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दिल्ली सरकार का केंद्र को सुझाव: ‘तंबाकू’ को खाद्य पदार्थ का दर्जा दे प्रतिबंधित किया जाए

दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने केंद्र से आग्रह किया है कि 'खाद्य' की परिभाषा में संशोधन किया जाए और खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत 'तंबाकू' को खाद्य पदार्थ का दर्जा देकर भारत में चबाने वाले तम्बाकू के खतरे से निपटा जाए।

Author नई दिल्ली | April 24, 2016 4:37 PM
एक तंबाकू खुदरा विक्रेता। (फाइल फोटो)

दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने केंद्र से आग्रह किया है कि ‘खाद्य’ की परिभाषा में संशोधन किया जाए और खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत ‘तंबाकू’ को खाद्य पदार्थ का दर्जा देकर भारत में चबाने वाले तम्बाकू के खतरे से निपटा जाए। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग में अतिरिक्त निदेशक एस.के.अरोड़ा ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजे पत्र में लिखा, “यह जिक्र करने योग्य है कि कोई भी सरकार मुंह में ऐसा पदार्थ रखने की अनुमति नहीं देगी जो जहरीला या विषैला पदार्थ हो। अगर हम ‘खाद्य’ की परिभाषा बदलकर कहें कि ‘ऐसा पदार्थ जिसे पूरी तरह या आंशिक रूप से खाने के उद्देश्य से मुंह के अंदर रखा जाए और उसे चबाया जाए, चूसा जाए या कोई अन्य तरीका हो तो उसे ‘खाद्य पदार्थ’ बताया जाना चाहिए।”

खाद्य सुरक्षा अधिनियम के 2011 के नियमन का जिक्र करते हुए अरोड़ा ने कहा, “इस प्रकार हर तरह के चबाने योग्य तम्बाकू चाहे वह अपरिष्कृत, सुगंधित या अन्य तरह का हो वह स्वत: केंद्रीय कानून के तहत प्रतिबंधित हो जाएगा जिसके लिए किसी भी राज्य को बार-बार अधिसूचना जारी नहीं करनी होगी और तम्बाकू उद्योग के हस्तक्षेप के कारण यह सामान्यत: अदालत का मामला बन जाएगा।”

2011 के नियमन के तहत खाद्य के रूप में ऐसा कोई भी पदार्थ प्रतिबंधित है जिसमें तम्बाकू हो। अरोड़ा ने कहा कि दिल्ली में चबाने वाले तम्बाकू का उपभोग रिप्लेस एडवरटाइजिंग के कारण बढ़ रहा है और ऐसे विज्ञापन खासकर बॉलीवुड की हस्तियां करती हैं। आप सरकार ने फरवरी 2015 में सत्ता में आने के तुरंत बाद चबाने वाले तम्बाकू पर प्रतिबंध लगा दिया था लेकिन कुछ कंपनियों ने दिल्ली उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर कर दी जिससे इसे लागू नहीं किया जा सका। अरोड़ा ने कहा, “पिछली अधिसूचना एक वर्ष के बाद समाप्त हो गई लेकिन अदालत ने इस मामले में कोई ठोस निर्णय नहीं दिया।”

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