प्रोस्टेट कैंसर की पहचान में देरी से हर दूसरे मरीज में रोग का फैलाव अन्य अंगों तक देखा गया। यह खुलासा भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर), राष्ट्रीय रोग सूचना विज्ञान और अनुसंधान केंद्र (एनसीडीआइआर) के रिसर्च से हुआ है। राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम के तहत देशभर के अस्पतालों में पंजीकृत 9347 मरीजों पर हुए इस अध्ययन में पाया गया कि 43 फीसद मरीजों में कैंसर का फैलाव दूसरे अंगों तक मिला। यह आंकड़ा देर से पहचान की गंभीर समस्या को उजागर करता है।

अध्ययन के अनुसार पंजीकृत हुए प्रोस्टेट कैंसर के कुल मामलों में से 75.6 फीसद मरीज 60 से 80 वर्ष की आयु वर्ग के थे, जो बढ़ती उम्र के साथ इस कैंसर की आशंका को दिखाता है। रोग की पैथोलाजी जांच के बाद 77 फीसदी मामलों में एडेनोकार्सिनोमा पाया गया। यह प्रोस्टेट कैंसर के लिए सबसे सामान्य प्रकार है। वहीं रोग की अवस्था के विश्लेषण से पता चला कि 57 फीसद मरीजों में कैंसर स्थानीयकृत (29.9 फीसद) या लोको-रीजनल (27 फीसद) अवस्था में था। जबकि 43 फीसद मरीज ऐसे थे जो दूरस्थ मेटास्टेसिस (दूसरे अंगों में फैलाव) के साथ अस्पताल पहुंचे।

पंजीकृत मरीजों में से करीब 30 फीसद मरीजों ने सर्जरी कराई, जबकि 22 फीसद को रेडिएशन थेरेपी दी गई। मेटास्टेटिक मामलों में सिस्टमिक थेरेपी (जैसे हार्मोन थेरेपी या कीमोथेरेपी) सबसे सामान्य एकल उपचार पद्धति रही। अध्ययन में पाया गया कि 80 फीसद से अधिक मरीजों ने निदान के दो माह के भीतर उपचार शुरू कर दिया। हालांकि, संदर्भ तंत्र में देरी और प्रशासनिक अड़चनों के कारण कुछ मरीजों का इलाज देर से शुरू हुआ।

50 साल के बाद हर साल स्क्रीनिंग देगी राहत

सफदरजंग अस्पताल में मेडिकल आन्कोलाजी विभाग के प्रमुख डाक्टर कौशल कालरा ने बताया कि 50 साल की उम्र के बाद प्रोस्टेट कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए पीएसए (प्रोस्टेट-विशिष्ट एंटीजन) रक्त जांच करवानी चाहिए। वहीं इस उम्र के बाद हर साल स्क्रीनिंग करवाने से रोग की पहचान जल्द हो सकती है। उनका कहना है कि उम्र बढ़ने के साथ डीएनए को मरम्मत करने वाली प्रक्रिया प्रभावित होती है। वहीं टेस्टोस्टेरोन (पुरुष हार्मोन) का एक्सपोजर देर तक होने से प्रोस्टेट कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है। उम्र के साथ घटने वाली रोग प्रतिरोधक क्षमता, प्रोस्टेट से जुड़े दूसरे रोग होने की आशंका, परिवार में पहले से कैंसर का होना, खराब जीवन शैली, रक्तचाप, मधमेह, उच्च वसायुक्त आहार, म्यूटेशन सहित दूसरे कारण इस कैंसर की आशंका को काफी बढ़ा देते हैं।

बचाव के लिए क्या करें

प्रोस्टेट कैंसर से बचाव के लिए स्वस्थ आहार (फल, सब्जियां, लाइकोपीन-युक्त टमाटर), नियमित शारीरिक व्यायाम, धूम्रपान से परहेज और स्वस्थ वजन बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

इस दिशा में करना होगा काम

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रोस्टेट कैंसर के बेहतर परिणामों के लिए शीघ्र पहचान और सुव्यवस्थित रेफरल प्रणाली बेहद जरूरी है। डिजिटल स्वास्थ्य रिकार्ड, मल्टीडिसिप्लिनरी ट्यूमर बोर्ड और संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय से उपचार की प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाया जा सकता है। पढ़ें प्रोस्टेट कैंसर का खतरा कम करने में मददगार साबित होती है ब्रोकली

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50 की उम्र के बाद पुरुषों की सेहत को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। प्रोस्टेट कैंसर प्रमुख कारण है। प्रोस्टेट कैंसर तब होता है जब प्रोस्टेट ग्रंथि के भीतर कुछ कोशिकाएं घातक परिवर्तन से गुजरती हैं। पढ़ें पूरी खबर