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रक्षा मंत्रालय ने सीएजी को अबतक नहीं दी राफेल डील की कोई जानकारी, आठ महीने बाद भी अधर में ऑडिट रिपोर्ट

रक्षा मंत्रालय ने राफेल डील से जुड़ी किसी भी तरह की जानकारी सीएजी को देने से मना कर दिया है। ऑडिट में शामिल अधिकारियों के अनुसार, रक्षा मंत्रालय ने सीएजी को बताया है कि राफेल की फ्रांसीसी निर्माता कंपनी डसॉल्ट एविएशन ने कहा है कि वह अनुबंध के तीन साल बाद ही अपने ऑफसेट भागीदारों के किसी भी विवरण को साझा करेगा।

India,rafale offset deal,Performance Audit,french company dassault aviation,france,cag,Anil Ambaniरक्षा मंत्रालय ने राफेल डील से जुड़ी किसी भी तरह की जानकारी सीएजी को देने से मना कर दिया है। (file)

भारत के नियंत्रक एवं महालेखी परीक्षक (सीएजी) द्वारा डिफेंस पर सरकार को अपनी परफॉर्मेंन्स ऑडिट रिपोर्ट सौंपने के आठ महीने बाद यह खुलासा हुआ है कि उसमें फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन से राफेल विमानों की ऑफसेट डील का कोई उल्लेख नहीं है। अभी संसद में यह रिपोर्ट पेश होना बाकी है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय ने राफेल डील से जुड़ी किसी भी तरह की जानकारी सीएजी को देने से मना कर दिया है। ऑडिट में शामिल अधिकारियों के अनुसार, रक्षा मंत्रालय ने सीएजी को बताया है कि राफेल की फ्रांसीसी निर्माता कंपनी डसॉल्ट एविएशन ने कहा है कि वह अनुबंध के तीन साल बाद ही अपने ऑफसेट भागीदारों के किसी भी विवरण को साझा करेगा। बता दें कि भारत को पिछले महीने पांच लड़ाकू विमानों का पहली खेप मिली थी।

36 जेट लड़ाकू राफेल विमान के लिए भारत और फ्रांस के बीच 59,000 करोड़ रुपये सौदे पर हस्ताक्षर हुए थे। साल 2016 में हुए सौदे के मुताबिक डसॉल्ट एविएशन ने डील की तारीख से 36 से 67 महीने के अंदर सभी लड़ाकू विमान सप्लाय करने का वादा किया है।

दिसंबर 2019 में सरकार को सौंपी गई परफॉर्मेन्स ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि सीएजी ने केवल 12 रक्षा खरीद अनुबंधों की समीक्षा की है। सीएजी सूत्रों ने बताया, “हमें रक्षा मंत्रालय द्वारा बताया गया है कि राफेल के फ्रांसीसी निर्माता ने ऑफसेट सौदों पर अब तक कोई विवरण साझा नहीं किया है।” सूत्रों के मुताबिक सीएजी ने साल 2012-13 से लेकर 2017-18 के बीच राफेल डील समेत एयरफोर्स, नेवी और आर्मी से जुड़े 32 ऑफसेट डील की समीक्षा करने का फैसला 2019 के अंत में किया था लेकिन बाद में लिस्ट छोटी कर उसे 12 कर दिया गया।

2019 के लोकसभा चुनावों में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने राफेल डील को मुद्दा बनाया था। राहुल गांधी अपनी जनसभाओं में ‘चौकीदार चोर है’ का नारा लगवाते थे। कांग्रेस ने इस मामले में सीबीआई जांच की भी मांग की थी साथ ही ये आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने गुजराती कारोबारी मित्र को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों को ताक पर रख कर ये डील करवाई है। बता दें कि फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन और भारतीय रक्षा कंपनी अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेन्स के बीच राफेल को लेकर समझौते हुए हैं।

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