दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार (27 फरवरी) को दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को शराब घोटाले मामले में बरी कर दिया। इसके साथ ही 21 अन्य लोगों को भी सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) के केस से बरी कर दिया। राउज एवेन्यू कोर्ट का 598 पेज का आदेश आम आदमी पार्टी के नेताओं और केस के दूसरे आरोपियों के लिए एक बड़ी राहत है।

हालांकि एक सवाल अभी भी बना हुआ है कि कथित शराब पॉलिसी घोटाले में एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) के मनी लॉन्ड्रिंग केस का क्या होगा। क्या CBI के डिस्चार्ज का ED केस पर भी असर पड़ेगा?

मनी लॉन्ड्रिंग जांच कैसे काम करती है?

प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 के तहत ED केस को अक्सर ‘स्टैंडअलोन अपराध’ और ‘प्रिडिकेट अपराध’ से जुड़ा हुआ दोनों कहा जाता है। असल में इसका मतलब है कि ED किसी व्यक्ति के खिलाफ़ क्राइम से हुई कमाई के कथित तौर पर बनने या इस्तेमाल करने की जांच शुरू कर सकता है, भले ही उस अपराध (अंतर्निहित, मुख्य अपराध जिससे गैर-कानूनी कमाई होती है) में उसे दोषी न ठहराया गया हो। ED के अपना केस साबित करने तक, अपराध चल रहा हो सकता है या तय नहीं हो सकता है।

कथित एक्साइज पॉलिसी घोटाले में ED ने अरविंद केजरीवाल को तब भी समन भेजा था जब CBI केस में उनका नाम आरोपी के तौर पर भी नहीं था। ED ने तर्क दिया था कि मनी लॉन्ड्रिंग एक अलग मामला है। हालांकि ED के अपराध असल में अपराध से जुड़े होते हैं। इसका मतलब है कि ED का मामला जरूरी तौर पर अपराध से ही शुरू होना चाहिए। जब कोई कोर्ट आरोपी को बरी कर देता है, तो ED का मामला नहीं चल सकता।

कोर्ट ने क्या कहा है?

इस सवाल का जवाब विजय मदनलाल चौधरी बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया मामले में 2022 के ऐतिहासिक फैसले से मिल सकता है। इसमें सुप्रीम कोर्ट ने प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट को सही ठहराया और मनी लॉन्ड्रिंग पर कानून बनाया। फैसले के मुताबिक ED किसी भी व्यक्ति पर नोशनल बेसिस पर या यह मानकर मुकदमा नहीं चला सकता कि कोई शेड्यूल्ड अपराध किया गया है, जब तक कि यह अधिकार क्षेत्र वाली पुलिस में रजिस्टर न हो और/या जांच/ट्रायल पेंडिंग न हो, जिसमें क्रिमिनल कंप्लेंट भी शामिल है। इसका मतलब है कि ED केस को जरूरी तौर पर एक प्रिडिकेट ऑफेंस केस के बाद आना होगा। इसलिए एक बार प्रिडिकेट ऑफेंस खत्म होने के बाद ED केस भी खत्म हो जाना चाहिए।

फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर व्यक्ति को शेड्यूल्ड अपराध से आखिरकार बरी कर दिया जाता है या उसके खिलाफ क्रिमिनल केस कोर्ट द्वारा रद्द कर दिया जाता है, तो उसके या ऐसी प्रॉपर्टी पर दावा करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ मनी-लॉन्ड्रिंग का कोई अपराध नहीं हो सकता, जो उसके ज़रिए बताए गए शेड्यूल्ड अपराध से जुड़ी प्रॉपर्टी है।

आगे क्या होगा?

CBI ने शुक्रवार को कहा कि वह ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ तुरंत हाई कोर्ट में अपील फाइल करेगी। जब तक आरोपी को बरी करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश पर रोक नहीं लगती (जो आमतौर पर नहीं होता) ED केस जारी नहीं रह सकता। सुप्रीम कोर्ट ने लगातार विजय मदनलाल चौधरी के फैसले को लागू करते हुए कहा है कि एक बार जब आरोपी को संबंधित अपराध में बरी कर दिया जाता है, तो मनी लॉन्ड्रिंग नहीं चल सकती। पढ़ें केजरीवाल-सिसोदिया के बरी होने पर क्या बोली बीजेपी

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केजरीवाल ने कहा कि यह पूरा षडयंत्र था। यह आम आदमी पार्टी को खत्म करने की साजिश थी, लेकिन जज ने बहुत हिम्मत दिखाई और एक बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी और अमित शाह को पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए। पढ़ें पूरी खबर