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मैदान से आप का शक्ति प्रदर्शन: दिल्ली में टकराव की राजनीति खत्म होगी

दिल्ली में सरकार किसी भी पार्टी की रही हो लेकिन पूर्ण राज्य का सपना हर पार्टी का रहा है। पूरे चुनाव अभियान और केंद्र सरकार के टकराव का कारण भी ये अधिकार ही रहे हैं।

विधायक राघव चड्ढा छोटे मफलरमैन के साथ फोटो लेते हुए (फोटो जनसत्ता)

रामलीला मैदान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के शपथ ग्रहण का तीसरी बार गवाह बना। इस मैदान से आम आदमी पार्टी (आप) ने बड़े राजनीतिक मैदान में उतरने के साफ संकेत दिए और इस शपथ ग्रहण को एक शक्ति प्रदर्शन बनाकर राजनीतिक दलों के सामने खड़ा किया। इस प्रदर्शन से साफ है कि दिल्ली के बाद अब देश में आम आदमी पार्टी का राजनीतिक विस्तार होगा। हालांकि दिल्ली के विकास का रास्ता आम आदमी पार्टी केंद्र के सहयोग से ही खोलने की तैयारी कर रही है। इस शपथ ग्रहण समारोह में रामलीला मैदान में तरह-तरह के रंग देखने को मिले।

मैदान में बिजली करंट वाले बवाल के पोस्टर लेकर आए युवा कह रहे थे कि लगा करंट तो टोपियों में भी झाड़ू का चिन्ह भी नजर आया। हनुमान जी की कृपा भी मैदान में बरसी, जहां एक युवा हनुमान जी की वेशभूषा में गदा के साथ घूमता नजर आया। अब तक रामलीला मैदान में इस प्रकार के राजनीतिक व बड़े आयोजन का सेहरा कांग्रेस-भाजपा जैसी बड़ी पार्टियों के सिर ही बंधते रहे हैं। इस बार आम आदमी पार्टी ने अपने दम पर पूरे मैदान को एक शक्ति स्थल में तब्दील कर दिया और इसमें एक बड़ी सफलता भी हासिल की।

मैदान के बाहर से ही अंदर की झलकियां साफ नजर आ रही थीं, जहां देखो वहां झाड़ू व अरविंद केजरीवाल का नया अवतार मैदान में आया। मैदान के एक हिस्से में दिल्ली के विभिन्न इलाकों से हूबहू अरविंद केजरीवाल की वेशभूषा पहने बच्चे नजर आए। जो बच्चों में उनकी लोकप्रियता की ओर इशारा कर रहे थे। वहीं, मैदान के बाहर झाड़ू का प्रयोग कर एक युवक मोर की वेशभूषा में आम आदमी पार्टी का समर्थन करता नजर आया। अंदर के मैदान में भी ऐसी झलकियां जगह-जगह फैली हुई थीं। बड़ी संख्या में पहुंचे दिल्लीवासी अपने पसंदीदा नेताओं की एक झलक पाने को बेताब दिखे। इस दौरान कुछ लोगों के हाथ में तिरंगा था तो कुछ लोगों के हाथ में आम आदमी पार्टी का झंडा था। लोगों ने केजरीवाल के साथ ‘हम होंगे कामयाब’ गीत गाया। इस दौरान रामलीला मैदान का माहौल देखने लायक था।

दिल्ली में सरकार किसी भी पार्टी की रही हो लेकिन पूर्ण राज्य का सपना हर पार्टी का रहा है। पूरे चुनाव अभियान और केंद्र सरकार के टकराव का कारण भी ये अधिकार ही रहे हैं। दिल्ली सरकार जिन शक्तियों की बात करती है, वे केवल पूर्ण राज्य के अधिकार में निहित हैं, लेकिन केंद्र सरकार के सहयोग के बिना यह अधिक मिलना संभव नहीं है। यह बात बीते पांच साल में आप सरकार समझ चुकी है। आगे बढ़ने के लिए केंद्र के सहयोग से ही सरकार को आगे बढ़ना होगा।

दिल्ली सरकार के छह माह के कार्यकाल में एक के बाद बड़ी योजनाएं लागू हुई हैं। ये योजनाएं ही एक बार फिर से आम आदमी पार्टी को बड़ा बहुमत दिलाने में कामयाब रही हैं। बीते सालों में केंद्र सरकार के साथ उपराज्यपाल से भी दिल्ली सरकार का टकराव रहा है, जो फाइलों की मंजूरी को लेकर रहा। वर्तमान उपराज्यपाल अनिल बैजल के आवास पर भी मुख्यमंत्री ने धरना दिया था। इसके पीछे तर्क था कि फाइलों को मंजूरी नहीं देकर दिल्ली काम का फंसाया जा रहा है । वर्तमान स्थिति में इन हालातों को सुधारना ही आप सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी।

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