने पर पहुंचे थे। अब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस इस मुद्दे को पूरी तरह से भुनाना चाहती है। यही कारण है कि पार्टी ने टिकटों का बंटवारा करते वक्त अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर ऐसे चेहर उतारे हैं, जो पार्टी को फायदा पहुंचा सकते हैं।

कांग्रेस ने बल्लीमारान सीट से पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता हारून यूसुफ को मैदान में उतारा है। यूसुफ इस सीट से लगातार पांच बार चुनाव जीते हैं। वे शीला दीक्षित सरकार में दो बार कैबिनेट मंत्री रहे हैं।

इसी प्रकार सीलमपुर सीट से चौधरी मतीन अहमद को मैदान में उतारा गया है। मतीन अहमद के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने बीते महीने सीएए के खिलाफ हुए प्रदर्शन में कथिततौर पर संलिप्त होने का मामला भी दर्ज किया है। मतीन अहमद ने जामिया मिलिया इस्लामिया पहुंचकर वहां प्रदर्शन कर रहे लोगों को समर्थन देने का ऐलान किया था। अहमद भी साल 1993 से कांग्रेस से सीलमपुर विधानसभा सीट जीतते रहे हैं। साल 2013 तक वह भी पांच बार सीलमपुर विधानसभा से अपनी जीत दर्ज करवा चुके हैं। इसी प्रकार ने मुस्तफाबाद विधानसभा सीट से अपने वरिष्ठ नेता अहमद हसन के बेटे अली मेहंदी को उम्मीदवार बनाया है। अहमद हसन इस सीट से साल 2008 में जीते थे। उसके बाद साल 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में दोबारा से जीते थे।

हालांकि, साल 2015 अहसन अहमद भाजपा उम्मीदवार जगदीश प्रधान से चुनाव हार गए थे। उन्हें करीब 31 फीसद वोट मिले थे, जबकि जगदीश प्रधान करीब 35 फीसद वोट लाने में कामयाब रहे थे। इस पर आम आदमी पार्टी का उम्मीदवार भी चुनाव हार गए थे। वहीं, कांग्रेस नेता शोएब इकबाल टिकटों की घोषणा से कुछ दिनों पहले आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए थे। अब पार्टी ने मटियामहल सीट से कांग्रेस ने युवा नेता मिर्जा जावेद अली को मैदान में उतार कर वहां के मतदातों को साधने की भरसक कोशिश की है।

कांग्रेस का रहा है कब्जा

दिल्ली के अल्पसंख्यक सीटों पर काफी समय तक कांग्रेस का कब्जा रहा है। बल्लीमारान और सीमलपुर दो ऐसी विधानसभा सीट हैं, जिस पर कांग्रेस लागतार पांच बार चुनाव जीत चुकी है। इसी प्रकार मुस्तफबाद सीट पर दो बार कब्जा जमाने में सफल रही है। इसी प्रकार ओखला सीट पर कांग्रेस का दबदबा रहा है। साल 2015 में हुए विधानसभा से पूर्व मटियामहल विधानसभा से तत्कालीन कांग्रेस नेता शोएब इकबाल चुनाव जीते थे। चांदनी चौक से विधानसभा सीट से प्रहलाद सिंह साहनी साल 1998 से 2013 तक विधानसभा चुनाव जीते थे। हालांकि, साल 2015 में वह अलका लंबा से चुनाव हार गए थे।

निर्भय कुमार पांडेय

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