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चीन की हाइपरसोनिक मिसाइल भारत के लिए बन सकती है चुनौती! राजनाथ सिंह बोले- हमें भी ऐसे हथियारों की ज़रूरत

हाल ही में अमेरिकी संसद की एक रिपोर्ट सामने आई थी जिसमें इस बात का खुलासा किया गया था कि भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल है जो मैक-7 स्पीड की रफ्तार से दौड़ने वाली हाइपरसोनिक मिसाइल तैयार कर रहा है।

rajnath singh, defence minister
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह(फोटो सोर्स: PTI/फाइल)।

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाइपरसोनिक मिसाइल के निर्माण को लेकर जोर दिया है। उन्होंने मंगलवार को डीआरडीओ के स्वदेशी हथियारों से ‘भविष्य के लिए तैयारी’ नाम के एक सेमिनार को संबोधित किया। इस दौरान राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत को भी हाइपरसोनिक मिसाइल विकसित करने की दिशा में काम करना चाहिए।

रक्षा मंत्री ने कहा कि समय के साथ बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणालियां और बेहतर होती जा रही हैं। ऐसे में न्यूनतम विश्वसनीय प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के लिए हाइपरसोनिक मिसाइल की आवश्यकता है। गौरतलब है कि राजनाथ सिंह का बयान ऐसे समय में आया है कि जब एक रिपोर्ट में कहा गया अगस्त में चीन ने एक से अधिक हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण किया।

भारत को रक्षा प्रौद्योगिकी में अग्रणी बनाने का प्रयास: कार्यक्रम में राजनाथ सिंह ने कहा कि हमारा प्रयास होना चाहिए कि भारत रक्षा प्रौद्योगिकी में अग्रणी बने। हम जिन तकनीकों को खुद बनाने में सक्षम हैं, वे अब हमारी हैं। साथ ही हमें उन तकनीकों का स्वदेशीकरण करना होगा जो आज के दौर में सिर्फ कुछ चुनिंदा देशों के ही पास है। उन्होंने कहा कि बैलिस्टिक मिसाइल तकनीक प्रतिदिन अधिक मजबूत होती जा रही है।

मिलकर काम करना होगा: रक्षा मंत्री ने कहा कि हमें अपनी न्यूनतम विश्वसनीय प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के लिए हमें हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलों के विकास के बारे में जल्द ही सोचना होगा। यह हमारे रक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव होगा और इसके लिए हम सभी को मिलकर काम करना होगा।

उन्होंने कहा, “जैसे-जैसे समय बदल रहा है, हमारी रक्षा आवश्यकताएं भी बदल रही हैं। आज युद्ध के मैदान में तकनीक का अधिक प्रयोग आ गया है।” उन्होंने साइबर, स्पेस, आईटी, रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बिग डेटा एनालिसिस जैसी नई तकनीकों का भी जिक्र किया, जो हर दिन युद्ध में नए अध्याय जोड़ रही हैं।

जानिए हाइपरसोनिक मिसाइल के बारे में: बता दें कि इस तरह की मिसाइल एक गाड़ी की तरह है जो पेलोड (परमाणु या अन्य हथियारों) को ढोने का काम करती है। इसकी गति के आधार पर इस मिसाइल की तीन प्रकार की होती है। जिसमें सबसोनिक, सुपरसोनिक और हाइपरसोनिक। जिसमें सबसोनिक की गति ध्वनि की गति (330मी/सेकेंड) से कम होती है। वहीं सुपरसोनिक की गति ध्वनि की गति से अधिक होती है। इसकी रफ्तार ध्वनि से पांच गुनी (6,174 किमी/घंटा) होती है।

हाइपरसोनिक मिसाइल दो तरह की होती हैं: हाइपरसोनिक मिसाइल की बात करें तो इसकी रफ्तार सबसे अधिक होती है। यह ध्वनि की गति से काफी तेज उड़ान भरने में सक्षम होती है। यह दो तरह की होती है। पहला हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल और दूसरा हाइपरसोनिक ग्लाइड वीइकल। हाइपरसोनिक क्रूज सामान्य क्रूज मिसाइल की तरह होती है, लेकिन इसकी गति को बढ़ाने के लिए इसमें हाइस्पीड जेट इंजन लगे होते हैं जो इसकी गति को मैक-5 (ध्वनि की गति से पांच गुनी) या उससे अधिक रफ्तार देने का काम करता है।

वहीं हाइपरसोनिक ग्लाइड वीइकल को किसी रॉकेट की मदद से अंतरिक्ष में लॉन्च किया जाता है। आज के मौजूदा दौर में अमेरिका, रूस, चीन, भारत, फ्रांस और यूके इस तरह के हथियारों पर काम कर रहे हैं।

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