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पर्रिकर ने कही सेना में मैनपावर कम करने की बात, सैलरी-पेंशन को बताया आर्थिक बोझ

बताया जा रहा है कि सेना में मैनपावर में इसलिए कटौती की जा रही है क्योंकि रक्षामंत्रालय पर सैलरी और पेंशन का भार बढ़ रहा है। रक्षामंत्री का मानना है कि सैलरी और पेंशन के बोझ से फंड कम हो रहा है और इसका असर सेना के आधुनिकरण पर पड़ रहा है।

Author नई दिल्ली | March 5, 2016 17:52 pm
राफेल डील पर पार्रिकर का कहना है कि वे मोलभाव बहुत अच्छे से कर लेते हैं और वे फ्रांस से राफेल सही कीमत पर खरीदना चाहते हैं। फ्रांस से भारत 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदना चाहता है। (File Photo)

रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने शुक्रवार को सेना में मैनपावर कम करने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों में अतिरिक्त संशाधनों को हटाने की जरूरत है। बताया जा रहा है कि सेना में मैनपावर में इसलिए कटौती की जा रही है क्योंकि रक्षामंत्रालय पर सैलरी और पेंशन का भार बढ़ रहा है। रक्षामंत्री का मानना है कि सैलरी और पेंशन के बोझ से फंड कम हो रहा है और इसका असर सेना के आधुनिकरण पर पड़ रहा है।

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राफेल डील पर पर्रिकर का कहना है कि वे मोलभाव बहुत अच्छे से कर लेते हैं और वे फ्रांस से राफेल सही कीमत पर खरीदना चाहते हैं। फ्रांस से भारत 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदना चाहता है। जब रक्षामंत्री से शुक्रवार को पूछा गया कि यह डील अभी तक फाइनल क्यों नहीं हुई तो उन्होंने कहा कि मैं मोलभाव करने में माहिर हूं और मुझे देश के लिए पैसे बचाने दीजिए। उन्होंने भारतीय वायुसेना को एयरक्राफ्ट की जरूरत का पता होने की बात कहते हुए बताया कि कोई भी अच्छा ग्राहक अपनी कमजोरी को जाहिर नहीं होने देता है। वह हमेशा अपने पत्ते बचाकर चलता है। इसलिए मुझे राष्ट्रहित में मेरे पत्तों का खुलासा करने के लिए मत पूछिए।

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अप्रेल 2015 में मोदी की फ्रांस यात्रा के दौरान इस डील की घोषणा की गई थी। फ्रांस 36 राफेल लड़ाकू विमानों की ज्यादा कीमत मांग रहा है, जबकि भारत वह कीमत कम करवाना चाहता है। यह सौदा करीब 60 हजार करोड रुपए का होगा। जनवरी में फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांसिस औलांड की भारत यात्रा के दौरान इस डील पर दस्तख्त किए गए थे। लेकिन यह डील कीमत की वजह से पैदा हुए मतभेद की वजह से रुक गई।

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