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J&K की हाड़ कंपाने वाली ठंड से कैसे निपटेंगे 70 हजार जवान? लाखों थर्मलवीयर से लेकर स्पेशल बैरक और टॉयलेट्स का इंतजाम

केंद्र सरकार की तरफ से अनुच्छेद 370 को खत्म किए जाने की घोषणा के बाद से सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीमा सुरक्षा बल और आईटीबीपी की 700 से अधिक कंपनियां जम्मू-कश्मीर भेजी जा चुकी हैं।

सेना की तरफ से इन सामानों की ऑनलाइन खरीदारी की गई है। (File Photo)

जम्मू और कश्मीर में 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से 70 हजार अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात हैं। अब सर्दियों की दस्तक के बाद से राज्य में पड़ने वाली हाड़ कंपा देने वाली ठंड से बचने के लिए सैन्य बलों की तरफ से व्यवस्था की जा रही है।

इसके लिए 1 लाख 20 हजार से अधिक थर्मल इनर वीयर, 60 हजार से अधिक परका जैकेट, स्लीपींग बैग्स और कंबल, करीब 70 प्री फैबरिकेटेड बैरक और 1500 से अधिक बुखारी (पारंपरिक हीटर) का इंतजाम किया जा रहा है। इसके अलावा 10 स्पेशल डिजाइन किए टॉयलेट, हजारों लीटर केरोसीन की भी व्यवस्था की जा रही है।

जिन प्री फैबरिकेटेड 70 बैरक की व्यवस्था की जा रही है इनमें से प्रत्येक बैरक में 40 जवान रह सकते हैं। मालूम हो कि केंद्र सरकार की तरफ से अनुच्छेद 370 को खत्म किए जाने की घोषणा के बाद से सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीमा सुरक्षा बल और आईटीबीपी की 700 से अधिक कंपनियां जम्मू-कश्मीर भेजी जा चुकी हैं। इन अर्द्धसैनिक बल की कंपनियों को भेजने का उद्देश्य राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखना है।

घाटी में पहले से ही अद्धसैनिक बलों के 60 हजार से अधिक जवान तैनात हैं।  केंद्रीय सैन्य बल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दिल्ली की तरफ से सैनिकों की संख्या में कटौती करने के अभी कोई संकेत नहीं मिले हैं। अधिकारी ने बताया कि आखिरी बार जब उन्होंने घाटी में अतिरिक्त सुरक्षा बलों के तैनात रहने के समय के बारे में नई दिल्ली से पूछा था तो उन्हें जवाब मिला था कि अगले अप्रैल से पहले इस बारे में कोई सवाल नहीं पूछा जाना चाहिए। इसलिए अर्धसैनिक बलों की तरफ से वहां सर्दियों का समय काटने की तैयारी की जा रही है।

एक अन्य अधिकारी ने बताया कि अतिरिक्त सुरक्षा बल अभी टेंट, सरकारी प्रतिष्ठानों, निर्माणाधीन इमारतों, गोदामों और यात्री कैंप में रह रहे हैं। इन स्थानों को सर्दियों के लिए किसी भी तरह से उपयुक्त नहीं माना जा सकता है। अधिकारी ने बताया कि अतिरिक्त सुरक्षा बलों को मैदानी इलाकों से वहां भेजा गया है, ऐसे में उन लोगों के पास कश्मीर की सर्दियों से मुकाबला करने के लिए वर्दियां नहीं है। इसलिए थर्मल्स, जैकेट्स, कंबलों और स्लीपिंग बैग खरीदे गए हैं।

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