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प्रदूषण की चादर में लिपटी रही दिल्ली, वातावरण में चली ‘बहुत खराब’ दर्जे की हवा; 17 अन्य शहरों का भी यही हाल

प्रदूषण के लिहाज से कई दूसरे शहरों की हवा भी जहरीली पाई गई। इनमें बल्लभगढ़, बहादुरगढ़, बागपत, ग्रेटर नोएडा, नोएडा, गाजियाबाद, भिवंडी, जींद, हिसार, गुरुग्राम, फरीदाबाद, फतेहाबाद व रोहतक शामिल हैं। इनकी हवा में प्रदूषण का औसत स्तर 300 से 400 के बीच रहा।

Author नई दिल्‍ली | Updated: October 25, 2020 5:44 AM
Delhi, Air Pollution,दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है। (फाइल फोटो)

दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र शनिवार को प्रदूषण की घनी चादर में लिपटा रहा। प्रदूषण का आलम यह रहा कि दिन में बादल घिरे से लग रहे थे। दिन ढलने से पहले ही अंधेरा छा गया। जहरीली हवा का आलम यह रहा कि दिल्ली की हवा शनिवार को बहुत खराब दर्जे की पाई गई। दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) शनिवार को 364 रहा। जो बहुत खराब दर्जे का माना जाता है।

एअरपोर्ट पर एक्यूआइ 342, पूसा 351, चांदनी चौक में 379 में, लोधी रोड का एक्यूआइ 302, दिल्ली विश्वविद्यालय का 358 और आइआइटी के पास शनिवार को भी हवा बहुत खराब स्तर की रही। नोएडा की हवा भी खतरनाक रूप से प्रदूषित पाई गई। नोएडा का एक्यूआइ 359 रहा। अनुमान है कि 25 और 26 को हवा का स्तर और खराब होगा। जिससे यह प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर पहुंच जाएगा।

प्रदूषण निगरानी प्रणाली सफर के मुताबिक पंजाब व हरियाणा सहित आसपास के इलाकों में पराली जलाने के 1292 मामले दर्ज किए गए। हालांकि दिल्ली की ओर आ रही पछुवा हवा की गति काफी कम रही, जिससे धुआं काफी तेजी से दिल्ली नहीं पहुंचा व वायु प्रदूषण में पराली के धूंए का फीसद बढ़कर नौ ही पहुंचा। आज के आकलन में स्थानीय प्रदूषण कारक ज्यादा रहे।

प्रदूषण में यों तो महीन धूल कण ही यानी पीएम 2.5 ही ज्यादा घातक माने जाते हैं। इस आकार या 2.5 माइक्रान या इससे भी बारीक यानी एक माइक्रान आकार के धूल कण जो तेल व हवा में मौजूद होते हैं, वे अन्य प्रदूषकों के साथ मिलकर घातक तालमेल बना लेते हैं।

एम्स के जेरियाट्रिक रोग विभाग के सहायक प्रोफेसर व स्वास्थ्य विशेषज्ञ डा प्रसून चटर्जी ने कहा कि यह कण खून की नसों से दिमाग व भ्रूण तक पहुंच जाते हैं। वहीं, मोटे कण यानी पीएम 10 सांसों के जरिए फेंफड़ों में पहुंच कर नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए बुजुर्गों को इस समय खास ध्यान रखने की दरकार है। खासकर दमे के मरीजों और जिनको पहले न्यूमोनिया हो चुका है।

उन्होंने कहा कि जो धुंध है वह आमतौर से मोटे कणों के कारण बनती है। इससे आंखों में जलन, आंसू आने या सूखापन बढ़ने, सांस लेने में तकलीफ, खांसी व एलर्जी, त्वचा में जलन व सिरदर्द की भी समस्या हो सकती है। लिहाजा कोशिश करें कि जहां ज्यादा धुंध हो वहां जाने से बचें। खासकर सुबह व शाम के समय क्योंकि इन दोनों समय में जबकि मौसम में तापमान कम रहता है तो प्रदूषण हवा में निचले स्तर पर बना रहता है। आने वाले दिनों में प्रदूषण और बढ़ेगा। लिहाजा, विशेषज्ञों ने घरों की खिड़कियां और दरवाजे बंद रखने की हिदायत दे रखी हैं। पार्कों में जागिंग करने से बचने व मेहनत वाले काम न करने की सलाह भी दी गई है।

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