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केजरीवाल और आप के पांच नेताओं को मिली जमानत

केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली की ओर से दाखिल आपराधिक मानहानि मामले में गुरुवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित छह आरोपियों को जमानत मिल गई।

(Source: PTI)

केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली की ओर से दाखिल आपराधिक मानहानि मामले में गुरुवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित छह आरोपियों को जमानत मिल गई। आरोपी के तौर पर समन किए गए केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के पांच अन्य नेताओं को दिल्ली की एक अदालत ने जमानत दे दी। उधर, अदालत बैठी थी और दूसरी तरफ परिसर के गेट पर आप व भाजपा कार्यकर्ता अपनी जोर आजमाइश कर रहे थे। पुलिस को उन्हें रोकने के लिए मामूली बल प्रयोग भी करना पड़ा।
बहरहाल, इस मामले में अगर जेटली निचली अदालत में आरोप साबित कर देते हैं तो आप नेताओं को दो साल तक की सजा हो सकती है। मामले से जुड़े दूसरे मामले में अगर दिल्ली हाईकोर्ट में केजरीवाल दीवानी क्षतिपूर्ति का केस हार जाते हैं तो उन्हें दस करोड़ रुपए भरने पड़ सकते हैं।

मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट सुमित दास ने केजरीवाल, आप नेताओं आशुतोष, संजय सिंह, कुमार विश्वास, राघव चड्ढा और दीपक वाजपेयी को 20 -20 हजार रुपए के निजी मुचलके व इतनी ही राशि की गारंटी पर जमानत दे दी। इससे पहले नौ मार्च को भेजे समन का अनुपालन करते हुए केजरीवाल व अन्य आरोपी अदालत में पेश हुए थे। अदालत ने अब आगे की जिरह के लिए 19 मई की तारीख तय की है। दोपहर करीब दो बज कर 35 मिनट पर शुरू हुई सुनवाई के दौरान सभी आरोपियों ने अदालत के समक्ष अपनी जमानत याचिकाएं रखीं जिसने उन्हें राहत दे दी। जेटली भी अदालत कक्ष में मौजूद थे।

संक्षिप्त सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से पेश हुए वकील ने अदालत को बताया कि उन्हें सभी दस्तावेज नहीं सौंपे गए हैं जिसके बाद जेटली की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लुथरा ने कहा कि वे बचाव पक्ष के वकील को दस्तावेजों का पूरा सेट मुहैया कराएंगे। शुरुआत में अदालत ने आरोपियों को 25-25 हजार रुपए के निजी मुचलके और समान राशि की एक गारंटी पर जमानत दे दी लेकिन बचाव पक्ष के एक वकील ने अदालत को बताया कि वे 20-20 हजार रुपए की सावधि जमा की रसीदें लेकर आए हैं। यह सुनने पर अदालत ने जमानत राशि को 25 से घटा कर 20 हजार कर दिया और मामले की अगली सुनवाई के लिए 19 मई की तारीख तय कर दी।

मुख्यमंत्री के सलाहकार गोपाल मोहन ने केजरीवाल के लिए गारंटी दी और दिल्ली के मंत्री इमरान हुसैन ने आशुतोष के लिए गारंटी दी जबकि आप विधायक नरेश बाल्यान, नितिन त्यागी, नरेश यादव और आप नेता संजीव ने क्रम से संजय सिंह, कुमार विश्वास, दीपक वाजपेयी व राघव चड्ढा के लिए गारंटी दी।

मामले पर सुनवाई से पहले भाजपा और आप के समर्थक पटियाला हाउस अदालत परिसर के गेट नंबर दो के बाहर जमा हो गए और एक दूसरे के खिलाफ नारेबाजी की। आरोपी आप नेता और जेटली कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत में आए। केवल आरोपियों, गारंटी देने वालों, जेटली व दोनों पक्षों के वकीलों और छह पत्रकारों को अदालत कक्ष में जाने की अनुमति दी गई। अदालत ने नौ मार्च को केजरीवाल व आप के पांच अन्य नेताओं को अदालत में हाजिर होने का आदेश दिया था और साथ ही इस बात को रेखांकित किया था कि आरोप मानहानिजनक हैं।

अदालत ने इस बात को रेखांकित किया था कि आरोपियों की ओर से जेटली के खिलाफ लगाए गए आरोप न केवल अपमानजनक हैं बल्कि भड़काऊ भी हैं और सभी छह आरोपियों को धारा 500 (मानहानि) और धारा 34 (समान मंशा) के तहत कथित अपराधों के लिए तलब किया था।

जेटली ने केजरीवाल व आप के पांच नेताओं के खिलाफ आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें कहा गया था कि आरोपियों ने कथित रूप से दिल्ली जिला क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) विवाद में उनकी बदनामी की। आरोपियों को तलब करते हुए अदालत ने आरोपियों के बयानों, फेसबुक और ट्विटर पोस्ट का भी हवाला दिया और कहा कि बयानों ने शिकायतकर्ता के खिलाफ समाज के सही सोच रखने वाले सदस्यों के बीच नफरत का माहौल बनाया और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।

अदालत ने इस बात पर भी गौर किया कि गवाहों के बयानों के समय जेटली ने रिकार्ड पर यह साबित किया कि जब वह डीडीसीए के अध्यक्ष थे तो खातों की लेखा परीक्षा हुई और एजीएम से मंजूरी दी गई व इसे कराधान प्राधिकार को सौंपा गया। अपनी शिकायत में जेटली ने आरोप लगाया था कि केजरीवाल और अन्य ने ऐसे मानहानिजनक बयान दिए कि उन्होंने और उनके परिवार ने स्पोर्ट्स मैनेजमेंट कंपनी मैसर्ज 21 सेंचुरी मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ मिल कर मुनाफा कमाया। पांच जनवरी को जेटली ने अदालत में पेश होकर कहा था कि केजरीवाल व पांच अन्य आप नेताओं ने झूठे और मानहानिजनक बयान दिए। उन्होंने इस आरोप को पूरी तरह खारिज किया था कि उन्होंने अपने फायदे के लिए डीडीसीए से पैसा कमाया।

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