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भारत में बनेंगी करगिल में PAK बंकर ध्वस्त करने वाली MILAN 2T मिसाइलें, जानें- क्यों हैं खास?

चीन और पाकिस्तान से हालिया तनाव के बाद अब केंद्र सरकार लगातार सेना की तीनों टुकड़ियों को मजबूत करने में जुटी है।

Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: March 19, 2021 1:12 PM
प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो- DefenceStories)

चीन और पाकिस्तान से तनाव के बीच भारत सरकार अब तेजी से सैन्यबलों के आधुनिकीकरण में जुटा है। हाल ही में सरकार ने वायुसेना को मजबूत करने के लिए रूस से मिग और सुखोई विमानों की डील की थी। अब थलसेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए रक्षा मंत्रालय ने भारत डायनामिक्स लिमिटेड को मिलान 2-T एंटी चैंक गाइडेड मिसाइल बनाने का कॉन्ट्रैक्ट दिया है।

रक्षा मंत्रालय ने यह सौदा 1188 करोड़ रुपए में तय किया है। इन मिसाइलों को भारत डायनामिक्स ने फ्रांस की डिफेंस फर्म के साथ लाइसेंस लेकर तैयार किया है। बताया गया है कि यह सरकारी कंपनी कुल 4960 एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल तैयार करेगी। बता दें कि केंद्र सरकार इन मिसाइलों के सौदे के लिए पिछले दो साल से तैयारी कर रहा था। हालांकि, इनके निर्माण में देरी के चलते सौदा लगातार टल रहा था।

सेना को मौजूदा समय में हजारों एंटी-टैंक मिसाइलों के साथ अतिरिक्त लॉन्चर्स की जरूरत है। उसकी योजना थर्ड जेनरेशन की एंटी-टैंक मिसाइलों को खरीदने की है, लेकिन इसमें अभी समय लगेगा। इन्हें अभी भारत में ही विकसित करने का काम चल रहा है। 2टी एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें मिलने से सेना की जरूरत काफी हद तक पूरी हो जाएगी। इनकी रेंज दो किमी. से कुछ ज्यादा है। दुश्मन सेना की टैंक रेजीमेंट से मुकाबले के लिए सेकंड जेनरेशन की ये मिसाइलें कारगर होंगी।

क्या है मिसाइल की खासियत?: मिलान 2टी मिसाइल का इस्तेमाल 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान हुआ था। हालांकि, उस दौरान इसे पाकिस्तानी फौजों के बंकरों को नष्ट करने के लिए इस्तेमाल किया गया था। मजबूत पाकिस्तानी बंकरों को वायर गाइडेड मिलान मिसाइल ने बखूबी तबाह किया था। मिलान 2टी फ्रांस की एटीजीएम है। सेमी-ऑटोमेटिक कमांड टू लाइन ऑफ साइट (एसएसीएलओएस) मिलान 2टी वायर गाइडेड मिसाइल है। इसका मतलब है कि लक्ष्य को भेदने के लिए लॉन्च युनिट को टारगेट सेट करना होगा। एमआईआरए और एमआईएलआईएस थर्मल साइट तकनीक से लैस होने की वजह से यह रात में भी लक्ष्य को भेद सकती है।

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