दिल्ली में बीजेपी के पार्षदों को झटका, पार्टी नहीं देगी विधानसभा चुनाव का टिकट, सर्वे से तय होंगे कैंडिडेट

श्याम जाजू ने बताया कि पार्षदों को हाल ही में हुई एक बैठक में पार्टी के एक वरिष्ठ नेता द्वारा इस बात की जानकारी दे दी गई है। पार्षदों को टिकट पाने की कोशिश करने के बजाय अच्छा काम करने पर ध्यान देने को कहा गया है।

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दिल्ली भाजपा प्रभारी श्याम जाजू। (वीडियो ग्रैब इमेज/ट्विटर)

दिल्ली में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। इस बीच भाजपा ने अपने पार्षदों को साफ संदेश दे दिया है कि वह आगामी चुनावों में विधानसभा टिकट पाने की रेस में नहीं है। दिल्ली के भाजपा प्रभारी और पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्याम जाजू ने द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में उक्त बातें कही हैं। जाजू ने बताया कि पार्षदों को हाल ही में हुई एक बैठक में पार्टी के एक वरिष्ठ नेता द्वारा इस बात की जानकारी दे दी गई है। पार्षदों को टिकट पाने की कोशिश करने के बजाय अच्छा काम करने पर ध्यान देने को कहा गया है।

खबर के अनुसार, इस बैठक में दिल्ली चुनावों के लिए भाजपा प्रभारी और केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर भी मौजूद रहे। श्याम जाजू ने बताया कि जावड़ेकर ने पार्षदों को बता दिया है कि केन्द्रीय नेतृत्व उन्हें (पार्षदों को) विधानसभा का टिकट देने का इच्छुक नहीं है। ऐसे में उन्हें टिकट की मांग नहीं करनी चाहिए। जावड़ेकर ने ये भी बताया कि पार्टी विधायक के टिकट के लिए उम्मीदवारों का चयन मेरिट और सर्वे के आधार पर करेगी।

बता दें कि दिल्ली के तीन स्थानीय निकायों में भाजपा के 181 पार्षद हैं। इनमें से जो नेता टिकट की उम्मीद लगा रहे हैं, उनमें उत्तरी बॉडी स्टैंडिंग कमेटी के चीफ जयप्रकाश (सदर), एमसीडी के दक्षिण स्टैंडिंग कमेटी की पूर्व चीफ शिखा राय (ग्रेटर कैलाश), दक्षिण एमसीडी के पूर्व मेयर कमलजीत सहरावत (द्वारका), दक्षिण निकाय के पूर्व मेयर नरेंद्र चावला (तिलक नगर) और उत्तरी निकाय के पूर्व मेयर आदेश गुप्ता (पटेल नगर) शामिल हैं। भाजपा के ही एक अन्य नेता ने बताया कि हालांकि कई पार्षद अपने इलाके में काफी लोकप्रिय हैं, लेकिन पार्टी एमसीडी में भ्रष्टाचार को लेकर काफी सतर्क है।

पार्टी नेता के अनुसार, कई नेता मेयर और स्टैंडिंग कमेटी के चीफ इसलिए बने क्योंकि पार्टी ने एमसीडी चुनावों में उनके खिलाफ किसी वरिष्ठ नेता को चुनाव मैदान में नहीं उतारा था। ऐसे में अब उन्हें प्रशासन पर फोकस करना चाहिए। इसके साथ ही यदि भाजपा पार्षदों को विधायकी का टिकट देती है तो पार्टी में अंतर्कलह भी हो सकती है क्योंकि भाजपा बीते ढाई साल से स्थानीय निकायों में सत्ता में हैं। इसके साथ ही तीनों एमसीडी पर भ्रष्टाचार के भी कई आरोप लगे हैं। खुद भाजपा नेता मनोज तिवारी और राज्यसभा सांसद विजय गोयल भी स्थानीय निकाय के निर्माण विभाग को भ्रष्ट करार दे चुके हैं।

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