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दीनदयाल उपाध्‍याय ने कहा था- लोकतंत्र बहुमत का शासन नहीं, विरोधी स्‍वर का सम्‍मान करना है

दीनदयाल उपाध्याय जब जनसंघ के अध्यक्ष थे और लोकप्रियता की ऊंचाई पर थे तब 11 फरवरी, 1968 को उनका शव मुगलसराय रेलवे स्टेशन के पास संदिग्ध हालत में मिला था। आज तक उनकी मौत का रहस्य बरकरार है।

pandit deendayal upadhyaya, bjp
दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर 1916 को उत्तर प्रदेश के मथुरा में हुआ था। (तस्वीर- बीजेपी डॉट ऑर्ग से साभार)
जनसंघ के संस्थापक दीनदयाल उपाध्याय की 11 फरवरी को पुण्‍यत‍िथ‍ि होती है। बीजेपी उनके द्वारा प्रतिपादित अंत्योदय और एकात्म मानववाद के जीवनदर्शन को जन-जन तक फैलाने की कोशिश करती रही है। दीनदयाल उपाध्याय देश की एकता के लिए लोकतंत्र को अनिवार्य मानते थे लेकिन उनका स्पष्ट मानना था कि लोकतंत्र बहुमत का शासन नहीं है। वह बहुमत और अल्पमत की पश्चिमी अवधारणा से पूरी तरह सहमत नहीं थे। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया था कि मध्यकालीन भारत के राज्यों में पूरी तरह से लोकतंत्र था। उस समय वैदिक सभा और समितियां लोकतंत्र के आधार पर ही गठित होती थीं और संचालित होती थीं।

एक बार उन्होंने कहा था, “आप जो कहते हैं, मैं उससे इनकार करता हूं लेकिन अपनी मौत तक आपके अधिकारों की रक्षा करूंगा।” इसे अक्सर वोल्टायर की राजनीतिक मान्यताओं के सारांश के रूप में प्रस्तुत किया जाता है और लिखा जाता है, “भारतीय संस्कृति इससे परे है और लोकतांत्रिक चर्चा को कुछ ऐसा मानती है जिसके माध्यम से हम विचार के सार पर आते हैं।”

दीनदयाल उपाध्याय के मुताबिक, “लोकतंत्र की मुख्यधारा सहिष्णुता रही है। इसकी अनुपस्थिति में चुनाव, विधायिका आदि निर्जीव हैं। सहिष्णुता भारतीय संस्कृति का आधार है। यह हमें जनता की बड़ी इच्छाओं को जानने की शक्ति देता है।”

उपाध्याय ने लिखा है, “लोकतंत्र केवल बहुमत का शासन नहीं होना चाहिए बल्कि वहां समाज के लोगों की ऐसी नुमाइंदगी का शासन होना चाहिए जहां कम से कम उनकी आवाज पहुंच सके।” हालांकि, उन्होंने यह भी कहा, “अगर किसी का मत बहुमत के विपरीत हो, भले ही वह अकेला हो, तब भी उसकी भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए और उसे शासन तंत्र में तवज्जो दिया जाना चाहिए।”

पंडित दीनदयाल उपाध्याय भीड़तंत्र के कानून से लोगों को आगाह करते थे। उन्होंने लिखा है, “सरकार के दो रूपों – लोकतंत्र और स्वतंत्रता के बीच लोकतंत्र को जिंदा बचाए रखना मुश्किल है।”

बता दें कि दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर, 1916 को मथुरा से करीब 30 किलोमीटर दूर नागला चंद्रबन गांव में हुआ था। जब वो जनसंघ के अध्यक्ष थे और लोकप्रियता की ऊंचाई पर थे तब 11 फरवरी, 1968 को उनका शव मुगलसराय रेलवे स्टेशन के पास संदिग्ध हालत में मिला था। आज तक उनकी मौत का रहस्य बरकरार है।

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