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संसद सत्र में देरी की वजह सरकार की बेचैनी: विपक्ष

संसद नीतियों पर चर्चा का एकमात्र जगह और रास्ता है और सरकार की खामियों को उजागर करने का सबसे महत्त्वपूर्ण संवैधानिक मंच है। लेकिन केंद्र में मोदी सरकार के गठन के बाद से संसद की गरिमा को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

Author नई दिल्ली | November 15, 2017 2:43 AM
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला की फाइल फोटो।

 

संसद के शीतकालीन सत्र के आयोजन में देरी पर विपक्ष ने केंद्र सरकार पर तगड़ा सियासी हमला बोला है। कांग्रेस ने कहा है कि जबसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली सरकार का गठन हुआ है तभी से अन्य संवैधानिक संस्थाओं के साथ-साथ संसद की गरिमा को भी धूमिल करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि समय पर संसद सत्र को नहीं आहूत करना सरकार की बेचैनी और घबराहट का सबूत है। पार्टी ने मांग की है कि सरकार बगैर देरी के संसद का शीतकालीन सत्र बुलाए। वह देश के प्रति अपनी जवाबदेही को समझे और उसका निर्वहन करे।  कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप सुरजेवाला ने मंगलवार को पार्टी मुख्यालय में संवादाताओं से कहा कि संसद सरकार की जवाबदेही का आईना है। संसद नीतियों पर चर्चा का एकमात्र जगह और रास्ता है और सरकार की खामियों को उजागर करने का सबसे महत्त्वपूर्ण संवैधानिक मंच है। लेकिन केंद्र में मोदी सरकार के गठन के बाद से संसद की गरिमा को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर जवाब देने में बेचैनी और घबराहट महसूस कर रही है और इसीलिए संसद का सामना करने से बच रही है।

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दूसरी ओर राज्यसभा के वरिष्ठ सदस्य शरद यादव ने कहा है केंद्र सरकार महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर जवाबदेही से बचने के लिए संसद का शीतकालीन सत्र आहूत करने में देरी कर रही है। जद (एकी) के बागी नेता के तौर पर शुमार किए जाने वाले यादव ने मंगलवार को एक ट्वीट कर कहा कि मोदी सरकार गुजरात विधानसभा चुनाव के मद्देनजर संसद का शीतकालीन सत्र आहूत करने से बच रही है। यादव ने कहा कि सरकार की कोशिश सत्र को देरी से आहूत करने की है, क्योंकि सरकार चाहती है कि ज्वलंत मुद्दे सदन पटल पर न उठाए जा सकें ताकि सरकार इन मामलों पर संसद में अपनी किरकिरी होने से बचा सके। उन्होंने कहा कि सरकार की यह कोशिश लोकतंत्र में गलत परंपरा की शुरुआत साबित होगी। विपक्षी दलों ने सरकार पर नवंबर का दूसरा सप्ताह बीत जाने के बाद भी अब तक शीतकालीन सत्र आहूत नहीं करने और इसे जानबूझ कर विलंबित करने का आरोप लगाया है। विपक्ष का यह भी आरोप है कि न सिर्फ गुजरात विधानसभा चुनाव के कारण इसमें देरी हो रही है, बल्कि आगामी सत्र कम अवधि का भी होगा ताकि सरकार नोटबंदी और जीएसटी से अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान जैसे मुद्दों पर अपनी जवाबदेही से बच सकेगी।

 

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