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देहरादून: कश्‍मीरी छात्रों के खिलाफ प्रदर्शन कर रही भीड़ चाहती थी इसलिए सस्‍पेंड कर दिए गए डीन

देहरादून स्थित अल्पाइन कॉलेज के डीन को कश्मीरी होने की वजह से सस्पेंड करना पड़ा। दरअसल, हिंदुवादी संगठन कश्मीरी छात्रों का विरोध कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कॉलेज के डीन को भी हटाने की मांग कर डाली। भीड़ के दबाव में प्रबंधन को यह फैसला लेना पड़ा।

देहरादून में हिंदुवादी संगठनों के आगे कॉलेज प्रबंधन को झुकना पड़ा और कश्मीर के रहने वाले डीन को निलंबित करना पड़ा। (Express Photo/Virender Singh Negi)

देहरादून में कश्मीरी छात्रों के खिलाफ उग्र प्रदर्शन की वजह से एक कॉलेज के डीन की छुट्टी करनी पड़ गई। शनिवार को दक्षिणपंथी हिदुवादी संगठनों की भीड़ ने अल्पाइन कॉलेज के बाहर जमकर प्रदर्शन किया। इनमें छात्र संगठन एबीवीपी, बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के सदस्य शामिल थे। उग्र भीड़ की मांग पर कॉलेज प्रबंधन ने अपने डीन आबिद मजीद को निलंबित कर दिया। दरअसल, भीड़ की मांग थी कि आबिद मजीद कश्मीरी हैं और उन्हें कॉलेज से तुरंत निकाला जाए। कश्मीर घाटी के कुलगाम जिले के रहने वाले मजीद ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया, “कॉलेज और कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा के लिए मैंने प्रबंधन से कहा कि वो मुझे सस्पेंड कर दे।”

इस दौरान जब अल्पाइन कॉलेज के चेयरमैन अनिल सैनी से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा, “भीड़ इतनी उग्र थी कि हमें उनकी मांग पूरी करनी पड़ी।” उन्होंने आबिद के सस्पेंशन पर कहा, “हमने कोई कारण नहीं बताया है। उनके निलंबन पत्र में कोई रिफरेंस नंबर भी नहीं दिया गया है, जो कि बेहद जरूरी है। बुनियादी तौर पर इस स्पेंशन का कोई कानूनी वैधता नहीं है। लेकिन, हमें भीड़ को देखते हुए इसे जारी करना पड़ा। हमें छात्रों की सुरक्षा के लिए हर काम करना पड़ेगा।” सैनी ने कहा कि आबिद मजीद का इतिहास काफी साफ-सुथरा रहा है। वह किसी भी राष्ट्र-विरोधी गतिविधि में शामिल नहीं रहे हैं। हालांकि, उनके दोबारा ड्यूटी जॉइन करने पर संदेह है।

गौरतलब है कि पुलवामा आतंकी हमले के बाद देहरादून में कश्मीरी छात्रों को निशाना बनाया गया। इस दौरान प्रदर्शन कर रही भीड़ ने तमाम कॉलेजों को अपने यहां से कश्मीरी छात्रों को निकालने के लिए कहा। हालांकि, कई शिक्षण संस्थानों ने अगले सत्र से कश्मीरी छात्रों का दाखिला नहीं लेने की बात कही है। अनुमान के मुताबिक इस वक्त देहरादून के अलग-अलग कॉलेजों में करीब 3,000 विद्यार्थी शिक्षा हासिल कर रहे हैं। पुलवामा हमले के बाद खतरे को भांपते हुए इनमें से सैंकड़ों ने शहर छोड़ दिया है।

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