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‘LAC पर अप्रैल से पूर्व की स्थिति बहाल होगी’, राज्यसभा में बोले रक्षा मंत्री; जानें कितना पीछे हटेंगी भारत-चीन की सेनाएं

चीन के रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को कहा था कि पूर्वी लद्दाख में पैंगोग झील के उत्तरी और दक्षिणी छोर पर तैनात भारत और चीन के अग्रिम पंक्ति के सैनिकों ने पीछे हटना शुर कर दिया है।

Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: February 11, 2021 11:31 AM
राज्यसभा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह। (फोटो- स्क्रीनग्रैब)

भारत और चीन के बीच लद्दाख स्थित एलएसी पर पिछले 9 महीने से ज्यादा समय से तनाव जारी है। इसे लेकर आज रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह राज्यसभा में बयान दिया। रक्षा मंत्री ने चीनी रक्षा मंत्रालय की ओर से दोनों देशों की सेनाओं के पीछे हटने वाले बयान की पुष्टि करते हुए कहा, “हमारी बातचीत से पैंगोंग सो के उत्तरी किनारे और दक्षिणी किनारे से पीछे हटने पर समझौता हो गया है। इसके अलावा यह बात भी हुई है कि पैंगोंग सो से पूर्ण रूप से पीछे हटने के 48 घंटे के अंदर कमांडर स्तर की बैठक हो और बाकी मुद्दों पर भी हल निकाला जाए।”

कितना पीछे हटेंगी दोनों देशों की सेना?: राजनाथ सिंह ने सदन में बताया कि चीन के साथ पैंगोंग लेक एरिया में पीछे हटने का जो समझौता हुआ है, उसके मुताबिक दोनों देश अपनी फ्रंटलाइन सेनाओं को पीछे हटाएंगे। चीन फिंगर-8 की पूर्व की दिशा की तरफ रखेगा, इसी तरह भारत अपनी सेना को फिंगर-3 के पास अपने परमानेंट बेस धन सिंह तथापा पोस्ट पर रखेगा। इसी तरह की कार्यवाही साउथ बैंक पर भी की जाएगी। जो भी निर्माण आदि दोनों पक्षों द्वारा अप्रैल के बाद से नॉर्थ और साउथ बैंक पर किया गया है, उसे हटा दिया जाएगा और पुरानी स्थिति कायम की जाएगी।

‘एलएसी पर पैट्रोलिंग स्थगित रहेगी’: रक्षा मंत्री ने बताया कि दोनों देशों की सेनाएं पैट्रोलिंग को स्थगित रखेंगी। इसकी शुरुआत राजनयिक स्तर पर समझौते के बाद ही होगी। मैं सदन को आश्वस्त करना चाहता हूं कि इस बातचीत में हमने कुछ भी खोया नहीं है। अभी भी एलएसी पर तैनाती और पैट्रोलिंग को लेकर कुछ मुद्दे बाकी रह गए हैं। इन पर हमारा ध्यान आगे की बातचीत में रहेगा। अब तक की बातचीत के बाद चीन भी देश की संप्रभुता की रक्षा के हमारे संकल्प से पूरी तरह अवगत है।

‘चीन के कदमों से दोनों देशों के रिश्ते पर असर पड़ा’: राजनाथ सिंह ने कहा पिछले कुछ समय में चीन की तरफ से उठाए गए कदमों से दोनों देशों के संबंधों पर असर पड़ा है। हमने स्पष्ट कर दिया है कि तनाव के सभी बिंदुओं पर पीछे हटा जाए, ताकि फिर शांति स्थापित हो सके। चीन ने बड़ी संख्या में गोला बारूद सीमा के आसपास अपने क्षेत्र में स्थापित कर लिया है। भारत की तरफ से भी प्रभावी काउंटर तैनातियां की गई हैं। भारत ने इन सभी चुनौतियों का जमकर सामना किया है।

‘PoK में भी हमारी जमीन चीन के कब्जे में’: रक्षा मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान ने अपने कब्जे वाले कश्मीर की जमीन चीन को सौंपी है, इसके अलावा चीन भारत की बड़ी जमीन पर कब्जा किए है। रक्षा मंत्री ने कहा कि चीन अरुणाचल प्रदेश में 90 हजार वर्ग किमी की जमीन को अपना बताता है। भारत इन अपुष्ट दावों को कभी स्वीकार नहीं करता। सीमा पर शांति बनाए रखना दोनों देशों के रिश्ते के लिए भी अहम है।

चीनी रक्षा मंत्रालय ने कल जारी किया था बयान: गौरतलब है कि एक दिन पहले ही चीन ने बयान जारी कर कहा था कि दोनों देशों की सेनाएं एक साथ पीछे हटने पर सहमत हुई हैं और इसकी शुरुआत की जा चुकी है। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, भारत और चीन के ग्राउंड कमांडर मंगलवार और बुधवार पैंगोंग सो के उत्तर और दक्षिणी तट पर मिले और पीछे हटने के कदम उठाए।

चीन के रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को कहा था कि पूर्वी लद्दाख में पैंगोग झील के उत्तरी और दक्षिणी छोर पर तैनात भारत और चीन के अग्रिम पंक्ति के सैनिकों ने बुधवार से व्यवस्थित तरीके से पीछे हटना शुरू कर दिया। भारतीय पक्ष की ओर से इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं आई है। चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल वु कियान ने कहा कि पूर्वी लद्दाख में पैंगोग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारों पर तैनात भारत और चीन के अग्रिम पंक्ति के सैनिकों ने बुधवार से व्यवस्थित तरीके से पीछे हटना शुरू कर दिया। उनके इस बयान से संबंधित खबर चीन के आधिकारिक मीडिया ने साझा की है।

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