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Delhi Anaj Mandi Fire: Delhi Anaj Mandi Fire: मकान मालिक ने 2008 में अवैध तरीके से बनाए 2 फ्लोर, फिर 26 लोगों को किराए पर दे दिए कमरे

अधिकारी ने बताया कि रेहान ने हमें बताया कि उनका इस इलाके में दूसरे मकान में कुछ इसी तरह काम होता हैं, लेकिन उसने यह भी दावा किया है कि उसके मकान में नाबालिगों को काम नहीं दिया गया था। हालांकि 43 मृतकों में से कम से कम पांच नाबालिग थे।

दिल्ली के आज मंडी में आग से 43 की मौत हो गई। फोटो- इंडियन एक्सप्रेस

दिल्ली की अनाज मंडी में एक पांच मंजिला इमारत में आग लग गई थी जिसमें 43 लोग मारे गए थे। पुलिस ने खुलासा किया है कि मालिक मोहम्मद रेहान ने 2008 में अवैध रूप से दो मंजिलों का निर्माण किया था और प्रत्येक मंजिल के कमरों को 13 लोगों को किराए पर दिया था। उसने प्रत्येक किरायेदार से 8,000-10,000 रुपये प्रति माह का किराया लेता था, जिसमें से 43 लोगो की आग लगने के दौरान मौत हो गई। रेहान को उसके रिश्तेदार के घर से गिरफ्तार कर लिया गया है क्योंकि वह कथित रूप से शहर छोड़ने की कोशिश कर रहा था, और सोमवार (9 दिसंबर) को उसे स्पेशल क्रांइम यूनिट (एसआईयू) को सौप दी गई।

अवैध रुप से ऊपर के दो मंजिल का हुआ था निर्माण: वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि पूछताछ के दौरान मकान मालिक रेहान ने खुलासा किया है कि उसके दो भाई और दो सौतेले भाई हैं। जिस मकान में आग लगी थी उस पर रेहान समेत उसके भाईयों का भी मालिकाना हक है। उन्होंने इसे 2004 में खरीदा था और बिना किसी सरकारी इजाजत के अवैध रुप से ऊपर की दो मंजिलों का निर्माण मात्र 15 दिन के अन्तराल में करा लिया था। यह काम कथित रुप से स्थानीय पुलिस और इंजीनियरों की मिलीभगत से कराया गया था।

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अवैध रुप से निर्माण कर किराये पर दिया जाता था: पुलिस रेहान के द्वारा किये गए दावों की जांच कर रही है। उत्तर नगर निकाय को पत्र लिख उन्हें उस मकान के दस्तावेजों की श्रृंखला, स्वामित्व दस्तावेज, निर्माण परमिट और टैक्स पर्ची के विवरण देनें के लिए कहा है। कागज पर यह आवासीय होना चाहिए लेकिन इसके अंदर छोटे -2 कमरे अवैध रुप से निर्माण कर किराय पर दिया जाता था। पूछताछ के दौरान रेहान ने बताया कि उसका एक जीजा और उसके भाई भी उसी मकान में किराये पर रहते थे।

पांच नाबालिग की मौत: एक अधिकारी ने बताया कि रेहान ने हमें बताया कि उनका इसी  इलाके में दूसरे मकान में कुछ इसी तरह काम होता हैं, लेकिन उसने यह भी दावा किया है कि उसके मकान में नाबालिगों को काम नहीं दिया गया था। हालांकि 43 मृतकों में से कम से कम पांच नाबालिग थे।

एफएसएल के अधिकारियों ने किया निरीक्षण:  बता दें कि सोमवार (9 दिसंबर) को दिल्ली की क्रांइम ब्रांच और फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) के अधिकारियों की एक टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया है और नमूने भी एकत्र किए है।

14 दिनों की पुलिस हिरासत: गौरतलब है कि मकान के मैनेजर मोहम्मद फुरकान (39) के साथ रेहान को सोमवार को दिल्ली की एक अदालत ने 14 दिनों के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पुलिस ने कहा कि दोनों व्यक्ति बचपन के दोस्त हैं और 2003 से एक साथ काम कर रहे हैं।

43 निर्दोष लोगों की मौत: जांच अधिकारी विजय कुमार ने अदालत को बताया कि इस आग की वजह से  43 निर्दोष लोगों की मौत हो गई है। यह एक बहुत ही संवेदनशील मुद्दा है। हमने कल इन (दो आदमियों को) गिरफ्तार किया था और हमें उनकी हिरासत की जरूरत है अन्यथा यह मरने वालों के साथ अन्याय होगा। जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि प्रत्येक मंजिल पर भी कई अलग-अलग यूनिट का निर्माण किया था और यह अलग-अलग मालिकों को दी गई थीं। यहां पर टोपी , प्लास्टिक के खिलौने, जैकेट और रेक्सिन बैग बनाने का काम होता था।

घटना को देखते हुए हिरासत में भेजा गया: मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट मनोज कुमार ने अपने आदेश में कहा कि घटना की व्यापकता को देखते हुए, अदालत संतुष्ट थी कि अभियुक्तों की गहन जांच के लिए हिरासत में रखना आवश्यक था।

एफएसएल की टीम निरीक्षण करने पहुंची: एफएसएल से पांच सदस्यों की एक टीम ने दोपहर 12:30 बजे अनाज मंडी भवन पहुंची और दो घंटे तक उस जगह का निरीक्षण किया। एक अधिकारी ने कहा कि हमने भवन से नमूने एकत्र किए हैं, जिसमें कच्चे माल, खाना पकाने के बर्तन और मजदूरों द्वारा उपयोग किए जाने वाले बिजली के उपकरण शामिल हैं।

1990 अनाज मिलों को मिला था आवास: बता दें कि स्थानीय लोगों ने दावा किया है कि कई ऐसी इमारतें है यहां जो अवैध रूप से लेन से बाहर चल रही थीं, जो 1990 के दशक तक अनाज मिलों और आवासों के लिए थीं। जब द इंडियन एक्सप्रेस ने सोमवार को इस क्षेत्र का दौरा किया तो अधिकांश इमारतें बंद थीं, क्योंकि खुदरा दुकानें लेन में चल रही थीं।

आग लगने से लोग डर गए है: फार्मेसी चलाने वाले मितरान अहमद (53) ने बताया कि मैंने सुबह अपनी दुकान खोली तो कई लोगों को अपने घर से बाहर जाते देखा। जब मैंने उनसे पूछा, तो उन्होंने बताया आग लगने से 43 लोग मर गए है जिसकी वजह से बेहद डर लग रहा है। उन्होंने अस्थायी रूप से अपने दोस्तों या परिवारों के घरों में जाने का फैसला किया।

इन मकानों में प्लास्टिक के खिलौने बनती थी: एक निवासी अब्दुल (60) ने बताया है कि यहां ज्यादातर इमारतें आवासीय उद्देश्य से बनाई गई थीं लेकिन कुछ भवन के ऐसे मलिक हैं जो पूरी मंजिलों को  कारखानों वालों को किराए पर देते हैं। इन कारखानों में से अधिकांश में प्लास्टिक के खिलौने और अन्य सामान बनाते हैं। कुछ कपड़ा कारखाने भी हैं। छोटी इमारतों में लोग एक मंजिल के लिए कारखाने के मालिकों से 5,000 रुपये से 10,000 रुपए लेते हैं।

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